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Thursday, September 25, 2014

यार हुआ बेगानाः बीजेपी और शिवसेना में “तलाक“

लगातार बैठकों और काफी माथापच्ची के बाद भी बीजेपी-शिवसेना गठबंधन ग्रहण लग ही गया...दोनों पार्टियां अपनी-अपनी शर्तों पर अड़ी रही। नतीजन 25 साल पुराना याराना टूट गया। गुरूवार शाम बीजेपी ने आखिरकार साफ कर दिया कि बस...अब बहुत हो चुका...ये साथ यहीं तक था...बीजेपी ने गठबंधन तोड़ते हुए कहा है कि वो अपने छोटे दलों का साथ नहीं छोड़ेगी, लेकिन शिवसेना हर बार एक तरह के ही प्रस्ताव दे रही थी, जिसके चलते शिवसेना का साथ छोड़ दिया है।
BJP+SHIV SHENA


शिवसेना अपने फार्मूले 151:131:6 पर चुनाव लड़ना चाहती थी। यानि खुद 151, बीजेपी को 131 और अन्य दलों के लिए महज 6 सीटें ही दे रही थी, जबकि बीजेपी शिवसेना से वो सीटें मांग रही थी, जिन पर शिवसेना कभी जीती ही नहीं। साथ ही बीजेपी घटक दलों के लिए 18 सीटों की मांग कर रही थी। बैठकों के साथ-साथ दोनों पार्टियों के बीच रूठना-मनाना का ये खेल चलता रहा, मगर कोई परिणाम नहीं निकल सका। गठबंधन के छोटे सहयोगी दल भी 18 सीटों की मांग पर अड़े हुए हैं...सीटों के बंटवारे को लेकर चल रही रस्साकशी के बीच बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने अपना मुंबई दौरा भी रद्द कर दिया। शाह गुरूवार को मुंबई जाने वाले थे। गठबंधन की बरकरारी के लिए महाराष्ट्र बीजेपी के चुनाव प्रभारी ओम माथुर के घर पर बुधवार रात करीब दो बजे तक बैठक चली....मगर नतीजा वहीं ढाक के तीन पात ही रहा....
दूसरी तरफ, महाराष्ट्र में अभी कांग्रेस-एनसीपी के बीच विधानसभा चुनाव के लिए सीटों पर सुलह नहीं हुई है, लेकिन इसी दौरान कांग्रेस ने 118 कैंडिडेट्स की सूची जारी कर दी है।
CONGRESS + NCP

मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण और उनके कैबिनेट के कई अन्य मंत्रियों का नाम इस सूची में शामिल है। कांग्रेस उम्मीदवारों की घोषणा ऐसे समय की गयी है३३ जब शरद पवार की एनसीपी के साथ सीट साझेदारी पर कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है। वर्तमान में राज्य विधान परिषद के सदस्य चव्हाण को उनके गृह जिला सतारा में कराद दक्षिण सीट से प्रत्याशी बनाया गया है। उनके कैबिनेट के कई सहयोगी तथा वरिष्ठ नेताओं का सूची में नाम है जिनमें कुदाल से प्रचार कमिटी प्रमुख नारायण राणे, शिरडी से राधाकृष्ण विखे पाटिल, सांगमनेर से बालासाहेब थोराट हैं। लोकमान्य तिलक के प्रपौत्र रोहित दीपक तिलक को कांग्रेस ने पुणे शहर की कस्बा पेठ से उम्मीदवार बनाया है। पूर्व मुख्यमंत्री विलासराव देशमुख के पुत्र अमित देशमुख  को लातूर और पूर्व केंद्रीय गृहमंत्री सुशील कुमार शिंदे की पुत्री प्रणेति शिंदे को शोलापुर से चुनाव मैदान में उतारा गया है।

हालांकि नामांकन दाखिल करने के अंतिम तिथि 27 सितंबर है। कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी अभी तक सीटों के बंटवारे के मुद्दे पर किसी नतीजे पर नहीं पहुंच पाए हैं।

Wednesday, July 23, 2014

अमित सैनी: जिंदगी जैसे ठहर सी गई है...

