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Friday, January 30, 2015

यादगार ही किरदार करने की चाहः रवीना टंडन

(प्रेमबाबू शर्मा )
बॉलीवुड की मस्त-मस्त गर्ल रवीना टंडन फिर से सिल्वर स्क्रीन पर अपना जलवा बिखेरने जा रही हैं। रवीना ने शादी के बाद फिल्मों में काम करना काफी हद तक कम कर दिया है। लेकिन उनकी चाह है कि अब केवल यादगार ही किरदार करना चाहती है। उन्होंने बुढा होगा तेरा बाप और शोभना 7 नाइट्स में विवाह के बाद देखा गया। एक फिल्म बोम्बे वेलवेट में भी काम किया लेकिन फिल्म कब रीलिज होगी इस बारे में रवीना को भी नही पता। सिल्वर स्क्रीन पर एक फिर से आने का मन बना लिया है और अब रवीना अनुराग कश्यप की दो फिल्में में अपना जलवा दिखाती नजर आएगीं। हाल में वह दिल्ली में जायरा डायमंड शो रूम की ओपनिंग में पहुंची इसी दौरान उनसे मुलाकात हुई पेश प्रस्तुत मुलाकात के चंद अंश ।
शादी के पांच के बाद सिल्वर स्क्रीन पर एक फिर से आने का मन बना लिया कैसा लग रहा है ?
अच्छा लग रहा है कला एक ऐसा कीडा है जिसे कलाकार चाह कर भी नही भुला सकता है। लेकिन पंाच कैसे बीते पता ही नही चला। जब अनुराग ने फिल्म में काम करने का आफर दिया तो चाह कर भी मना नही कर पायी।
 यह सब क्या अचानक हुआ ?
जी। दरअसल,अनुराग जी हमेशा से ही मेरे प्रिय निर्देशक रहे हैं। वह हमेशा से ही चाहते थे कि मैं उनके साथ फिल्मों में काम करूं। मैंने उनकी दो फिल्मों में काम करना स्वीकार किया है। 
जहां तक मुझे याद है, तो आखिरी बार आपने अनुराग के साथ में फिल्म शूल की थीं ?
जी हाॅ। राम गोपाल वर्मा की इस फिल्म में अनुराग कश्यप ने कहानी भी लिखी थी। जबकि इसके डारेक्टर ई निवास थे। 
बदलते समय के चलते एक की समकालीन हीरोईनस मे माधुरी और जूही ने भी सिल्बर स्क्रीन पर वापिसी की  इसको लेकर क्सा सोचती है ?
माधुरी जूही का वापिसी पर मुझे खुशी है वे गुलाब गंैग नामक सिल्बर स्क्रीन पर वापिसी कर रही है इस फिल्म की कहानी और उसमें उनके किरदार काफी मजबूत है। मैं ऐसी ही यादगार किरदार निभाने की चाह रखती हॅू।
Raveena Tandon
दो दशक से ज्यादा फिल्म इंडस्ट्री में आपने काम किया , कैसा रहा आपका यह सफर?
अब तक बहुत ही अच्छा रहा है और आगे भी अच्छा रहेगा। मैं उन भाग्यशाली लोगों में हूं, जो इस इंडस्ट्री की पैदाइश हैं। मेरे पिता फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े हुए हैं उन्हें इंडस्ट्री में करीब 50 साल हो गए। मेरी परवरिश यहां हुई और मैं जानती हूं कि एक दिन में इंडस्ट्री में ही अंतिम सांस लूंगी। हर फील्ड, हर लाइन में कुछ ऊंच-नीच तो रहती ही है, मैं लकी हूं कि मेरे आसपास के लोग- फ्रेंड, फैमिली, मजबूती से मेरे साथ खड़े रहे और आज भी खड़े हैं। मैं चाहूंगी कि आगे भी उनका साथ ऐसे ही मेरे साथ बना रहे।
अपनी इस कामयाबी में परिवार को श्रेय देना चाहेंगी?
