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Monday, April 25, 2016

टीवी पर लौटा धार्मिक सीरियलों का दौर

-प्रेमबाबू शर्मा

एक दौर जब टीवी पर सास भी कभी बहू थी,कहानी घर घर की, जैसे शो की लोकप्रियता के आगे कोई भी शो नही टिक पा रहा था,लेकिन बदलते समय के साथ टीवी ने भी करबट और अब एक बार फिर से धर्मिक सीरियलों का दौर रहा है। दूरदर्शन पर सबसे पहले रामायण, श्रीकृष्णा और फिर महाभारत ने रंग जमाया। साल 2011 में एकबार फिर रामायण का जबरदस्त दौर चला और इस बार चैबीस घंटे का माध्यम होने के कारण इसका प्रभाव दूरदर्शन के जमाने से भी ज्यादा मजबूत रहा। दरअसल धर्म के जरिए टीवी रह रहकर समाज में अपने ताकतवर होने का अहसास कराता रहा है। अब एक बार फिर से अचानक बहुत सारे धार्मिक सीरियल फिर से टीवी पर धूम मचाने आ गए हैं। वजह यही है कि इसकी जडंे सिनेमा के मुकाबले ज्यादा मजबूत 

‘‘सिया के राम’ सीरियल स्टार प्लस चैनल पर खूब देखा जा रहा है। इसमें सीता के जीवन की कहानी है। सोनी टीवी पर ‘‘संकट मोचन महाबली हनुमान‘‘ और ‘‘सूर्य पुत्र कर्ण‘‘ बैक टू बैक टेलीकास्ट होने का बावजूद दिन ब दिन अपनी दर्शक संख्या बढ़ा रहे हैं। एंड टीवी चैनल पर ‘‘जय संतोषी मां‘‘ की टीआरपी लगातार परवान चढ़ रही है। स्टार गोल्ड पर पुरानी वाली महाभारत की महिमा का देश के ग्रामीण इलाकों में अब भी कोई तोड़ नहीं है। एपिक चैनल पर रामायण ने एक खास दर्शक वर्ग बना लिया है।
  डिस्कवरी किड्स पर लिटिल कृष्णा का एनिमेशन अवतार बच्चों में जबरदस्त धूम मचा रहा है। इसी चैनल पर किसना भी बच्चों को आकर्षित कर रहा है। तो, कार्टुन नेटवर्क पर रिटर्न्स ऑफ हनुमान जब बच्चे देखते हैं, तो उठने का नाम ही नहीं लेते। बच्चों के एक और चैनल पोगो पर दिख रहे छोटा भीम ने तो घर-घर में जगह बना ली है।
माना जा सकता है कि परंपरा और संस्कृति की कहानियों को अगर ताजा अंदाज में कहा जाए, तो किसी भी काल में दर्शक वर्ग बन ही जाता है। बात सही भी है कि हमारी जो परंपरा हजारों साल से चली आ रही है, दर्शकों पर उसका असर तो होता ही है। हमारे टीवी के परदे पर यह उसी असर का परिदृश्य है, जिसमें सीता, राम, हनुमान, संतोषी मां, कर्ण, कृष्ण और भीम फिर से बहुत चाव के साथ देखे जा रहे हैं। 
यह हमारे टेलीविजन का नया चेहरा है। जो सास बहू और रिश्तों के रंग से आजाद होकर एक बार फिर से धर्म के रंग में रंगता दिख रहा है। टीवी के धर्म के रंग में रंगने का यह तीसरा दौर है। सबसे पहले कोई 25 साल पहले रामायण,श्रीकृष्णा ने धूम मचाई थी। उसके तत्काल बाद टीवी पर महाभारत आई। वह पहला दौर था। दूसरा दौर आया सन 2009 के आखिर में शनिदेव की माहिमा,फिर 2011 में जब लाइफ ओके चैनल पर भगवान शिव पर आधारित ‘‘देवों के देव..महादेव‘‘ की शुरुआत हुई। जबरदस्त टीआरपी मिलने से लाइफ ओके के हौसले बुलंद हुए, तो तत्काल बाद लाइफ ओके पर कथा महादेव पुत्र बाल गणोश की भी आ गई थी।अभी कुछ दिन पहले ही रतन राजपूत और ग्रेसी सिंह मुंबई के एक मंदिर में संतोषी माता की महाआरती करती दिखीं। दोनों वहां माता का आशीर्वाद लेने आई थीं। रतन ने कहा -‘‘मैं अपने हाल ही मैं प्रसारित हुए शो को लेकर कुछ नर्वस हूं। धर्म और भगवान में मेरा विास है। इसलिए उम्मीद है कि हमारा यह सीरियल अच्छा चलेगा।‘‘ सन् 2001 की सुपरहिट फिल्म ‘‘लगान‘‘ में गौरी के किरदार से अचानक बहुत विख्यात हुई और बाद में पंद्रह साल तक लुप्त हो गई। ग्रेसी सिंह भी ‘‘संतोषी मां‘‘ में नजर आ रही हैं। ग्रेसी इसमें संतोषी माता के किरदार में हैं। रतन राजपूत भी अहम रोल में हैं। 