अमित सैनी: जिंदगी जैसे ठहर सी गई है...: जिंदगी मेरी जैसे ठहर सी गई है, दरिया के किसी ठहरे हुए पानी की तरह शून्य हो गई है। दिल-ओ-दिमाग में केवल एक ही ख्याल रहने लगा है। ना सोचने की...

अमित सैनी: जिंदगी जैसे ठहर सी गई है...

अमित सैनी: जिंदगी जैसे ठहर सी गई है...: जिंदगी मेरी जैसे ठहर सी गई है, दरिया के किसी ठहरे हुए पानी की तरह शून्य हो गई है। दिल-ओ-दिमाग में केवल एक ही ख्याल रहने लगा है। ना सोचने की...

Saturday, June 7, 2014

खिसयानी बिल्ली खंभा नोंचे....

खिसयानी बिल्ली खंभा नोंचे....
बिल्कुल यही हाल इस वक्त यूपी की सत्ताधारी पार्टी सपा का है... सूबे में बढ़ते अपराध की लगाम कसने में पूरी तरह से नाकाम पार्टी सुप्रीमो मुलायम सिंह, सीएम अखिलेश यादव और शीर्ष नेताओं में शुमार रामगोपाल यादव अब पूरा ठिंकरा मीडिया पर फोड़ रहे है। अपराधियों पर तो कोई पार बसती नही ंतो मीडिया को ही कोसने लगे। 

लोकसभा चुनाव में करारी शिकस्त के बाद बसपा सुप्रीमो मायावती भी खोपचे से बाहर निकल आई है...बदायूं पहुंचकर वो भी मीडिया से मुखातिब हुई...वरना सत्ता पर काबिज़ होने के बाद तो जैसे मीडिया से पूरी तरह से ही मुंह मोड लिया था। सभी जानते है कि आज भी बसपा नेता कैमरे से ऐसे बचते नज़र आते है जैसे बुदके को देखकर बकरी...इसके पीछे कारण कुछ और नहीं, बल्कि खुद बसपा सुप्रीमो मायावती की ओर से अपने कारिदों को दिशा-निर्देश किए हुए है कि कैमरे से दूर रहा....भूत है इसमें...मगर चुनाव में अक्ल ठिकाने आई तो कैमरा ही डूबते को तिनके का सहारा नजर आया।

Demo Pic


भई टीपू, चच्चा मुलायम और रामू...दिखावे पे मत जाओ, थोड़ी-बहुत अपनी भी अक्ल लगाओं....बोलने से पहले कुछ तो सोच-समझ लिया करो कि क्या बोल रहे हो? सबसे पहले तो नारी जाति का सम्मान करना सीखों और उसके बाद भाषण देना...क्योंकि भाषण तो कोई भी दे सकता है...दिल्ली में अरविंद केजरीवाल ने भी दिया था...हुआ क्या घर लौटते है तो खा-पीकर.....थप्पड। ़...ऐसा मत करो कि यूपी में आपका, आपके चटुकार, ठाठ और मंच से लेकर गली-मोहल्लों में आपके नाम की कसीदें पढ़ने वाले उन नेताओं को भी वही हाल न हो जाएं जो थानों में बैठकर थानेदारी कर रहे है। 

अपना और अपने इन ठेकेदारों का हाल सुधारिए, सूबे का हुलिया सुधर जाएगा। खाकी वर्दी में लिपटे जिन मामा, फूफी, चाचा-चाची, बहन की नंद के देवर का साला, उसका बहनोई, उसके रिश्ते का साला, उसके भी मामा के चाचा का बेटा आदि-आदि को जो थानों-कोतवाली, जिलों और अन्य महत्वपूर्ण पदों पर जिम्मेदारी सौंपी है ना उनमें छटनी कर दो। रिश्तेदारी तो बाद में भी निभाई जा सकती है...पहले प्रदेश तो बचा लो। वरना पुरानी कहावत चरितार्थ हो जाएगी कि तन पर नहीं लत्ता और अम्मा चली कलकत्ता...मैं तो भई मुफत की सलाह दे सकता हंू, बाकी काम आपका। हां, अगर इससे भी काम ना चले तो एक बार फिर से मीडिया को कोस लेना...इससे भी अच्छी सलाह दूंगा फिर....ये तो यकास ही दे रहा हूं, इबकी बार सोच्चे बिणा ना दूं।

