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Wednesday, July 31, 2013

जेल में भुगत रहे है किए पाप की सजा

* दुष्कर्म मामलों में कारागार में बंद है 190 आरोपी
* कोर्ट ने 35 दुराचारियों की सजा कर दी है मुकरर्र


मुजफ्फरनगर।
दिल्ली गैंगरेप की शर्मिदंगी के बाद देश की "आधी आबादी" को क्या कानून सुरक्षा कवच दे पाएगा, यह सवाल सभी की जुबां पर हैं। महिला उत्पीडऩ की हकीकत को खंगाले, तो सच्चाई बेहद कड़वी है। मुजफ्फरनगर की जेल में बंद दुराचारियों की संख्या कुछ कम नहीं हैं। दुष्कर्म के मामलों में 190 बंदी जेल की चारदीवारी में कैद हैं। 
जिले में हर माह दुराचार की दो-तीन वारदाते हो रही हैं। शुक्रवार को दरिंदो ने फुगाना के जोगियाखेड़ी में किशोरी से पंचायतघर में ही गैंगरेप किया। आरोपी अभी पुलिस के हाथ भी नहीं लगे हैं। बसेड़ा के सामुहिक दुराचार का मामला हो, या चर्चित चरथावल का इमराना प्रकरण और हाईवे पर दिल्ली की युवतियों से गैंगरेप, जिले में ऐसी वारदातें घटती रही हैं। सूबे में महिला उत्पीडऩ के अधिकांश मामलों में जिले की गिनती हैं। पूरे देश में दिल्ली गैंगरेप की भेंट चढ़ गई पैरा मैडिकल छात्रा पर हो-हल्ला मचा हुआ है। 
सोचनीय यह है कि यहां न जाने कितनी बेबस जिंदगियां दुराचारियों की हैवानियत का शिकार हो रही हैं। जेल की सलाखों के पीछे 35 बलात्कारी सजा भुगत रहे हैं। इमराना प्रकरण में दस साल के कारावास काट रहे ससुर अली मोहम्मद भी है। १५५ बंदी विचाराधीन हैं। जेल में बंद कुल 2365 में से 190 कैदियों का दुराचार की वारदातों में बंदी होना सच्चाई बयां कर रहा है। छेड़छाड़ की घटनाएं आम हैं, जिसमें चाकूबाजी, फायरिंग और संघर्ष आए दिन की बात हैं। ऐसे में महिलाओं को कैसे सुरक्षा मिलेगी, यह गंभीर मुद्दा है।
*


तीन साल में दुष्कर्म के 65 मामले
पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक अभी भी समाज में महिलाओं से जुड़ी वारदातों में कोई कमी नहीं आई हैं। बीते तीन साल में दुष्कर्म के 65 मामलें दर्ज किए गए हैं। दहेज हत्या में भी जिले में वर्ष 2010 में 24, 2011 में 26 और 2012 में 16 बेटियों की मौत हो चुकी हैं। 

वो अफसर जिन्होंने चुकाई ईमानदारी की कीमत

वो अफसर जिन्होंने चुकाई ईमानदारी की कीमत

Tuesday, July 2, 2013

ममा‘ज ब्वॉय हैं आमिर अली!

-----आमिर अली हैं मां के आज्ञाकारी बेटे ! 
जिसने भी ‘‘ममा‘ज ब्वॉय‘‘ शब्द की रचना की होगी, वह निश्चित रूप से आमिर अली जैसे किसी व्यक्ति से ही प्रेरित हुआ होगा। हालांकि, हम इस श्रेणी में शामिल होने वाले पुरूषों की निंदा करते हैं, लेकिन आमिर को इस वर्ग में जरूर शामिल किया जाना चाहिये। 
सहारा वन के धारावाहिक ‘झिलमिल सितारों का आंगन होगा‘ में सौम्य की भूमिका निभा रहे अभिनेता आमिर अली की जिंदगी की एक घटना इससे जुड़ी हुई है। दरअसल, जीवन में एक दुर्भाग्यपूर्ण और जानलेवा दुर्घटना का शिकार होने के बाद आमिर ने अपनी मां से वादा किया था कि वे कभी भी मोटरसाइकिल नहीं चलायेंगे। 
लेकिन हाल ही में ‘झिलमिल सितारों का आंगन होगा‘ की शूटिंग के दौरान वह उस समय एक दुविधाजनक स्थिति में फंस गये, जब उन्हें शो के एक दृश्य के लिये बाइक चलाने की शूटिंग करनी थी। यदि इस धारावाहिक से जुड़े सूत्रों की बातों पर विश्वास किया जाये, तो आमिर को अपनी ऑनस्क्रीन पत्नी अंगना के साथ बाइक की सवारी करनी थी। आमिर ने जब इस दृश्य के बारे में सुना, तो शुरूआत में वह बेहद उत्साहित हुये, लेकिन मां से किये गये वादे की याद आते ही उनका यह उत्साह ठंडा पड़ गया। आमिर ने निर्माता से अनुरोध किया कि इस सीन को संशोधित कर बाइक सीक्वेंस को हटा दिया जाये। सूत्रों ने बताया कि काफी समझाने के बाद निर्माता बाइक सीन को कार के साथ संशोधित करने के लिये राजी हो गये। 
हालांकि, दर्शक निश्चित रूप से आमिर को बाइक चलाते नहीं देख पायेंगे, लेकिन हम मां से किये गये वादे को निभाने के आमिर के फैसले की सराहना करते हैं।