मेरे अचीवमेंट्स में मेरे परिवार का जो सबसे बड़ा सहयोग रहा शुरुआत में मेरा परिवार नहीं जानता था कि मैं इंडस्ट्री में आऊंगी। लेकिन जब मैंने यह फैसला किया कि मुझे फिल्में करनी हैं तो उन्होंने पूरा सपोर्ट किया। मेरी कोशिश हमेशा बैलंस लाइफ जीने की कोशिश की है। कभी यह नहीं सोचा कि फिल्म इज माई लाइफ। दरअसल, फिल्में मेरी जिंदगी हैं, लेकिन यह मेरी जिंदगी का हिस्सा हैं।
अपने करियर के उतार-चढ़ाव के दौर में आप खुद को बूस्ट-अप करने के लिए क्या करती थीं?
 देखिए मुश्किल दौर में आपके साथ आपकी फैमिली होती है। पापा की सलाह हमेशा मेरे लिए काफी मायने रखती थी। पापा इस इंडस्ट्री से थे, उन्होंने भी काफी उतार-चढ़ाव देखे हैं। अप्स ऐंड डाउन तो होते ही हैं। इसकी लिए सब तैयार होते हैं। चढ़ते सूरज को हर कोई सलाम करता है। यह सिर्फ हमारी इंडस्ट्री में ही नहीं बल्कि हर जगह होता है। मुश्किल दौर में बस आपकी फैमिली का सपोर्ट होना जरूरी होता है क्योंकि यह ऐसा दौरा होता है जब आपको पता चलता है कि असल में आपका दोस्त कौन है और कौन आपके दोस्त नहीं हैं?
आपने कमर्शल फिल्म की हैं, साउथ की फिल्में की, टीवी शोज किए... कैसा रहा आपका अनुभव?
 साउथ की ही नहीं, मैंने मराठी ,बंगाली फिल्में भी की हैं। लैंग्वेज फिल्में करने का मेरा अनुभव बहुत ही अच्छा रहा है यह मेरे लिए गर्व की बात है। फिल्म एक ऐसा जरिया है जो हमेशा यूनिटिड रहता है।
कितनी भी पॉलिटिक्स क्रिएट करो लेकिन फिल्में अपने आर्ट और कल्चर से जुड़ी रहती है और कला सरहद की सीमाओं से जुड़ी नहीं है। इसके अलावा, टीवी शोज चक दे बच्चे,कामेडी का महामुकाबला,इटस माई लाइफ से जुडने का मौका मिला और मैंने बहुत ज्यादा इंजॉय किया। यह टाइम काफी अच्छा रहा। मेरे बच्चे काफी छोटे थे इसलिए हफ्ते में एक दिन की शूटिंग के शेड्यूल से मैं आसानी से फैमिली और बच्चों को पूरा टाइम दे पाई।
शादी के बाद मस्त-मस्त गर्ल व्यस्त-व्यस्त गर्ल हो गई, तो कैसे मैंनेज करती हैं?
 जी हां, शादी के बाद काफी व्यस्त शेड्यूल हो जाता है। अब मल्टि-टास्किंग करती हूं। बच्चों के क्लासेज भी याद रखने पड़ते हैं। कभी उन्हें स्विमिंग के लिए लेकर जाना होता है, कभी फुटबॉल, कभी टेनिस। बेटी कथक सीखती है तो वहां भी साथ जाती हूं। मां का रोल तो निभाना ही पड़ता है क्योंकि शादी के बाद प्रायॉरिटीज बदल जाती हैं। मुझे लगता है कि फिल्में जिंदगी भर आती-जाती रहेंगी पर बच्चों का बचपन फिर कभी वापस नहीं आएगा। मेरे लिए यही ज्यादा मायने रखता है।
फिल्मों के अलावा कौन-कौन से शौक हैं?
 म्यूजिक सुनना, खुद को रिलैक्स करने के लिए टीवी शोज देखती हूं। क्रिकेट का बहुत शौक नहीं, लेकिन अब पति और बेटे की वजह से देख लेती हूं। मुझे बच्चों के साथ टाइम बिताना ज्यादा पसंद है।
आप जायरा डायमंड की ओपनिंग में पहुंची कैसा लग रहा है ?
बहुत ही अच्छा मेहसूस हो रहा है,क्योंकि इसके एक पहले फैंचजाइज मे मुझे बुलाया था । अनिल अग्रवाल जी मेरे परिवार जैसे संबध है,इसलिए चाह कर भी ओपनिंग कार्यक्रम को स्थागित नही कर पाई। वैसे भी इस शो रूम में ढेरा डिजायन और विरायटी है,जिससे मैं प्रभावित रही हॅू । 