स्टार प्लस पर प्रसारित होने वाले सीरियल ‘‘सिया के राम’ के सेट की खूब र्चचा है। रावण के साम्राज्य के बाहरी हिस्सों की शूटिंग के लिए जल्द ही इस प्रोडक्शन की टीम श्रीलंका जाएगी। ट्रैंगल प्रोडक्शन्स की तरफ से बताया गया कि सीरियल की शूटिंग फिलहाल भारत में की जा रही है। कुछ हिस्सों की शूटिंग भुज में की गई है और जल्द ही इस टीम के लोग भूटान जाएंगे। इस सीरियल में जब रावण का घर दिखाया जाएगा, तो उसे प्रामाणिक लुक देने के लिए एक टीम श्रीलंका में शूटिंग करेगी। इस कथा को पहली बार मिथिला कुमारी सीता के दृष्टिकोण से दिखाया जा रहा है। इसमें मदिराक्षी सीता की भूमिका में है। लाइफ ओके पर देवों के देव महादेव लगातार तीन साल तक अपना रंग जमाए रहा। उस दौरान महादेव का किरदार निभाने वाले कलाकार मोहित रैना के दर्शन करने लोग उनके घर के बाहर जमा होते थे वे जहां भी जाते, लोग उनके पांव छूने लग जाते थे।टीवी पर धर्म के इस तीसरे दौर के बारे में समाजशास्त्री डॉ. विजय शर्मा कहते हैं कि ‘‘बहुत सालों से लोग टीवी पर सास बहू के सीरियल देखकर ऊब गए थे। अब एक बार फिर से हमारी संस्कृति की पारंपरिक कथाएं नए स्वरूप में आ रही हैं, तो लोग तो देखेंगे ही। यही कारण है कि गीता, रामायण और महाभारत के किरदार अलग-अलग कहानियों के साथ फिर से पूरी धमक के साथ लौट आए हैं।‘‘ सफलता के सुर जब सिर चढ़कर बोलने लगते हैं, तो सुनने वाले भी मिल ही जाते हैं। यही कारण है कि सीता, राम, हनुमान, कर्ण और कृष्ण, सारे के सारे टीआरपी के मैदान में बाजी मारने को बेताब हैं। सही मायने में कहा जाए तो दुनिया में किसी भी देश के मुकाबले भारत में टीवी बहुत देर से आया है। हमारे देश में टीवी का वास्तविक विकास तो सिर्फ बीस-पच्चीस साल ही पुराना है। यह अभी-अभी जवान हुआ है। टेलीविजन के असली विकास की शुरुआत को अभी लगभग ढाई दशक का समय भी नहीं बीता लेकिन टीवी आज सबसे ज्यादा और गहरे असरकारक माध्यम के रूप में हमारे सामने है। आज किसी को भी अपनी बात कहनी हो, तो टीवी सबसे व्यापक, सबसे तेज और सबसे असरकारक माध्यम है। तब, जब हमारे देश में सिर्फ दूरदर्शन ही हुआ करता था, तब से ही रामायण और महाभारत के दौर में इसकी भनक मिल गई थी। इसी कारण धार्मिक सीरियल रह रहकर मजबूती के साथ सामने आते रहे हैं।पच्चीस साल पहले जब दूरदर्शन पर रामायण सीरियल आया था तो लोग उस समय टीवी के सामने दिया जलाकर, फूल चढ़ाने के साथ जूते-चप्पल उतारकर सीरियल देखते थे और सीरियल की समाप्ति पर आरती के बाद प्रसाद भी बांटा करते थे। बी.आर. चोपड़ा के महाभारत के कृष्ण नीतीश भारद्वाज को तो गांवों में लोग भगवान का अवतार ही मानते थे। टीवी धारावाहिक निर्माता धीरज कुमार की बात बिल्कुल सही लगती है कि ‘‘आज के पेरेंट्स चाहते हैं कि उनके बच्चे धार्मिक धारावाहिक देखें और उनसे संस्कार लेने के साथ अच्छी बातें भी सीखें। इसलिए धार्मिक धारावाहिक कुछ-कुछ अंतराल के बाद अलग-अलग रूप में अवतरित होते रहे हैं।‘‘ सोनी, कलर्स, जी, स्टार प्लस और ऐसे ही मुख्यधारा के चैनलों की तो छोड़िये, काटरून नेटवर्क, पोगो, सोनिक, डिज्नी, डिस्कवरी किड्स, जैसे चैनल भी इसी धारा में बह रहे हैं, क्योंकि बच्चों को तो संस्कार और परंपरा की सीख वहीं से मिलेगी। जहां तक आम दर्शक की बात है तो वह आधुनिकता की दौड़ में सहभागी होने के साथ-साथ अपनी जड़ों से जुड़े रहना ज्यादा पसंद करता है। यही देखकर टीवी के परदे का ताजा परिदृश्य देखें, तो सच्चाई यही है कि ज्यादातर चैनल धर्म के रंग की ऐसी कहानियां रच रहे हैं जिनसे समाज को प्रेरणा मिले और बच्चे, बड़े और बूढ़े हर किसी के जीवन में कुछ न कुछ बदलाव आए। टीवी धारावाहिकों की फैक्टरी के नाम से मशहूर एकता कपूर की इस बात में दम है कि व्यक्ति चाहे कितना भी आधुनिक क्यों न हो जाए, वह उस आधुनिकता को भी धर्म के अनुसार ही जीता है। क्योंकि संस्कार हमारे जीवन की जड़ें हैं और आपसी लड़ाई झगड़े हमारी दिनर्चया का हिस्सा। ये सारी चीजें साथ-साथ चलती हैं। यही वजह है कि टीवी के परदे पर अचानक बहुत रंग भर गई जिंदगी की कहानियों के बीच धर्म ने भी अपनी धमक फिर से बना ली है