Monday, October 29, 2012

मौत की रफ्तार ने निगली पांच जिंदगी


* नो एंट्री में घुसे असंतुलित ट्रक का तांड़व

अमित सैनी, मुजफ्फरनगर।
मौत की रफ्तार ने पांच बेकुसूरों की जिंदगी निगल ली। जानसठ रेलवे क्रोसिंग पुल पर अंधी स्पीड ने पहले एक साइकिल सवार को रौंदा और फिर रिक्शा सवार चार लोगों को मौत की नींद सुला दिया। इसमें से रिक्शा पोलर तो उछलकर पुल से करीब ३० फुट नीचे जा गिरा। ट्रक का कहर यहीं भी नहीं रुका। करीब ड़ेढ किमी तक रिक्शा को घसीटते हुए अलमासपुर चौक तक ले गया। पुलिस के रोकने पर चालक ने ट्रक को एक दुकान में घुसा दिया। लापरवाही के आरोप में दरोगा समेत चार पुलिसकर्मियों को लाइन हाजिर कर दिया गया है।
मौत का यह तांड़व सोमवार रात करीब सवा आठ बजे शहर के जानसठ रेलवे क्रोसिंग पुल पर हुआ। नशे में धुत्त चालक अंधी रफ्तार से नई मंडी के अलमासपुर की ओर दौड़ा जा रहा था। पुल पर चढ़ते ही ट्रक ने पहले साइकिल सवार को कुचल दिया। पीछे से आ रहे लोगों ने शोर मचाया तो चालक ने ट्रक की ओर स्पीड बढ़ा दी। इसके बाद ट्रक ने रिक्शा को टक्कर मारकर उड़ा दिया। रिक्शा चालक तो उछलकर पुल से करीब ३० फुट नीचे जा गिरा, जबकि रिक् शा सवार महिला, पुरुष और एक बच्चे को ट्रक कुचलते हुए आगे बढ़ गया। चकनाचूर हुई रिक्शा का हैडिंल ट्रक के निचले हिस्से में फंस गया। ट्रक चिंगारी के साथ उसी स्पीड से सामने आने वालों को क्षतिग्रस्त करते हुए अलमासपुर चौक तक जा पहुंचा। पुलिस कर्मियों ने उसे रोकने का प्रयास किया तो चालक ने ट्रक को पवन साइकिल वक्र्स की दुकान में घुसा दिया। पुलिस ने नशे में धुत्त चालक संजय पुत्र रामपाल निवासी चौधरान पट्टी, नकुड़ को गिरफ्तार कर लिया। आरोपी चालक के खिलाफ गैर इरादतन हत्या की धारा में रिपोर्ट दर्ज करने की तैयारी कर रही है। समाचार लिखे जाने तक मृतकों की शिनाख्त नहीं हो सकी थी।
*
मौत के कहर का कौन है जिम्मेदार
* ट्रक के तांड़व से मची जानसठ रोड पर भगदड़
* तीन कारों में सवार परिवार भी बचे बाल-बाल
* नो एंट्री होते हुए आखिर कैसे घुसा शहर में ट्रक
शहर में हादसों को टालने के लिए सुबह सात बजे से रात्रि नौ बजे तक बड़े वाहनों, खासतौर से ट्रकों के आवागमन पर पूरी तरह रोक है। फिर भी पुलिस सांठ-गांठ से ट्रक अंदर दाखिल ही हो जाते हैं। मौत का कहर बरपाने वाला यह ट्रक भी दिनभर मीनाक्षी चौक स्थित कांग्रेस नेता की ट्रांसपोर्ट पर खड़ा रहा। शाम के समय से ही ट्रक चालक संजय चौधरी ने शराब ड़कारनी शुरू कर दी थी। आठ बजे करीब संजय नशे में धुत्त होकर ट्रक लेकर भोपा रोड जाने के लिए चला। मीनाक्षी चौक पर मौजूद पुलिसकर्मियों ने ट्रक को रोकने तक की जहमत नहीं उठाई। शायद यदि ट्रक को रोक लिया जाता तो इस भयानक हादसे को रोका जा सकता था। ऐसा पहली बार नहीं हुआ है, जब नो एंट्री में घुसे किसी ट्रक ने मौत का कहर बरपाया हो। पहले भी ऐसी अनेक घटनाऐं हो चुकी हैं, बावजूद इसके प्रशासन उससे कोई सबक नहीं ले रहा है। सोमवार रात हुए दर्दनाक हादसे ने पुलिस की घोर लापरवाही उजागर की है। अधिकारियों ने भी आनन-फानन में गलती पर पर्दा डालने के लिए मंडी थाने के दरोगा सीपी कठेरिया और चार पुलिसकर्मियों को लाइन हाजिर तो कर दिया, लेकिन सवाल यही है कि आखिर कब तक नो एंट्री का मखौल उड़ता रहेगा और बेकुसूर अपनी जिंदगी से हाथ धोते रहेगें।
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मौत का मंजर देखकर सहम गए लोग
मुजफ्फरनगर। खून से लथपथ इधर-उधर पड़ी पांच लाशें, मांस के लौथड़े और बहता खून। यह खौफनाक मंजर जिसने भी देखा, वह सहम गया। सैकड़ों लोगों का जमावड़ा था और हर किसी का गुस्सा उबाल पर था। मौत बने ट्रक के सामने जो भी आया उसकी सांसे अटककर रह गई। क्योंकि ट्रक में फंसी रिक्शा सड़क से घिसड़ते हुए चिंगारी निकाल रही थी। कुदरत का करम रहा कि कोई दूसरा वाहन उसके सामने नहीं आया। अन्यथा हादसा ओर भी बड़ा हो सकता था।