Thursday, September 25, 2014

यार हुआ बेगानाः बीजेपी और शिवसेना में “तलाक“

लगातार बैठकों और काफी माथापच्ची के बाद भी बीजेपी-शिवसेना गठबंधन ग्रहण लग ही गया...दोनों पार्टियां अपनी-अपनी शर्तों पर अड़ी रही। नतीजन 25 साल पुराना याराना टूट गया। गुरूवार शाम बीजेपी ने आखिरकार साफ कर दिया कि बस...अब बहुत हो चुका...ये साथ यहीं तक था...बीजेपी ने गठबंधन तोड़ते हुए कहा है कि वो अपने छोटे दलों का साथ नहीं छोड़ेगी, लेकिन शिवसेना हर बार एक तरह के ही प्रस्ताव दे रही थी, जिसके चलते शिवसेना का साथ छोड़ दिया है।
BJP+SHIV SHENA


शिवसेना अपने फार्मूले 151:131:6 पर चुनाव लड़ना चाहती थी। यानि खुद 151, बीजेपी को 131 और अन्य दलों के लिए महज 6 सीटें ही दे रही थी, जबकि बीजेपी शिवसेना से वो सीटें मांग रही थी, जिन पर शिवसेना कभी जीती ही नहीं। साथ ही बीजेपी घटक दलों के लिए 18 सीटों की मांग कर रही थी। बैठकों के साथ-साथ दोनों पार्टियों के बीच रूठना-मनाना का ये खेल चलता रहा, मगर कोई परिणाम नहीं निकल सका। गठबंधन के छोटे सहयोगी दल भी 18 सीटों की मांग पर अड़े हुए हैं...सीटों के बंटवारे को लेकर चल रही रस्साकशी के बीच बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने अपना मुंबई दौरा भी रद्द कर दिया। शाह गुरूवार को मुंबई जाने वाले थे। गठबंधन की बरकरारी के लिए महाराष्ट्र बीजेपी के चुनाव प्रभारी ओम माथुर के घर पर बुधवार रात करीब दो बजे तक बैठक चली....मगर नतीजा वहीं ढाक के तीन पात ही रहा....
दूसरी तरफ, महाराष्ट्र में अभी कांग्रेस-एनसीपी के बीच विधानसभा चुनाव के लिए सीटों पर सुलह नहीं हुई है, लेकिन इसी दौरान कांग्रेस ने 118 कैंडिडेट्स की सूची जारी कर दी है।
CONGRESS + NCP

मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण और उनके कैबिनेट के कई अन्य मंत्रियों का नाम इस सूची में शामिल है। कांग्रेस उम्मीदवारों की घोषणा ऐसे समय की गयी है३३ जब शरद पवार की एनसीपी के साथ सीट साझेदारी पर कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है। वर्तमान में राज्य विधान परिषद के सदस्य चव्हाण को उनके गृह जिला सतारा में कराद दक्षिण सीट से प्रत्याशी बनाया गया है। उनके कैबिनेट के कई सहयोगी तथा वरिष्ठ नेताओं का सूची में नाम है जिनमें कुदाल से प्रचार कमिटी प्रमुख नारायण राणे, शिरडी से राधाकृष्ण विखे पाटिल, सांगमनेर से बालासाहेब थोराट हैं। लोकमान्य तिलक के प्रपौत्र रोहित दीपक तिलक को कांग्रेस ने पुणे शहर की कस्बा पेठ से उम्मीदवार बनाया है। पूर्व मुख्यमंत्री विलासराव देशमुख के पुत्र अमित देशमुख  को लातूर और पूर्व केंद्रीय गृहमंत्री सुशील कुमार शिंदे की पुत्री प्रणेति शिंदे को शोलापुर से चुनाव मैदान में उतारा गया है।

हालांकि नामांकन दाखिल करने के अंतिम तिथि 27 सितंबर है। कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी अभी तक सीटों के बंटवारे के मुद्दे पर किसी नतीजे पर नहीं पहुंच पाए हैं।

Wednesday, July 23, 2014

अमित सैनी: जिंदगी जैसे ठहर सी गई है...