‘चक्रवर्ती सम्राट अशोक’ में नए अशोक

-प्रेमबाबू शर्मा

कलर्स पर प्रसारित होने वाले धारावाहिक ‘चक्रवर्ती सम्राट अशोक’ अब कई सालों का लीप ले रहा है और खास बात यह है कि इसमें लोगों के चहीते अशोक यानी कि सिद्धार्थ निगम की जगह मोहित रैना दिखने वाले हैं।
पिछले कई दिनों से यह चर्चा चल रही थी कि सालों के लीप के बाद अशोक का किरदार कौन करेगा। अब खुद चैनल ने मोहित के नाम की आधिकारिक घोषणा कर दी है।

मोहित इससे पहले देवों के देव महादेव में काम कर चुके हैं और इसमें मोहित को काफी पसंद किया गया था। चक्रवर्ती सम्राट अशोक में बदलाव को लेकर कई दिनों से बातें हो रही हैं।

खुद चैनल की ओर से जारी किए गए एक टीजर में दिखाया जा चुका है कि अशोक अब बड़े हो चुके हैं। हालांकि उसमें बदले गए अशोक का चेहरा नहीं गुप्त रखा गया था।

24 शहरों में होगा "भजन रत्‍न’’ रिएलिटी शो का ऑडिशन

अनूप जलोटा, मालिनी अवस्‍थी और पंडित बिरजू महराज करेंगे इस शो को जज

-प्रेमबाबू शर्मा


नई दिल्‍ली। एक बार फिर देश में रिएलिटी शो की धूम मची है। डांस इंडिया डांस, यू थिंक यू कैन डांस, के बीच एक नये रिएलिटी शो का आगाज होने जा रहा हैा लेकिन यह रिएलिटी शो बिलकुल अनूठा है। जो भजन पर बेस्‍ड हैा अथ इंटरटेनमेंट के बैनर तले शुरू होने जा रहे इस रिएलिटी शो क नाम रखा गया है भजन रत्‍न । इस रिएलिटी शो के डायरेक्‍टर पंकज नारायण कहते हैं, ‘’ हम पूरे देश से भजन रत्‍न ढूंढ रहे हैं और यह अपनी तरह का पहला रीयालिटी शो है जिसमें नामी गिरामी बॉलीवुड हस्तियों का uuu yuuu समर्थन मिल रहा है। इस रिएलिटी शो का ऑडिशन 28 मई से शुरू होगा जो 9 जुलाई तक चलेगा। मुंबई, दिल्‍ली, चंडीगढ, देहरादून, गुडगांव, नोएडा, पटना, रांची, हैदराबाद आदि 24 शहरों में इसका ऑडिशन होगा। आस्‍था चैनल पर प्रसारित होने वाले भजन रत्‍न रिएलिटी शो को दर्शक 15 जुलाई से देख सकेंगे।

यह अपने आप में पहली तरह का अनूठा रियालिटी शो है जिसमें सभी धर्म के लोग गाएंगे जिसमें सूफी भी शामिल होगा। जो जीतेगा उसे ‘’भजन रत्‍न‘’ के सम्‍मान से नवाजा जाएगा। एक समय था जब लोग हरिओम शरण और अनूप जलोटा के भजनों को सुनकर अपने दिन की शुरुआत करते थे, समाचार में सुनाई पडता था कि सचिन तेंदुलकर क्रीज पर जाने से पहले हरिओम शरण की भजन सुनते थे जिससे उनकी एकाग्रता बनी रहे। लेकिन नई पीढी बदलते परिवेश में इस परंपरा से दूर सी होती जा रही थी। इसी को ध्‍यान में रखते हुए इस कांसेप्‍ट के जरिए लोगों को उनके जडों से जोडना इसका मकसद है जिससे सर्वधर्म समभाव स्‍थापित किया जा सके।
भजन सिंगर अनूप जलोटा, लोकगायक मालिनी अवस्‍थी और कथक डांसर बिरजू महराज इस शो को जज करेंगे। इसका प्रसारण आस्‍था चैनल पर 15 जुलाई से हर शुक्रवार और शनिवार को किया जाएगा। इस शो में बॉलीवुड गायक एश्‍वर्य निगम, टीवी कलाकार रिचा सोनी तथा कथक डांसर आरूषि निशंक भी दिखाई देंगे। गौरतलब है कि देश के इस पहले भजन पर आधारित रियालिटी शो को सफल बनाने के लिए बॉलीवुड के जाने-माने म्‍युजिक डायरेक्‍टर और सिंगर अपना समर्थन देने जुटेंगे।