मौत के इस कहर के एक नहीं अनेक प्रत्यक्षदर्शी गवाह हैं। साइकिल सवार को कुचलकर भाग रहे ट्रक चालक को पकडऩे के प्रयास भी हुए, लेकिन रिक् शा को रौंदकर जिस तरह ट्रक भागा कोई उसका पीछा करने की हिम्मत नहीं जुटा सका। धर्मवीर बालियान भी उनमें से एक थे। यह खौफनाक मंजर देखकर वो भी एक बारगी हिल गए। बाद में उन्होंने खुद को संभालते हुए पुलिस को सूचना दी। ऐसा ही भरतिया कॉलोनी के विजय के साथ भी हुआ। खून से लथपथ पांच लाशें देखकर उनका सिर चकरा गया, क्योंकि लाशों का स्वरूप इतना बिगड़ चुका था कि उनके भेजे और मांस के लोथड़े इधर-उधर बिखरे पड़े थे। कुल मिलाकर जिसने भी यह मंजर देखा उसके होश उड़ गए। उन लोगों की तो सांसे ही अटक गई थी, जो मौत की रफ्तार से भाग रहे ट्रक के सामने आने से बाल-बाल बचे।
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हादसों को दावत देने वाला है रेलवे क्रोसिंग पुल
मुजफ्फरनगर। आखिर जिस अनहोनी की आशंका थी, वो सोमवार को सही साबित हुई। पुल के निर्माण से ही यह सवाल उठ रहा था कि बिना फुटपाथ का यह पुल हादसों को दावत दे रहा है। ट्रक के नीचे आकर पांचों लोग जहां मारे गए हैं, वह पुल का एक किनारा है। रेलवे विभाग ने बरसों से खुले नीचे के रास्ते को दीवार कर पूरी तरह बंद किया हुआ है। जिस कारण रिक्शा चालकों और छोटे वाहनों को मजबूरन पुल के ऊपर से गुजरना पड़ता है। यहां पर पथ-प्रकाश की भी समुचित इंतजाम नहीं है।
भोपा पुल के मुकाबले जानसठ रेलवे क्रोसिग पर बनाए गए पुल के अस्तित्व को लेकर करीब एक बरस से सवाल उठ रहे हैं। क्योंकि पुल का आकार और बनाने का ढग़ जिस तरह का है, वो वाकई दुर्घटनाओं को आमंत्रण देने वाला है। पैदल चलने वालों के लिए फुटपाथ तक नहीं बनाया गया है। उल्टा विरोध के बावजूद रेलवे विभाग ने बरसों से नीचे बने रेलवे क्रोसिंग के रास्ते को दीवार बनाकर बंद कर दिया है। ऐसे में तमाम लोगों को पुल का ही सहारा है। सोमवार रात ट्रक ने जहां पर पांच लोगों को कुचला है, वो पुल का एक किनारा है। इस पुल पर पथ प्रकाश का भी कोई इंतजाम नहीं है। 
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ये है मरने वाले
मुजफ्फरनगर। हादसे में मारे गए पांचों लोगों की देर रात पहचान हो गई। मरने वालों में अमित विहार का मुकेश उसकी पत्नी कविता और आठ साल की बेटी निशा शामिल हैं। लक्ष्मण विहार निवासी रिटायर्ड दरोगा राजेंद्र शर्मा का बेटा पंकज भी काल का ग्रास बना है। पांचवा मृतक दुधिया बबलू पुत्र रहीस निवासी निराना बताया गया है। मृतक विकलांग बबलू के चार बच्चें बताए गए हैं। अभी यह नहीं साफ हो सका है कि रिक्शा कौन चला रहा था। हालांकि मौत की खबर मिलते ही उनके परिजन रोते-बिलखते जिला अस्पताल में पहुंच गए।
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मौत पर उबाल, लोगों ने किया हंगामा
* अलमासपुर चौक पर भीड़ ने लगाया जाम
* मंडी थाने के दरोगा कठेरिया ने की अभद्रता
मुजफ्फरनगर। पांच लोगों की मौत और ट्रक की बेलगाम रफ्तार को लेकर लोगों का गुस्सा उबाल पर था। यही वजह थी कि अलमासपुर चौक पर एकत्र हुए लोगों ने नो एंट्री में घुसे ट्रक को लेकर पुलिस के खिलाफ हंगामा भी किया। आरोप है कि इस दौरान मंडी थाने में दरोगा सीपी कठेरिया ने कई लोगों के साथ अभद्रता भी की। 
ट्रक के कुचलने से हुई पांच लोगों की दर्दनाक मौत से हर कोई गमगीन होने के साथ इस बात को लेकर गुस्सा था कि नो एंट्री होते हुए पुलिस की सांठ-गांठ से ट्रक कैसे शहर के अंदर घुस आया। ट्रक असंतुलित होकर पवन पाल साइकिल वक्र्स की दुकान में जा घुसा। गनीमत रही कि उस वक्त दुकान बंद थी। लेकिन लोग काफी तादाद में सड़क किनारे खड़े थे। यही वजह थी कि लोगों ने हादसे के विरोध में जाम लगाकर विरोध प्रदर्शन भी किया। दरोगा कठेरिया और साथी पुलिसकर्मियों बदमीजी किए जाने से लोग भड़क गए थे। लेकिन बाद में समझा-बुझाकर शांत किया। 