Thursday, January 8, 2015

कोई भी बन सकता है स्टाइलिश: स्याली भगत

(प्रेमबाबू शर्मा)
यारियांघोस्ट, द ट्रेन, हल्ला बोल, गुडलक, पेइंग गेस्ट, राजधानी एक्सप्रेस, और चालू मूवी जैसी अनेकों फिल्मों में अभिनय करने वाली एक्ट्रेस सयाली भगत मानती है कि कलाकार का सघर्ष कभी खत्म नही होता । इसमें दो राय नही कि सियाली को काम हमेशा मिलता रहा, लेकिन उन्हे खास पहचान नहीं मिल पाई। बीते दिनों सियाली गैलेक्सीज प्रोडक्शनस द्वारा आयोजित होने वाले एक कॉन्टेस्ट स्टाइलिश दीवा के एक कार्यक्रम में मुख्यातिथि के रूप में उपस्थित थीं। इसके अलावा सियाली भगत इन दिनों फिल्म होम स्टे अलाइवमें भी काम कर रही है। हाल में उनसे उनके करियर को लेकर हुई पेश है बातचीत के अंश !
आप होम स्टेफिल्म जुडी है इसके बारे में कुछ बताएं ?
यह एक ऐसी लडकी कहानी है,जिसके साथ चैबीस घंटों के दौरान क्या-क्या हादसे पेश आते हैं । यह एक थ्रिलर सस्पेंस फिल्म है। इस फिल्म में हॉरर एलिमेंट्स भी हैं।
फिल्म में आपका किरदार क्या  है ?
फिल्म में मैंने अक्षरा नामक एक टीवी एंकर के रोल को निभाया है, जो टीवी एंकर होने की वजह से यह लड़की इतनी क्यूरियस है। फिल्म में मेरे आपोजिट अष्मित पटेल भी है। जो एक पुलिस ऑफिसर है।
लेकिन पहले भी इससे मिलते कथानक पर भी आप फिल्म कर चुकी हैं?
हा, आप घोस्ट की बात कर रहे हैं तो वह एक अलग तरह की फिल्म थी। उसे आप एक कैरिकेचर फिल्म कह सकते हैं। लेकिन यह एक पैरानॉर्मल फिल्म है। मेरा मानना है कि भूतके बाद अभी तक इस जॉनर की अच्छी फिल्म नहीं आई है ।

दर्जनों फिल्में करने के बाद भी बतौर अभिनेत्री आपको जो पहचान मिलनी चाहिये, लेकिन नही मिल पायी।
बतौर कलाकार मैं अच्छा काम करने में विश्वास करती हॅू। वही मैने किया। रही बात पहचान की,आज भी मेरे पास फिल्मों के आफर है और वैसे मेरी हर साल एक दो हिन्दी फिल्म तो रिलीज हो ही रही हैं।
आपको ऐसा नही लगता कि किसी कलाकर फिल्म हिट हो जाती है तो आपको दूसरी जगह से भी अच्छा रिस्पांस मिलना शुरू हो जाता है आपको शोज और इवेंट्स मिलने लगते हैं?
आपका कहना सच है, लेकिन फिल्म हिट का कोई पैमाना भी नही है। फिल्मोघोग में न तो मेरा कोई यहां गॉड फादर रहा और न ही कोई बैक। इसलिये जीवन यापन के लिए मेरे जैसे कलाकारों का काम करते रहना जरूरी होता है। रही शोज और इवेंट्स की, वह मैं कर ही रही हॅू। हाल में स्टालिस वीवा इवेंट से बतौर जज जुडी हॅू।
बालीवुड के अलावा दूसरी भाषा की फिल्में का आफर मिले तो करोगी ?
डेफिनेटली। आज मैं पंजाबी और कन्नड़ फिल्मों में हाईपेड एक्ट्रेस हूं। लेकिन मुझे अपनी मातृभाषा की फिल्म में काम नहीं मिला। इस बात को लेकर मुझे हैरानी भी है कि अभी तक किसी मराठी डायरेक्टर का मेरी तरफ ध्यान क्यों नहीं गया। इसका मुझे दुख भी है। लेकिन और मुझे महाराष्ट्रीयन होने पर गर्व है।
स्टालिस वीवा से कैसे जुडी ?
स्टालिस वीवा के तरूण माथुर ने मुझे गलैक्सीज से जुडनें का आफर दिया और उसके बारे में जानकारी दी तो यह अच्छा आफर लगा और मैं चवाह कर भी इंकार नही कर पायी। स्टालिस वीवा कलाकारों और माॅडलों को एक ंमंच देने के लिए बना है। जिसके माध्यम से पूरे देश में शोज और इवेंट्स किये जाएगें।
स्टाइलिस बनने के लिए क्या जरूरी हैं ?
स्टाइलिश कोई भी बन सकता है परन्तु उसके लिए एक जुनून, जज्बा व कड़ी मेहनत बहुत जरूरी है।
मिस इंडिया ब्यूटी कान्टेस्ट के समय उन्हें कौन सा राउंड ज्यादा मुश्किल लगा?