Thursday, April 21, 2016

Naseer-Kalki starrer 'WAITING' poster released

Chandigarh, April 21th, 2016 (kulbir singh kalsi):-
'Waiting' is about the special relationship between two people who befriend each other unexpectedly in a hospital, while nursing their individual spouses in coma. It is a film about grief, but more than just dealing with it, ‘Waiting’ is also about confronting it and discovering a sliver of hope between the lines. It is a life-affirming story representative of urban India and its ethos, that is bound to strike a chord with cinema-lovers across the board.


Waiting, starring Naseeruddin Shah and Kalki Koechlin. Directed by Anu Menon and produced by Ishka Films and Drishyam Films, ‘Waiting’ had premiered at the Dubai International Film Festival (DIFF). Featuring Rajat Kapoor, Arjun Mathur, it also marks the debut of noted filmmaker Mani Ratnam’s wife, actor Suhasini Maniratnam in Hindi cinema. The film is slated to release on May 27th, 2016.

Sunday, April 10, 2016

Australian Foundation demands special courts for NRIs for speedy redress of their grievances

Also wants powers of court for NRI commission and review of all cases of NRIs wrongly declared POs

Chandigarh, April 10th, 2016 (kulbir singh kalsi):-The Australian Foundation for NRIs (AFNRI), a non-political organisation of Non-resident Indians settled in Australia, has demanded constitution of special courts for NRIs to handle cases, including those under the Rent Act, review of all cases of NRIs being declared proclaimed offenders (POs) through the process of sending summons at local addresses where they have not been residing for years, an early notification of the definition as to who constitutes an NRI and making the Punjab State Commission of NRIs more effective by giving it powers of revision of civil and criminal court.
Addressing a press conference here today, the founder member of AFNRI, Mr Gurpal Singh, a Australia based barrister and solicitor, said despite best intentions of the Punjab government  in creating special mechanisms for redress of grievances of NRIs, the expatriates continue to face serious problems in finding resolution of issues related to property and other disputes back home in a time bound manner.
Research undertaken by AFNRI into the concerns of the NRIs from Punjab has revealed that it still takes between one year to five-plus years for a NRI to get his property vacated through court intervention despite the fact that Section 13 B of the Rent Act was incorporated for the specific objective of providing immediate vacation of properties owned by the NRIs. Declaring NRI suspects in cases as proclaimed offenders, without first confirming whether they have been residing at the place in Punjab where summons were issued, is another major irritant for them.
Mr Gurpal Singh said another issue troubling the NRIs is the continuing confusion over the definition of NRIs. The issue pending in the Honourable Supreme court in the matter of 2011 revolves around the question as to whether a person holding passport of other country, rather than India, would be covered in the scope of NRI as defined in Rent Act?. The government should notify an explanation to the definition of NRI, rather than waiting for the SC decision.  


He said the creation of the Punjab State Commission of NRIs was a well-intended move by the state government, but the commission has no power except to initiate an enquiry into a particular matter. As a consequence the commission has been reduced to a toothless body at a very high expense to the government.

Noting that Punjabis settled in Australia in particular, and other countries including Canada, USA, UK, Singapore, Malaysia, etc., find the assistance provided by the Indian consulates and embassies not fully effective in the light of some important matters falling in domain of state government and state laws, the foundation said it added to the agony and delay in the matters of concern and repeated visits to the consulates. It demanded the Punjab government appoint a nodal office in all these countries to effectively address the issues of NRIs settled in these countries.

The foundation appealed to the chief minister and deputy chief minister to visit Australia for better and open engagement with the NRIs and explore the effective collaboration between Australian states and Punjab.

Saturday, April 9, 2016

“राम धुन लागी श्याम धुन लागी”

भजनों का एलबम भक्ति-भावपूर्ण श्री राम जी और श्री कृष्ण जी के जीवन से घटित वाक्यों को लेकर राम जी के आदर्शवादी व्यक्तित्व, धर्म एवं न्याय परायणता, सदाचार हेतु और कृष्ण जी के बिना स्वार्थ के काम से, सम्मिलित भजनो का संग्रह है, जो प्यार के धागे में पिरोकर आपके सामने प्रस्तुत है |



इन भजनों को सुनने के बाद आनंद विभोर हो जाना स्वाभाविक हो जायेगा राम धुन लागी श्याम धुन लागीसीडी के बाजार में आते ही आप अवश्य आनंद उठायें |