Veena searching streets of Mumbai to find the character face for her movie


Mumbai, kulbir kalsi :
Bombshell of Bollywood Veena Malik is not in a mood to take any chance for her upcoming movie that’s why she is not leaving any stone un turned. Now days she is busy on the streets of Mumbai because of searching a perfect character for her upcoming movie “The city that Never Sleeps”. She was seen wearing a Burkha while travelling in the streets of Mumbai because she wants to avoid the crowds mobbing her. She is diverging from his serious genre for this movie and trying to given a perfect character face.
Veena Malik said, “Its big movie for me and I don’t want to take any chance so I have decided I personally walk around the streets of Mumbai and search the perfect face which will suit. Here everyone is a actor but we need to find out hidden inside actor”.

Nowadays bollywood actors like Amir khan ,Salman khan Sharukh khan Amitabh Bachan have always managed to get into the character of a the person that the role they perform that is why they are the best and I also want to be the best.

Veena had signed new film “The City that Never Sleeps” which is going to break 20 Guinness book of world record. The movies produced by Satish Reddy and Directed by Haroon Rashid. The Film brings more international flavour for the audience that you never seen before. You will see an amalgamation of many actor and actress from different countries U.K, U.S.A, Pakistan, Ukraine and Russia. The Bollywood stars also feature in the movie along with four music directors and twenty supporting directors to complete the film within seven days to first copy out.

Sunday, October 28, 2012

हम बॉयोटैक फसलें चाहते हैं


- टीईसी द्वारा की गई पाबंदी की सिफारिश कृषि विरोधी: नौ जवान किसान क्लब
- बॉयोटैक उत्पादन और ग्रामीण संपन्नता बढ़ाने में सहायक

चंडीगढ़, 
:: हम नौ जवान किसान क्लब, पंजाब का एक प्रमुख किसान संगठन सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त एक छह सदस्यीय तकनीकी विशेषज्ञ समिति द्वारा भारत में सभी बॉयोटैक फसलों के फील्ड परीक्षणों संबंधरी रिसर्च के 10 वर्षीय फ्रीज की सिफारिश से बेहद निराश हैं और ये सिफारिशें पूरी तरह से किसान विरोधी हैं। 

(L-R): Professor I. S. Dua (Former Chairman, Department of Botany, Panjab University, Chandigarh) and Mr. Karnel Singh( President of the Nau Jawan Kisan Club)  addressing a press conference on the pressing issues facing the Cotton Farmers of the State at Press Club, Chandigarh on Saturday 27th Oct. 2012. 
पूरे विश्व के किसान कई कदम आगे बढ़ चुके हैं। वे अब बिजाई के लिए नवीनतम वैज्ञानिक तकनीकों से तैयार बीजों को प्राप्त करते हैं। ये वो बीज हैं जिन्हें हानिकारक कीटों से पूरी तरह सुरक्षा प्राप्त है। अन्य बीज पौधे को खरपतवार और अन्य जड़ों आदि से सुरक्षित होते हैं और ये किसानों को प्रभावी ढंग से खरपतवारों से मुक्ति प्राप्त करते हैं। बीजों पर हर्बीसाइड के छिड़काव से भी वे एक स्वस्थ फसल के तौर पर बनी रहती हैं। वहीं ये बीज कम पानी पर फसल को अच्छे से पकने देते हैं, खाद की कम खपत लेते हैं और नाइट्रोजन को अधिक कुशलता से उपयोग में लाते हैं, जो कि आजकल के बदलते पर्यावरण, तेजी से बदले वाले मौसम, सिंचाई की कमी और मिलावटी खाद की आपूर्ति के समय काफी महत्वपूर्ण हो जाते हैं।

नौ जवान किसान क्लब के अध्यक्ष श्री करनैल सिंह ने कहा कि हम फसलों के उत्पादन के संबंध में कई सारी चुनौतियों का सामना कर रहे हैं, जिनमें कृषि श्रमिकों की कमी, श्रमिकों पर आने वाला अधिक खर्च, कीट, खरपतवार, रोग, पानी की कमी और न्यूट्रीटेंड की उपलब्धता आदि प्रमुख हैं। बॉयोटैक्नोलॉजी और जीएम फसलों से हम कुछ पसंदीदा विकल्प मिल सकते हैं। तकनीकी विशेषज्ञ समिति की 10 साल पाबंदी की सिफारिश पूरी तरह से किसान विरोधी है। हमें बॉयोटैक्नोलॉजी की जरूरत है। हम चुनने का अधिकार और कृषि करने की स्वतंत्रता चाहते हैं। हमारा सुप्रीम कोर्ट में पूरा विश्वास है जो कि किसानों के हित में ही फैसला करेगा, जिन्हें अपनी फसल उत्पादकता और व्यक्गित आर्थिक संपन्नता बढ़ाने के लिए नई तकनीकों की जरूरत है। पदमश्री जगजीत सिंह हारा ने कहा कि टीईसी ने जिस प्रतिबंध की सिफारिश की है वो किसानों के हितों के विरुद्ध है। 
पंजाब यूनीवर्सिटी के बॉटनी विभाग के पूर्वाध्यक्ष एवं वियात कृषि वैज्ञानिक प्रोफेसर आई. एस. दुआ ने कहा कि  बीते 10 वर्ष में बीटी कॉटन के बीजों के उपयोग, जो कि भारत में एकमात्र स्वीकृत तकनीक है, हमारा कपास उत्पादन दोगुणा हो गया है, कीटनाशकों की खपत कम हो गई है और हम बॉलवोस को नियंत्रित करने के लिए कहीं कम कीटनाशकों का छिड़काव करते हैं, जो कि कपास की फसल पर हमला करने वाला मुय कीट था, इस से हम अपना उत्पादन में होने वाला नुक्सान कम करने में सफल रहे हैं। इससे ग्रामीण श्रमिकों के लिए अधिक रोजगार के अवसर भी पैदा हुए हैं, जिससे हमारे गांवों का माहौल भी बेहतर हुआ है। किसानों की आय बढ़ाने के अलावा हमारी और हमारी परिवारों की जिंदगी भी बेहतर हुई है। हम करीब 1 हजार हाईब्रिड बीटी कॉटन बीजों के करीब पहुंच चुके हैं। हमें और तकनीकें चाहिए और अपनी फसलों के लिए अपने पसंदीदा बीजों के और विकल्प चाहिएं।