राउंड तो सारे ही मुश्किल थे परन्तु मैंने बहुत ही पैसन्ट होकर उनका जवाब दिया।

Thursday, September 25, 2014

यार हुआ बेगानाः बीजेपी और शिवसेना में “तलाक“

लगातार बैठकों और काफी माथापच्ची के बाद भी बीजेपी-शिवसेना गठबंधन ग्रहण लग ही गया...दोनों पार्टियां अपनी-अपनी शर्तों पर अड़ी रही। नतीजन 25 साल पुराना याराना टूट गया। गुरूवार शाम बीजेपी ने आखिरकार साफ कर दिया कि बस...अब बहुत हो चुका...ये साथ यहीं तक था...बीजेपी ने गठबंधन तोड़ते हुए कहा है कि वो अपने छोटे दलों का साथ नहीं छोड़ेगी, लेकिन शिवसेना हर बार एक तरह के ही प्रस्ताव दे रही थी, जिसके चलते शिवसेना का साथ छोड़ दिया है।
BJP+SHIV SHENA


शिवसेना अपने फार्मूले 151:131:6 पर चुनाव लड़ना चाहती थी। यानि खुद 151, बीजेपी को 131 और अन्य दलों के लिए महज 6 सीटें ही दे रही थी, जबकि बीजेपी शिवसेना से वो सीटें मांग रही थी, जिन पर शिवसेना कभी जीती ही नहीं। साथ ही बीजेपी घटक दलों के लिए 18 सीटों की मांग कर रही थी। बैठकों के साथ-साथ दोनों पार्टियों के बीच रूठना-मनाना का ये खेल चलता रहा, मगर कोई परिणाम नहीं निकल सका। गठबंधन के छोटे सहयोगी दल भी 18 सीटों की मांग पर अड़े हुए हैं...सीटों के बंटवारे को लेकर चल रही रस्साकशी के बीच बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने अपना मुंबई दौरा भी रद्द कर दिया। शाह गुरूवार को मुंबई जाने वाले थे। गठबंधन की बरकरारी के लिए महाराष्ट्र बीजेपी के चुनाव प्रभारी ओम माथुर के घर पर बुधवार रात करीब दो बजे तक बैठक चली....मगर नतीजा वहीं ढाक के तीन पात ही रहा....
दूसरी तरफ, महाराष्ट्र में अभी कांग्रेस-एनसीपी के बीच विधानसभा चुनाव के लिए सीटों पर सुलह नहीं हुई है, लेकिन इसी दौरान कांग्रेस ने 118 कैंडिडेट्स की सूची जारी कर दी है।
CONGRESS + NCP

मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण और उनके कैबिनेट के कई अन्य मंत्रियों का नाम इस सूची में शामिल है। कांग्रेस उम्मीदवारों की घोषणा ऐसे समय की गयी है३३ जब शरद पवार की एनसीपी के साथ सीट साझेदारी पर कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है। वर्तमान में राज्य विधान परिषद के सदस्य चव्हाण को उनके गृह जिला सतारा में कराद दक्षिण सीट से प्रत्याशी बनाया गया है। उनके कैबिनेट के कई सहयोगी तथा वरिष्ठ नेताओं का सूची में नाम है जिनमें कुदाल से प्रचार कमिटी प्रमुख नारायण राणे, शिरडी से राधाकृष्ण विखे पाटिल, सांगमनेर से बालासाहेब थोराट हैं। लोकमान्य तिलक के प्रपौत्र रोहित दीपक तिलक को कांग्रेस ने पुणे शहर की कस्बा पेठ से उम्मीदवार बनाया है। पूर्व मुख्यमंत्री विलासराव देशमुख के पुत्र अमित देशमुख  को लातूर और पूर्व केंद्रीय गृहमंत्री सुशील कुमार शिंदे की पुत्री प्रणेति शिंदे को शोलापुर से चुनाव मैदान में उतारा गया है।