Monday, April 25, 2016

टीवी पर लौटा धार्मिक सीरियलों का दौर

-प्रेमबाबू शर्मा

एक दौर जब टीवी पर सास भी कभी बहू थी,कहानी घर घर की, जैसे शो की लोकप्रियता के आगे कोई भी शो नही टिक पा रहा था,लेकिन बदलते समय के साथ टीवी ने भी करबट और अब एक बार फिर से धर्मिक सीरियलों का दौर रहा है। दूरदर्शन पर सबसे पहले रामायण, श्रीकृष्णा और फिर महाभारत ने रंग जमाया। साल 2011 में एकबार फिर रामायण का जबरदस्त दौर चला और इस बार चैबीस घंटे का माध्यम होने के कारण इसका प्रभाव दूरदर्शन के जमाने से भी ज्यादा मजबूत रहा। दरअसल धर्म के जरिए टीवी रह रहकर समाज में अपने ताकतवर होने का अहसास कराता रहा है। अब एक बार फिर से अचानक बहुत सारे धार्मिक सीरियल फिर से टीवी पर धूम मचाने आ गए हैं। वजह यही है कि इसकी जडंे सिनेमा के मुकाबले ज्यादा मजबूत 

‘‘सिया के राम’ सीरियल स्टार प्लस चैनल पर खूब देखा जा रहा है। इसमें सीता के जीवन की कहानी है। सोनी टीवी पर ‘‘संकट मोचन महाबली हनुमान‘‘ और ‘‘सूर्य पुत्र कर्ण‘‘ बैक टू बैक टेलीकास्ट होने का बावजूद दिन ब दिन अपनी दर्शक संख्या बढ़ा रहे हैं। एंड टीवी चैनल पर ‘‘जय संतोषी मां‘‘ की टीआरपी लगातार परवान चढ़ रही है। स्टार गोल्ड पर पुरानी वाली महाभारत की महिमा का देश के ग्रामीण इलाकों में अब भी कोई तोड़ नहीं है। एपिक चैनल पर रामायण ने एक खास दर्शक वर्ग बना लिया है।
  डिस्कवरी किड्स पर लिटिल कृष्णा का एनिमेशन अवतार बच्चों में जबरदस्त धूम मचा रहा है। इसी चैनल पर किसना भी बच्चों को आकर्षित कर रहा है। तो, कार्टुन नेटवर्क पर रिटर्न्स ऑफ हनुमान जब बच्चे देखते हैं, तो उठने का नाम ही नहीं लेते। बच्चों के एक और चैनल पोगो पर दिख रहे छोटा भीम ने तो घर-घर में जगह बना ली है।
माना जा सकता है कि परंपरा और संस्कृति की कहानियों को अगर ताजा अंदाज में कहा जाए, तो किसी भी काल में दर्शक वर्ग बन ही जाता है। बात सही भी है कि हमारी जो परंपरा हजारों साल से चली आ रही है, दर्शकों पर उसका असर तो होता ही है। हमारे टीवी के परदे पर यह उसी असर का परिदृश्य है, जिसमें सीता, राम, हनुमान, संतोषी मां, कर्ण, कृष्ण और भीम फिर से बहुत चाव के साथ देखे जा रहे हैं। 
यह हमारे टेलीविजन का नया चेहरा है। जो सास बहू और रिश्तों के रंग से आजाद होकर एक बार फिर से धर्म के रंग में रंगता दिख रहा है। टीवी के धर्म के रंग में रंगने का यह तीसरा दौर है। सबसे पहले कोई 25 साल पहले रामायण,श्रीकृष्णा ने धूम मचाई थी। उसके तत्काल बाद टीवी पर महाभारत आई। वह पहला दौर था। दूसरा दौर आया सन 2009 के आखिर में शनिदेव की माहिमा,फिर 2011 में जब लाइफ ओके चैनल पर भगवान शिव पर आधारित ‘‘देवों के देव..महादेव‘‘ की शुरुआत हुई। जबरदस्त टीआरपी मिलने से लाइफ ओके के हौसले बुलंद हुए, तो तत्काल बाद लाइफ ओके पर कथा महादेव पुत्र बाल गणोश की भी आ गई थी।अभी कुछ दिन पहले ही रतन राजपूत और ग्रेसी सिंह मुंबई के एक मंदिर में संतोषी माता की महाआरती करती दिखीं। दोनों वहां माता का आशीर्वाद लेने आई थीं। रतन ने कहा -‘‘मैं अपने हाल ही मैं प्रसारित हुए शो को लेकर कुछ नर्वस हूं। धर्म और भगवान में मेरा विास है। इसलिए उम्मीद है कि हमारा यह सीरियल अच्छा चलेगा।‘‘ सन् 2001 की सुपरहिट फिल्म ‘‘लगान‘‘ में गौरी के किरदार से अचानक बहुत विख्यात हुई और बाद में पंद्रह साल तक लुप्त हो गई। ग्रेसी सिंह भी ‘‘संतोषी मां‘‘ में नजर आ रही हैं। ग्रेसी इसमें संतोषी माता के किरदार में हैं। रतन राजपूत भी अहम रोल में हैं। 