Wednesday, July 31, 2013

जेल में भुगत रहे है किए पाप की सजा

* दुष्कर्म मामलों में कारागार में बंद है 190 आरोपी
* कोर्ट ने 35 दुराचारियों की सजा कर दी है मुकरर्र


मुजफ्फरनगर।
दिल्ली गैंगरेप की शर्मिदंगी के बाद देश की "आधी आबादी" को क्या कानून सुरक्षा कवच दे पाएगा, यह सवाल सभी की जुबां पर हैं। महिला उत्पीडऩ की हकीकत को खंगाले, तो सच्चाई बेहद कड़वी है। मुजफ्फरनगर की जेल में बंद दुराचारियों की संख्या कुछ कम नहीं हैं। दुष्कर्म के मामलों में 190 बंदी जेल की चारदीवारी में कैद हैं। 
जिले में हर माह दुराचार की दो-तीन वारदाते हो रही हैं। शुक्रवार को दरिंदो ने फुगाना के जोगियाखेड़ी में किशोरी से पंचायतघर में ही गैंगरेप किया। आरोपी अभी पुलिस के हाथ भी नहीं लगे हैं। बसेड़ा के सामुहिक दुराचार का मामला हो, या चर्चित चरथावल का इमराना प्रकरण और हाईवे पर दिल्ली की युवतियों से गैंगरेप, जिले में ऐसी वारदातें घटती रही हैं। सूबे में महिला उत्पीडऩ के अधिकांश मामलों में जिले की गिनती हैं। पूरे देश में दिल्ली गैंगरेप की भेंट चढ़ गई पैरा मैडिकल छात्रा पर हो-हल्ला मचा हुआ है। 
सोचनीय यह है कि यहां न जाने कितनी बेबस जिंदगियां दुराचारियों की हैवानियत का शिकार हो रही हैं। जेल की सलाखों के पीछे 35 बलात्कारी सजा भुगत रहे हैं। इमराना प्रकरण में दस साल के कारावास काट रहे ससुर अली मोहम्मद भी है। १५५ बंदी विचाराधीन हैं। जेल में बंद कुल 2365 में से 190 कैदियों का दुराचार की वारदातों में बंदी होना सच्चाई बयां कर रहा है। छेड़छाड़ की घटनाएं आम हैं, जिसमें चाकूबाजी, फायरिंग और संघर्ष आए दिन की बात हैं। ऐसे में महिलाओं को कैसे सुरक्षा मिलेगी, यह गंभीर मुद्दा है।
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तीन साल में दुष्कर्म के 65 मामले
पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक अभी भी समाज में महिलाओं से जुड़ी वारदातों में कोई कमी नहीं आई हैं। बीते तीन साल में दुष्कर्म के 65 मामलें दर्ज किए गए हैं। दहेज हत्या में भी जिले में वर्ष 2010 में 24, 2011 में 26 और 2012 में 16 बेटियों की मौत हो चुकी हैं। 

वो अफसर जिन्होंने चुकाई ईमानदारी की कीमत

वो अफसर जिन्होंने चुकाई ईमानदारी की कीमत

Tuesday, July 2, 2013

ममा‘ज ब्वॉय हैं आमिर अली!

-----आमिर अली हैं मां के आज्ञाकारी बेटे ! 
जिसने भी ‘‘ममा‘ज ब्वॉय‘‘ शब्द की रचना की होगी, वह निश्चित रूप से आमिर अली जैसे किसी व्यक्ति से ही प्रेरित हुआ होगा। हालांकि, हम इस श्रेणी में शामिल होने वाले पुरूषों की निंदा करते हैं, लेकिन आमिर को इस वर्ग में जरूर शामिल किया जाना चाहिये। 
सहारा वन के धारावाहिक ‘झिलमिल सितारों का आंगन होगा‘ में सौम्य की भूमिका निभा रहे अभिनेता आमिर अली की जिंदगी की एक घटना इससे जुड़ी हुई है। दरअसल, जीवन में एक दुर्भाग्यपूर्ण और जानलेवा दुर्घटना का शिकार होने के बाद आमिर ने अपनी मां से वादा किया था कि वे कभी भी मोटरसाइकिल नहीं चलायेंगे। 
लेकिन हाल ही में ‘झिलमिल सितारों का आंगन होगा‘ की शूटिंग के दौरान वह उस समय एक दुविधाजनक स्थिति में फंस गये, जब उन्हें शो के एक दृश्य के लिये बाइक चलाने की शूटिंग करनी थी। यदि इस धारावाहिक से जुड़े सूत्रों की बातों पर विश्वास किया जाये, तो आमिर को अपनी ऑनस्क्रीन पत्नी अंगना के साथ बाइक की सवारी करनी थी। आमिर ने जब इस दृश्य के बारे में सुना, तो शुरूआत में वह बेहद उत्साहित हुये, लेकिन मां से किये गये वादे की याद आते ही उनका यह उत्साह ठंडा पड़ गया। आमिर ने निर्माता से अनुरोध किया कि इस सीन को संशोधित कर बाइक सीक्वेंस को हटा दिया जाये। सूत्रों ने बताया कि काफी समझाने के बाद निर्माता बाइक सीन को कार के साथ संशोधित करने के लिये राजी हो गये। 
हालांकि, दर्शक निश्चित रूप से आमिर को बाइक चलाते नहीं देख पायेंगे, लेकिन हम मां से किये गये वादे को निभाने के आमिर के फैसले की सराहना करते हैं।