हालांकि नामांकन दाखिल करने के अंतिम तिथि 27 सितंबर है। कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी अभी तक सीटों के बंटवारे के मुद्दे पर किसी नतीजे पर नहीं पहुंच पाए हैं।

Wednesday, August 28, 2013

मुजफ्फरनगर में हिंसा

मुजफ्फरनगर :

जानसठ थाना क्षेत्र के कवाल में हुई तीन हत्याओं के मामले में दूसरे दिन भी गांव में सांप्रदायिक आग सुलगती रही। दो दर्जन मकानों में तोड़फोड़ की, आग लगा दी। लोगों ने जाम लगाकर दो बाइक फूंक डालीं। राहगीरों पर हमला बोल दिया, जिसमें एक महिला व बच्ची समेत पांच लोग घायल हो गए। पुलिस ने गोलियां हवा में दागीं और लाठियां फटकारकर लोगों को खदेड़ा। एडीजी कानून- व्यवस्था अरुण कुमार समेत तमाम आला अधिकारियों ने हालात पर बमुश्किल काबू पाया।
मलिकपुरा निवासी गौरव व सचिन और कवाल निवासी शाहनवाज की मंगलवार को कवाल में हत्या कर दी गई थी। मंगलवार की रात्रि पोस्टमार्टम के बाद हजारों लोग सचिन व गौरव के शवों को लेकर मलिकपुरा पहुंचे। शव देखते ही परिजनों में हाहाकार मच गया। मंजर देख लोगों में आक्रोश भर गया और वह कवाल गांव की ओर दौड़ लिए। कुछ लोगों ने उन्हें किसी तरह समझाकर अंतिम संस्कार कराया। इस दौरान तय हुआ कि 31 अगस्त को कवाल स्थित स्कूल में पंचायत कर आगे की रणनीति तय की जाएगी।
अंतिम संस्कार के बाद एक बार फिर भीड़ बेकाबू हो गई और कवाल की और बढ़नी शुरू हो गई। इस दौरान पुलिस बेबस रही। हजारों लोगों ने कवाल पहुंचते ही कई मकानों व दुकानों में जमकर तोड़फोड़ की। भीड़ ने कई राहगीरों को मारपीट कर घायल कर दिया। इस दौरान पुलिस ने करीब एक दर्जन हवाई फायर करते हुए जमकर लाठी भांजी। इसके बाद भीड़ तितर-बितर हुई।
तोड़फोड़ करती हुई भीड़ पानीपत-खटीमा राजमार्ग पर पहुंची और तीन जगह जाम लगा दिया। एक बस में तोड़फोड़ की, जिससे कई यात्री घायल हो गए। एक दंपती को मारपीट कर घायल कर दिया। लोगों ने दो अलग-अलग स्थानों पर वहां से गुजर रहे दो लोगों की बाइक फूंक दी। बस अड्डे के सामने स्थित एक मकान में आग लगा दी। पानीपत-खटीमा मार्ग पर एक दुकान को फूंक डाला। मारपीट में एक महिला और बच्ची समेत कुल पांच लोग घायल हो गए।
मौके पर पहुंचे बिजनौर भाजपा विधायक कुंवर भारतेंदु सिंह व भाजपा नेता संजीव बालियान आदि ने जाम लगा रहे लोगों को समझाया। इधर नेता लोगों को समझा रहे थे और उधर कुछ युवकों ने निकट ही एक झोपड़ी में आग लगा दी। एडीजी कानून-व्यवस्था अरुण कुमार, नवागत डीएम कौशलराज शर्मा, नवागत एसएसपी सुभाष चंद दुबे व एडीएम ई इंद्रमणि त्रिपाठी ने बमुश्किल हालात पर काबू पाया।