स्टार प्लस पर प्रसारित होने वाले सीरियल ‘‘सिया के राम’ के सेट की खूब र्चचा है। रावण के साम्राज्य के बाहरी हिस्सों की शूटिंग के लिए जल्द ही इस प्रोडक्शन की टीम श्रीलंका जाएगी। ट्रैंगल प्रोडक्शन्स की तरफ से बताया गया कि सीरियल की शूटिंग फिलहाल भारत में की जा रही है। कुछ हिस्सों की शूटिंग भुज में की गई है और जल्द ही इस टीम के लोग भूटान जाएंगे। इस सीरियल में जब रावण का घर दिखाया जाएगा, तो उसे प्रामाणिक लुक देने के लिए एक टीम श्रीलंका में शूटिंग करेगी। इस कथा को पहली बार मिथिला कुमारी सीता के दृष्टिकोण से दिखाया जा रहा है। इसमें मदिराक्षी सीता की भूमिका में है। लाइफ ओके पर देवों के देव महादेव लगातार तीन साल तक अपना रंग जमाए रहा। उस दौरान महादेव का किरदार निभाने वाले कलाकार मोहित रैना के दर्शन करने लोग उनके घर के बाहर जमा होते थे वे जहां भी जाते, लोग उनके पांव छूने लग जाते थे।टीवी पर धर्म के इस तीसरे दौर के बारे में समाजशास्त्री डॉ. विजय शर्मा कहते हैं कि ‘‘बहुत सालों से लोग टीवी पर सास बहू के सीरियल देखकर ऊब गए थे। अब एक बार फिर से हमारी संस्कृति की पारंपरिक कथाएं नए स्वरूप में आ रही हैं, तो लोग तो देखेंगे ही। यही कारण है कि गीता, रामायण और महाभारत के किरदार अलग-अलग कहानियों के साथ फिर से पूरी धमक के साथ लौट आए हैं।‘‘ सफलता के सुर जब सिर चढ़कर बोलने लगते हैं, तो सुनने वाले भी मिल ही जाते हैं। यही कारण है कि सीता, राम, हनुमान, कर्ण और कृष्ण, सारे के सारे टीआरपी के मैदान में बाजी मारने को बेताब हैं। सही मायने में कहा जाए तो दुनिया में किसी भी देश के मुकाबले भारत में टीवी बहुत देर से आया है। हमारे देश में टीवी का वास्तविक विकास तो सिर्फ बीस-पच्चीस साल ही पुराना है। यह अभी-अभी जवान हुआ है। टेलीविजन के असली विकास की शुरुआत को अभी लगभग ढाई दशक का समय भी नहीं बीता लेकिन टीवी आज सबसे ज्यादा और गहरे असरकारक माध्यम के रूप में हमारे सामने है। आज किसी को भी अपनी बात कहनी हो, तो टीवी सबसे व्यापक, सबसे तेज और सबसे असरकारक माध्यम है। तब, जब हमारे देश में सिर्फ दूरदर्शन ही हुआ करता था, तब से ही रामायण और महाभारत के दौर में इसकी भनक मिल गई थी। इसी कारण धार्मिक सीरियल रह रहकर मजबूती के साथ सामने आते रहे हैं।पच्चीस साल पहले जब दूरदर्शन पर रामायण सीरियल आया था तो लोग उस समय टीवी के सामने दिया जलाकर, फूल चढ़ाने के साथ जूते-चप्पल उतारकर सीरियल देखते थे और सीरियल की समाप्ति पर आरती के बाद प्रसाद भी बांटा करते थे। बी.आर. चोपड़ा के महाभारत के कृष्ण नीतीश भारद्वाज को तो गांवों में लोग भगवान का अवतार ही मानते थे। टीवी धारावाहिक निर्माता धीरज कुमार की बात बिल्कुल सही लगती है कि ‘‘आज के पेरेंट्स चाहते हैं कि उनके बच्चे धार्मिक धारावाहिक देखें और उनसे संस्कार लेने के साथ अच्छी बातें भी सीखें। इसलिए धार्मिक धारावाहिक कुछ-कुछ अंतराल के बाद अलग-अलग रूप में अवतरित होते रहे हैं।‘‘ सोनी, कलर्स, जी, स्टार प्लस और ऐसे ही मुख्यधारा के चैनलों की तो छोड़िये, काटरून नेटवर्क, पोगो, सोनिक, डिज्नी, डिस्कवरी किड्स, जैसे चैनल भी इसी धारा में बह रहे हैं, क्योंकि बच्चों को तो संस्कार और परंपरा की सीख वहीं से मिलेगी। जहां तक आम दर्शक की बात है तो वह आधुनिकता की दौड़ में सहभागी होने के साथ-साथ अपनी जड़ों से जुड़े रहना ज्यादा पसंद करता है। यही देखकर टीवी के परदे का ताजा परिदृश्य देखें, तो सच्चाई यही है कि ज्यादातर चैनल धर्म के रंग की ऐसी कहानियां रच रहे हैं जिनसे समाज को प्रेरणा मिले और बच्चे, बड़े और बूढ़े हर किसी के जीवन में कुछ न कुछ बदलाव आए। टीवी धारावाहिकों की फैक्टरी के नाम से मशहूर एकता कपूर की इस बात में दम है कि व्यक्ति चाहे कितना भी आधुनिक क्यों न हो जाए, वह उस आधुनिकता को भी धर्म के अनुसार ही जीता है। क्योंकि संस्कार हमारे जीवन की जड़ें हैं और आपसी लड़ाई झगड़े हमारी दिनर्चया का हिस्सा। ये सारी चीजें साथ-साथ चलती हैं। यही वजह है कि टीवी के परदे पर अचानक बहुत रंग भर गई जिंदगी की कहानियों के बीच धर्म ने भी अपनी धमक फिर से बना ली है