Monday, October 29, 2012

मौत की रफ्तार ने निगली पांच जिंदगी


* नो एंट्री में घुसे असंतुलित ट्रक का तांड़व

अमित सैनी, मुजफ्फरनगर।
मौत की रफ्तार ने पांच बेकुसूरों की जिंदगी निगल ली। जानसठ रेलवे क्रोसिंग पुल पर अंधी स्पीड ने पहले एक साइकिल सवार को रौंदा और फिर रिक्शा सवार चार लोगों को मौत की नींद सुला दिया। इसमें से रिक्शा पोलर तो उछलकर पुल से करीब ३० फुट नीचे जा गिरा। ट्रक का कहर यहीं भी नहीं रुका। करीब ड़ेढ किमी तक रिक्शा को घसीटते हुए अलमासपुर चौक तक ले गया। पुलिस के रोकने पर चालक ने ट्रक को एक दुकान में घुसा दिया। लापरवाही के आरोप में दरोगा समेत चार पुलिसकर्मियों को लाइन हाजिर कर दिया गया है।
मौत का यह तांड़व सोमवार रात करीब सवा आठ बजे शहर के जानसठ रेलवे क्रोसिंग पुल पर हुआ। नशे में धुत्त चालक अंधी रफ्तार से नई मंडी के अलमासपुर की ओर दौड़ा जा रहा था। पुल पर चढ़ते ही ट्रक ने पहले साइकिल सवार को कुचल दिया। पीछे से आ रहे लोगों ने शोर मचाया तो चालक ने ट्रक की ओर स्पीड बढ़ा दी। इसके बाद ट्रक ने रिक्शा को टक्कर मारकर उड़ा दिया। रिक्शा चालक तो उछलकर पुल से करीब ३० फुट नीचे जा गिरा, जबकि रिक् शा सवार महिला, पुरुष और एक बच्चे को ट्रक कुचलते हुए आगे बढ़ गया। चकनाचूर हुई रिक्शा का हैडिंल ट्रक के निचले हिस्से में फंस गया। ट्रक चिंगारी के साथ उसी स्पीड से सामने आने वालों को क्षतिग्रस्त करते हुए अलमासपुर चौक तक जा पहुंचा। पुलिस कर्मियों ने उसे रोकने का प्रयास किया तो चालक ने ट्रक को पवन साइकिल वक्र्स की दुकान में घुसा दिया। पुलिस ने नशे में धुत्त चालक संजय पुत्र रामपाल निवासी चौधरान पट्टी, नकुड़ को गिरफ्तार कर लिया। आरोपी चालक के खिलाफ गैर इरादतन हत्या की धारा में रिपोर्ट दर्ज करने की तैयारी कर रही है। समाचार लिखे जाने तक मृतकों की शिनाख्त नहीं हो सकी थी।
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मौत के कहर का कौन है जिम्मेदार
* ट्रक के तांड़व से मची जानसठ रोड पर भगदड़
* तीन कारों में सवार परिवार भी बचे बाल-बाल
* नो एंट्री होते हुए आखिर कैसे घुसा शहर में ट्रक
शहर में हादसों को टालने के लिए सुबह सात बजे से रात्रि नौ बजे तक बड़े वाहनों, खासतौर से ट्रकों के आवागमन पर पूरी तरह रोक है। फिर भी पुलिस सांठ-गांठ से ट्रक अंदर दाखिल ही हो जाते हैं। मौत का कहर बरपाने वाला यह ट्रक भी दिनभर मीनाक्षी चौक स्थित कांग्रेस नेता की ट्रांसपोर्ट पर खड़ा रहा। शाम के समय से ही ट्रक चालक संजय चौधरी ने शराब ड़कारनी शुरू कर दी थी। आठ बजे करीब संजय नशे में धुत्त होकर ट्रक लेकर भोपा रोड जाने के लिए चला। मीनाक्षी चौक पर मौजूद पुलिसकर्मियों ने ट्रक को रोकने तक की जहमत नहीं उठाई। शायद यदि ट्रक को रोक लिया जाता तो इस भयानक हादसे को रोका जा सकता था। ऐसा पहली बार नहीं हुआ है, जब नो एंट्री में घुसे किसी ट्रक ने मौत का कहर बरपाया हो। पहले भी ऐसी अनेक घटनाऐं हो चुकी हैं, बावजूद इसके प्रशासन उससे कोई सबक नहीं ले रहा है। सोमवार रात हुए दर्दनाक हादसे ने पुलिस की घोर लापरवाही उजागर की है। अधिकारियों ने भी आनन-फानन में गलती पर पर्दा डालने के लिए मंडी थाने के दरोगा सीपी कठेरिया और चार पुलिसकर्मियों को लाइन हाजिर तो कर दिया, लेकिन सवाल यही है कि आखिर कब तक नो एंट्री का मखौल उड़ता रहेगा और बेकुसूर अपनी जिंदगी से हाथ धोते रहेगें।
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मौत का मंजर देखकर सहम गए लोग
मुजफ्फरनगर। खून से लथपथ इधर-उधर पड़ी पांच लाशें, मांस के लौथड़े और बहता खून। यह खौफनाक मंजर जिसने भी देखा, वह सहम गया। सैकड़ों लोगों का जमावड़ा था और हर किसी का गुस्सा उबाल पर था। मौत बने ट्रक के सामने जो भी आया उसकी सांसे अटककर रह गई। क्योंकि ट्रक में फंसी रिक्शा सड़क से घिसड़ते हुए चिंगारी निकाल रही थी। कुदरत का करम रहा कि कोई दूसरा वाहन उसके सामने नहीं आया। अन्यथा हादसा ओर भी बड़ा हो सकता था।