अमित सैनी: जिंदगी जैसे ठहर सी गई है...: जिंदगी मेरी जैसे ठहर सी गई है, दरिया के किसी ठहरे हुए पानी की तरह शून्य हो गई है। दिल-ओ-दिमाग में केवल एक ही ख्याल रहने लगा है। ना सोचने की...

अमित सैनी: जिंदगी जैसे ठहर सी गई है...

अमित सैनी: जिंदगी जैसे ठहर सी गई है...: जिंदगी मेरी जैसे ठहर सी गई है, दरिया के किसी ठहरे हुए पानी की तरह शून्य हो गई है। दिल-ओ-दिमाग में केवल एक ही ख्याल रहने लगा है। ना सोचने की...

Saturday, June 7, 2014

खिसयानी बिल्ली खंभा नोंचे....

खिसयानी बिल्ली खंभा नोंचे....
बिल्कुल यही हाल इस वक्त यूपी की सत्ताधारी पार्टी सपा का है... सूबे में बढ़ते अपराध की लगाम कसने में पूरी तरह से नाकाम पार्टी सुप्रीमो मुलायम सिंह, सीएम अखिलेश यादव और शीर्ष नेताओं में शुमार रामगोपाल यादव अब पूरा ठिंकरा मीडिया पर फोड़ रहे है। अपराधियों पर तो कोई पार बसती नही ंतो मीडिया को ही कोसने लगे। 

लोकसभा चुनाव में करारी शिकस्त के बाद बसपा सुप्रीमो मायावती भी खोपचे से बाहर निकल आई है...बदायूं पहुंचकर वो भी मीडिया से मुखातिब हुई...वरना सत्ता पर काबिज़ होने के बाद तो जैसे मीडिया से पूरी तरह से ही मुंह मोड लिया था। सभी जानते है कि आज भी बसपा नेता कैमरे से ऐसे बचते नज़र आते है जैसे बुदके को देखकर बकरी...इसके पीछे कारण कुछ और नहीं, बल्कि खुद बसपा सुप्रीमो मायावती की ओर से अपने कारिदों को दिशा-निर्देश किए हुए है कि कैमरे से दूर रहा....भूत है इसमें...मगर चुनाव में अक्ल ठिकाने आई तो कैमरा ही डूबते को तिनके का सहारा नजर आया।

Demo Pic


भई टीपू, चच्चा मुलायम और रामू...दिखावे पे मत जाओ, थोड़ी-बहुत अपनी भी अक्ल लगाओं....बोलने से पहले कुछ तो सोच-समझ लिया करो कि क्या बोल रहे हो? सबसे पहले तो नारी जाति का सम्मान करना सीखों और उसके बाद भाषण देना...क्योंकि भाषण तो कोई भी दे सकता है...दिल्ली में अरविंद केजरीवाल ने भी दिया था...हुआ क्या घर लौटते है तो खा-पीकर.....थप्पड। ़...ऐसा मत करो कि यूपी में आपका, आपके चटुकार, ठाठ और मंच से लेकर गली-मोहल्लों में आपके नाम की कसीदें पढ़ने वाले उन नेताओं को भी वही हाल न हो जाएं जो थानों में बैठकर थानेदारी कर रहे है। 

अपना और अपने इन ठेकेदारों का हाल सुधारिए, सूबे का हुलिया सुधर जाएगा। खाकी वर्दी में लिपटे जिन मामा, फूफी, चाचा-चाची, बहन की नंद के देवर का साला, उसका बहनोई, उसके रिश्ते का साला, उसके भी मामा के चाचा का बेटा आदि-आदि को जो थानों-कोतवाली, जिलों और अन्य महत्वपूर्ण पदों पर जिम्मेदारी सौंपी है ना उनमें छटनी कर दो। रिश्तेदारी तो बाद में भी निभाई जा सकती है...पहले प्रदेश तो बचा लो। वरना पुरानी कहावत चरितार्थ हो जाएगी कि तन पर नहीं लत्ता और अम्मा चली कलकत्ता...मैं तो भई मुफत की सलाह दे सकता हंू, बाकी काम आपका। हां, अगर इससे भी काम ना चले तो एक बार फिर से मीडिया को कोस लेना...इससे भी अच्छी सलाह दूंगा फिर....ये तो यकास ही दे रहा हूं, इबकी बार सोच्चे बिणा ना दूं।