‘चक्रवर्ती सम्राट अशोक’ में नए अशोक

-प्रेमबाबू शर्मा

कलर्स पर प्रसारित होने वाले धारावाहिक ‘चक्रवर्ती सम्राट अशोक’ अब कई सालों का लीप ले रहा है और खास बात यह है कि इसमें लोगों के चहीते अशोक यानी कि सिद्धार्थ निगम की जगह मोहित रैना दिखने वाले हैं।
पिछले कई दिनों से यह चर्चा चल रही थी कि सालों के लीप के बाद अशोक का किरदार कौन करेगा। अब खुद चैनल ने मोहित के नाम की आधिकारिक घोषणा कर दी है।

मोहित इससे पहले देवों के देव महादेव में काम कर चुके हैं और इसमें मोहित को काफी पसंद किया गया था। चक्रवर्ती सम्राट अशोक में बदलाव को लेकर कई दिनों से बातें हो रही हैं।

खुद चैनल की ओर से जारी किए गए एक टीजर में दिखाया जा चुका है कि अशोक अब बड़े हो चुके हैं। हालांकि उसमें बदले गए अशोक का चेहरा नहीं गुप्त रखा गया था।

24 शहरों में होगा "भजन रत्‍न’’ रिएलिटी शो का ऑडिशन

अनूप जलोटा, मालिनी अवस्‍थी और पंडित बिरजू महराज करेंगे इस शो को जज

-प्रेमबाबू शर्मा


नई दिल्‍ली। एक बार फिर देश में रिएलिटी शो की धूम मची है। डांस इंडिया डांस, यू थिंक यू कैन डांस, के बीच एक नये रिएलिटी शो का आगाज होने जा रहा हैा लेकिन यह रिएलिटी शो बिलकुल अनूठा है। जो भजन पर बेस्‍ड हैा अथ इंटरटेनमेंट के बैनर तले शुरू होने जा रहे इस रिएलिटी शो क नाम रखा गया है भजन रत्‍न । इस रिएलिटी शो के डायरेक्‍टर पंकज नारायण कहते हैं, ‘’ हम पूरे देश से भजन रत्‍न ढूंढ रहे हैं और यह अपनी तरह का पहला रीयालिटी शो है जिसमें नामी गिरामी बॉलीवुड हस्तियों का uuu yuuu समर्थन मिल रहा है। इस रिएलिटी शो का ऑडिशन 28 मई से शुरू होगा जो 9 जुलाई तक चलेगा। मुंबई, दिल्‍ली, चंडीगढ, देहरादून, गुडगांव, नोएडा, पटना, रांची, हैदराबाद आदि 24 शहरों में इसका ऑडिशन होगा। आस्‍था चैनल पर प्रसारित होने वाले भजन रत्‍न रिएलिटी शो को दर्शक 15 जुलाई से देख सकेंगे।

यह अपने आप में पहली तरह का अनूठा रियालिटी शो है जिसमें सभी धर्म के लोग गाएंगे जिसमें सूफी भी शामिल होगा। जो जीतेगा उसे ‘’भजन रत्‍न‘’ के सम्‍मान से नवाजा जाएगा। एक समय था जब लोग हरिओम शरण और अनूप जलोटा के भजनों को सुनकर अपने दिन की शुरुआत करते थे, समाचार में सुनाई पडता था कि सचिन तेंदुलकर क्रीज पर जाने से पहले हरिओम शरण की भजन सुनते थे जिससे उनकी एकाग्रता बनी रहे। लेकिन नई पीढी बदलते परिवेश में इस परंपरा से दूर सी होती जा रही थी। इसी को ध्‍यान में रखते हुए इस कांसेप्‍ट के जरिए लोगों को उनके जडों से जोडना इसका मकसद है जिससे सर्वधर्म समभाव स्‍थापित किया जा सके।
भजन सिंगर अनूप जलोटा, लोकगायक मालिनी अवस्‍थी और कथक डांसर बिरजू महराज इस शो को जज करेंगे। इसका प्रसारण आस्‍था चैनल पर 15 जुलाई से हर शुक्रवार और शनिवार को किया जाएगा। इस शो में बॉलीवुड गायक एश्‍वर्य निगम, टीवी कलाकार रिचा सोनी तथा कथक डांसर आरूषि निशंक भी दिखाई देंगे। गौरतलब है कि देश के इस पहले भजन पर आधारित रियालिटी शो को सफल बनाने के लिए बॉलीवुड के जाने-माने म्‍युजिक डायरेक्‍टर और सिंगर अपना समर्थन देने जुटेंगे।