मौत के इस कहर के एक नहीं अनेक प्रत्यक्षदर्शी गवाह हैं। साइकिल सवार को कुचलकर भाग रहे ट्रक चालक को पकडऩे के प्रयास भी हुए, लेकिन रिक् शा को रौंदकर जिस तरह ट्रक भागा कोई उसका पीछा करने की हिम्मत नहीं जुटा सका। धर्मवीर बालियान भी उनमें से एक थे। यह खौफनाक मंजर देखकर वो भी एक बारगी हिल गए। बाद में उन्होंने खुद को संभालते हुए पुलिस को सूचना दी। ऐसा ही भरतिया कॉलोनी के विजय के साथ भी हुआ। खून से लथपथ पांच लाशें देखकर उनका सिर चकरा गया, क्योंकि लाशों का स्वरूप इतना बिगड़ चुका था कि उनके भेजे और मांस के लोथड़े इधर-उधर बिखरे पड़े थे। कुल मिलाकर जिसने भी यह मंजर देखा उसके होश उड़ गए। उन लोगों की तो सांसे ही अटक गई थी, जो मौत की रफ्तार से भाग रहे ट्रक के सामने आने से बाल-बाल बचे।
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हादसों को दावत देने वाला है रेलवे क्रोसिंग पुल
मुजफ्फरनगर। आखिर जिस अनहोनी की आशंका थी, वो सोमवार को सही साबित हुई। पुल के निर्माण से ही यह सवाल उठ रहा था कि बिना फुटपाथ का यह पुल हादसों को दावत दे रहा है। ट्रक के नीचे आकर पांचों लोग जहां मारे गए हैं, वह पुल का एक किनारा है। रेलवे विभाग ने बरसों से खुले नीचे के रास्ते को दीवार कर पूरी तरह बंद किया हुआ है। जिस कारण रिक्शा चालकों और छोटे वाहनों को मजबूरन पुल के ऊपर से गुजरना पड़ता है। यहां पर पथ-प्रकाश की भी समुचित इंतजाम नहीं है।
भोपा पुल के मुकाबले जानसठ रेलवे क्रोसिग पर बनाए गए पुल के अस्तित्व को लेकर करीब एक बरस से सवाल उठ रहे हैं। क्योंकि पुल का आकार और बनाने का ढग़ जिस तरह का है, वो वाकई दुर्घटनाओं को आमंत्रण देने वाला है। पैदल चलने वालों के लिए फुटपाथ तक नहीं बनाया गया है। उल्टा विरोध के बावजूद रेलवे विभाग ने बरसों से नीचे बने रेलवे क्रोसिंग के रास्ते को दीवार बनाकर बंद कर दिया है। ऐसे में तमाम लोगों को पुल का ही सहारा है। सोमवार रात ट्रक ने जहां पर पांच लोगों को कुचला है, वो पुल का एक किनारा है। इस पुल पर पथ प्रकाश का भी कोई इंतजाम नहीं है। 
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ये है मरने वाले
मुजफ्फरनगर। हादसे में मारे गए पांचों लोगों की देर रात पहचान हो गई। मरने वालों में अमित विहार का मुकेश उसकी पत्नी कविता और आठ साल की बेटी निशा शामिल हैं। लक्ष्मण विहार निवासी रिटायर्ड दरोगा राजेंद्र शर्मा का बेटा पंकज भी काल का ग्रास बना है। पांचवा मृतक दुधिया बबलू पुत्र रहीस निवासी निराना बताया गया है। मृतक विकलांग बबलू के चार बच्चें बताए गए हैं। अभी यह नहीं साफ हो सका है कि रिक्शा कौन चला रहा था। हालांकि मौत की खबर मिलते ही उनके परिजन रोते-बिलखते जिला अस्पताल में पहुंच गए।
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मौत पर उबाल, लोगों ने किया हंगामा
* अलमासपुर चौक पर भीड़ ने लगाया जाम
* मंडी थाने के दरोगा कठेरिया ने की अभद्रता
मुजफ्फरनगर। पांच लोगों की मौत और ट्रक की बेलगाम रफ्तार को लेकर लोगों का गुस्सा उबाल पर था। यही वजह थी कि अलमासपुर चौक पर एकत्र हुए लोगों ने नो एंट्री में घुसे ट्रक को लेकर पुलिस के खिलाफ हंगामा भी किया। आरोप है कि इस दौरान मंडी थाने में दरोगा सीपी कठेरिया ने कई लोगों के साथ अभद्रता भी की। 
ट्रक के कुचलने से हुई पांच लोगों की दर्दनाक मौत से हर कोई गमगीन होने के साथ इस बात को लेकर गुस्सा था कि नो एंट्री होते हुए पुलिस की सांठ-गांठ से ट्रक कैसे शहर के अंदर घुस आया। ट्रक असंतुलित होकर पवन पाल साइकिल वक्र्स की दुकान में जा घुसा। गनीमत रही कि उस वक्त दुकान बंद थी। लेकिन लोग काफी तादाद में सड़क किनारे खड़े थे। यही वजह थी कि लोगों ने हादसे के विरोध में जाम लगाकर विरोध प्रदर्शन भी किया। दरोगा कठेरिया और साथी पुलिसकर्मियों बदमीजी किए जाने से लोग भड़क गए थे। लेकिन बाद में समझा-बुझाकर शांत किया। 