Thursday, April 21, 2016

Naseer-Kalki starrer 'WAITING' poster released

Chandigarh, April 21th, 2016 (kulbir singh kalsi):-
'Waiting' is about the special relationship between two people who befriend each other unexpectedly in a hospital, while nursing their individual spouses in coma. It is a film about grief, but more than just dealing with it, ‘Waiting’ is also about confronting it and discovering a sliver of hope between the lines. It is a life-affirming story representative of urban India and its ethos, that is bound to strike a chord with cinema-lovers across the board.


Waiting, starring Naseeruddin Shah and Kalki Koechlin. Directed by Anu Menon and produced by Ishka Films and Drishyam Films, ‘Waiting’ had premiered at the Dubai International Film Festival (DIFF). Featuring Rajat Kapoor, Arjun Mathur, it also marks the debut of noted filmmaker Mani Ratnam’s wife, actor Suhasini Maniratnam in Hindi cinema. The film is slated to release on May 27th, 2016.

Sunday, April 10, 2016

Australian Foundation demands special courts for NRIs for speedy redress of their grievances

Also wants powers of court for NRI commission and review of all cases of NRIs wrongly declared POs

Chandigarh, April 10th, 2016 (kulbir singh kalsi):-The Australian Foundation for NRIs (AFNRI), a non-political organisation of Non-resident Indians settled in Australia, has demanded constitution of special courts for NRIs to handle cases, including those under the Rent Act, review of all cases of NRIs being declared proclaimed offenders (POs) through the process of sending summons at local addresses where they have not been residing for years, an early notification of the definition as to who constitutes an NRI and making the Punjab State Commission of NRIs more effective by giving it powers of revision of civil and criminal court.
Addressing a press conference here today, the founder member of AFNRI, Mr Gurpal Singh, a Australia based barrister and solicitor, said despite best intentions of the Punjab government  in creating special mechanisms for redress of grievances of NRIs, the expatriates continue to face serious problems in finding resolution of issues related to property and other disputes back home in a time bound manner.
Research undertaken by AFNRI into the concerns of the NRIs from Punjab has revealed that it still takes between one year to five-plus years for a NRI to get his property vacated through court intervention despite the fact that Section 13 B of the Rent Act was incorporated for the specific objective of providing immediate vacation of properties owned by the NRIs. Declaring NRI suspects in cases as proclaimed offenders, without first confirming whether they have been residing at the place in Punjab where summons were issued, is another major irritant for them.
Mr Gurpal Singh said another issue troubling the NRIs is the continuing confusion over the definition of NRIs. The issue pending in the Honourable Supreme court in the matter of 2011 revolves around the question as to whether a person holding passport of other country, rather than India, would be covered in the scope of NRI as defined in Rent Act?. The government should notify an explanation to the definition of NRI, rather than waiting for the SC decision.  


He said the creation of the Punjab State Commission of NRIs was a well-intended move by the state government, but the commission has no power except to initiate an enquiry into a particular matter. As a consequence the commission has been reduced to a toothless body at a very high expense to the government.

Noting that Punjabis settled in Australia in particular, and other countries including Canada, USA, UK, Singapore, Malaysia, etc., find the assistance provided by the Indian consulates and embassies not fully effective in the light of some important matters falling in domain of state government and state laws, the foundation said it added to the agony and delay in the matters of concern and repeated visits to the consulates. It demanded the Punjab government appoint a nodal office in all these countries to effectively address the issues of NRIs settled in these countries.

The foundation appealed to the chief minister and deputy chief minister to visit Australia for better and open engagement with the NRIs and explore the effective collaboration between Australian states and Punjab.

Saturday, April 9, 2016

“राम धुन लागी श्याम धुन लागी”

भजनों का एलबम भक्ति-भावपूर्ण श्री राम जी और श्री कृष्ण जी के जीवन से घटित वाक्यों को लेकर राम जी के आदर्शवादी व्यक्तित्व, धर्म एवं न्याय परायणता, सदाचार हेतु और कृष्ण जी के बिना स्वार्थ के काम से, सम्मिलित भजनो का संग्रह है, जो प्यार के धागे में पिरोकर आपके सामने प्रस्तुत है |



इन भजनों को सुनने के बाद आनंद विभोर हो जाना स्वाभाविक हो जायेगा राम धुन लागी श्याम धुन लागीसीडी के बाजार में आते ही आप अवश्य आनंद उठायें |