Veena searching streets of Mumbai to find the character face for her movie


Mumbai, kulbir kalsi :
Bombshell of Bollywood Veena Malik is not in a mood to take any chance for her upcoming movie that’s why she is not leaving any stone un turned. Now days she is busy on the streets of Mumbai because of searching a perfect character for her upcoming movie “The city that Never Sleeps”. She was seen wearing a Burkha while travelling in the streets of Mumbai because she wants to avoid the crowds mobbing her. She is diverging from his serious genre for this movie and trying to given a perfect character face.
Veena Malik said, “Its big movie for me and I don’t want to take any chance so I have decided I personally walk around the streets of Mumbai and search the perfect face which will suit. Here everyone is a actor but we need to find out hidden inside actor”.

Nowadays bollywood actors like Amir khan ,Salman khan Sharukh khan Amitabh Bachan have always managed to get into the character of a the person that the role they perform that is why they are the best and I also want to be the best.

Veena had signed new film “The City that Never Sleeps” which is going to break 20 Guinness book of world record. The movies produced by Satish Reddy and Directed by Haroon Rashid. The Film brings more international flavour for the audience that you never seen before. You will see an amalgamation of many actor and actress from different countries U.K, U.S.A, Pakistan, Ukraine and Russia. The Bollywood stars also feature in the movie along with four music directors and twenty supporting directors to complete the film within seven days to first copy out.

Sunday, October 28, 2012

हम बॉयोटैक फसलें चाहते हैं


- टीईसी द्वारा की गई पाबंदी की सिफारिश कृषि विरोधी: नौ जवान किसान क्लब
- बॉयोटैक उत्पादन और ग्रामीण संपन्नता बढ़ाने में सहायक

चंडीगढ़, 
:: हम नौ जवान किसान क्लब, पंजाब का एक प्रमुख किसान संगठन सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त एक छह सदस्यीय तकनीकी विशेषज्ञ समिति द्वारा भारत में सभी बॉयोटैक फसलों के फील्ड परीक्षणों संबंधरी रिसर्च के 10 वर्षीय फ्रीज की सिफारिश से बेहद निराश हैं और ये सिफारिशें पूरी तरह से किसान विरोधी हैं। 

(L-R): Professor I. S. Dua (Former Chairman, Department of Botany, Panjab University, Chandigarh) and Mr. Karnel Singh( President of the Nau Jawan Kisan Club)  addressing a press conference on the pressing issues facing the Cotton Farmers of the State at Press Club, Chandigarh on Saturday 27th Oct. 2012. 
पूरे विश्व के किसान कई कदम आगे बढ़ चुके हैं। वे अब बिजाई के लिए नवीनतम वैज्ञानिक तकनीकों से तैयार बीजों को प्राप्त करते हैं। ये वो बीज हैं जिन्हें हानिकारक कीटों से पूरी तरह सुरक्षा प्राप्त है। अन्य बीज पौधे को खरपतवार और अन्य जड़ों आदि से सुरक्षित होते हैं और ये किसानों को प्रभावी ढंग से खरपतवारों से मुक्ति प्राप्त करते हैं। बीजों पर हर्बीसाइड के छिड़काव से भी वे एक स्वस्थ फसल के तौर पर बनी रहती हैं। वहीं ये बीज कम पानी पर फसल को अच्छे से पकने देते हैं, खाद की कम खपत लेते हैं और नाइट्रोजन को अधिक कुशलता से उपयोग में लाते हैं, जो कि आजकल के बदलते पर्यावरण, तेजी से बदले वाले मौसम, सिंचाई की कमी और मिलावटी खाद की आपूर्ति के समय काफी महत्वपूर्ण हो जाते हैं।

नौ जवान किसान क्लब के अध्यक्ष श्री करनैल सिंह ने कहा कि हम फसलों के उत्पादन के संबंध में कई सारी चुनौतियों का सामना कर रहे हैं, जिनमें कृषि श्रमिकों की कमी, श्रमिकों पर आने वाला अधिक खर्च, कीट, खरपतवार, रोग, पानी की कमी और न्यूट्रीटेंड की उपलब्धता आदि प्रमुख हैं। बॉयोटैक्नोलॉजी और जीएम फसलों से हम कुछ पसंदीदा विकल्प मिल सकते हैं। तकनीकी विशेषज्ञ समिति की 10 साल पाबंदी की सिफारिश पूरी तरह से किसान विरोधी है। हमें बॉयोटैक्नोलॉजी की जरूरत है। हम चुनने का अधिकार और कृषि करने की स्वतंत्रता चाहते हैं। हमारा सुप्रीम कोर्ट में पूरा विश्वास है जो कि किसानों के हित में ही फैसला करेगा, जिन्हें अपनी फसल उत्पादकता और व्यक्गित आर्थिक संपन्नता बढ़ाने के लिए नई तकनीकों की जरूरत है। पदमश्री जगजीत सिंह हारा ने कहा कि टीईसी ने जिस प्रतिबंध की सिफारिश की है वो किसानों के हितों के विरुद्ध है। 
पंजाब यूनीवर्सिटी के बॉटनी विभाग के पूर्वाध्यक्ष एवं वियात कृषि वैज्ञानिक प्रोफेसर आई. एस. दुआ ने कहा कि  बीते 10 वर्ष में बीटी कॉटन के बीजों के उपयोग, जो कि भारत में एकमात्र स्वीकृत तकनीक है, हमारा कपास उत्पादन दोगुणा हो गया है, कीटनाशकों की खपत कम हो गई है और हम बॉलवोस को नियंत्रित करने के लिए कहीं कम कीटनाशकों का छिड़काव करते हैं, जो कि कपास की फसल पर हमला करने वाला मुय कीट था, इस से हम अपना उत्पादन में होने वाला नुक्सान कम करने में सफल रहे हैं। इससे ग्रामीण श्रमिकों के लिए अधिक रोजगार के अवसर भी पैदा हुए हैं, जिससे हमारे गांवों का माहौल भी बेहतर हुआ है। किसानों की आय बढ़ाने के अलावा हमारी और हमारी परिवारों की जिंदगी भी बेहतर हुई है। हम करीब 1 हजार हाईब्रिड बीटी कॉटन बीजों के करीब पहुंच चुके हैं। हमें और तकनीकें चाहिए और अपनी फसलों के लिए अपने पसंदीदा बीजों के और विकल्प चाहिएं।