Friday, July 27, 2012

आज़ाद देश का गुलाम


आज भले ही देश को आज़ादी मिले 65 बरस बीत चुके हो लेकिन पिछले 15 बरसो से लोहे की बेडियों में जकड़े उमेश उर्फ़ काका को भी अपनी आज़ादी का इंतजार है की कब उसके पैरो की बेडियों को खोलकर उसे आज़ादी दिलाई जाएगी | लोहे की बेडियों में कैद उमेश को किसी अंग्रेजी हुकूमत ने कैद नहीं किया बल्कि उसके खुद अपने परिजनों की कैद में है | सड़क किनारे पर बनी इस झोपडी में ही दिन की शुरुआत करने वाले उमेश की रात भी इसी में गुजर जाती है जिसका उसे पता ही नहीं चलता | बूढ़े हो चुके माँ बाप भी अपने जिगर के इस टुकड़े से तंग आ चुके है | 
सवस्थ व्यक्ति के लिए मानसिक संतुलन का ठीक होना आवश्यक है | यदि किसी व्यक्ति का मानसिक संतुलन बिगड़ जाये तों उसका जीवन नर्क के सामान हो जाता है |कभी कभी ज्यादा तनाव या फिर ज्यादा ख़ुशी मिलने से भी व्यक्ति का मानसिक संतुलन बिगड़ जाता है | ऐसा ही हुआ  मुजफ़्फ़र नगर के फलोदा गाँव में पिछले 10 बरसो से उमेश उर्फ़ काका का मानसिक संतुलन ऐसा बिगड़ा की उलटी सीधी हरकते करने लगा जिससे गाँव के लोग ही नहीं बल्कि परिजन भी उसकी हरकतों से तंग आ गये जिसके चलते 15 सालो से उसे लोहे की जंजीरों में बांध कर रखा जाता है | दरअसल जंजीरों में जकड़ा उमेश 12 साल पहले स्वस्थ था और अपनी पत्नी चन्द्र किरण  व दो  बच्चो के साथ अपना जीवन व्यतीत कर रहा था |लेकिन उसके भाँग का नशा करने के शोक ने उसका जीवन नर्क कर दिया और उलटी सीधी हरकते करने लगा जिससे परेशान होकर पत्नी भी अपने बच्चो को लेकर उमेश को छोड़कर चली गयी | बूढ़े माँ बाप ने काफी इलाज कराया लेकिन सब व्यर्थ था | 
धीरे धीरे उमेश की उदंडता बढती गयी जिसपर परिजनों ने उसके पैरो में लोहे की बेडिया डाल दी | हाथो  में  लाठी और चेहरे पर झुर्रियों का जाल लिए ये बूढ़ा व्यक्ति बुधराम उमेश का पिता है जिसकी झील सी इन गहरी आँखों में गम के सिवा कुछ भी नहीं है ये रोना तों चाहता है शायद वक़्त के थपेड़ो और मुफलिसी ने इसके आँसुओ को सोख लिया है | हमेशा अपने बेटे के ठीक हो जाने के लिए इश्वर से प्रार्थना करता है वंही इस बात को भी स्वीकार करता है की अपने जिगर के इस टुकड़े को बरसो से जंजीरों में कैद कर रखा है | उमेश की माँ प्रेमो भी अपने इस लाल से तंग आ चुकी है उसका कहना है की जिस उम्र में उनकी सेवा बेटे को करनी चाहिए थी लेकिन आज इन बुधो को अपने जवान बेटे के सभी काम काज करने पड़ते है,आज उनके पास अपने बेटे के इलाज करने के पैसे भी नहीं है मुश्किल से दो वक़्त की रोटी गाँव से चलती है | गाँव वालो को नुकसान न पंहुचा दे इसी लिए उमेश को जंजीरों में जकड़ा गया है | अपने दुखी मान से उमेश की माँ भी अब अपने बेटे से अपना पीछा छुड़ाना चाहती है | वो  चाहती है की कोई भी इसे ऐसी जगह भर्ती करा दे जंहा उनका बेटा इलाज से सही हो सके |
ग्रामीण भी काका को जंजीरों में जकड़े रहने को गलत मानते है मगर मदद के लिए कोई सामने आने को तैयार नहीं है \ ग्राम प्रधान का कहना है की कई बार इनकी मदद के लिए आवाज उठाई  मगर उनकी लाचारी ओर गरीबी के चलते प्रशासन के कानो पर भी जू नहीं रेंगी | 
जिला चिकित्सा अधिकारी से जब इस युवक के बारे में पूछा गया तो उन्होंने जानकारी ना होने के साथ साथ हर संभव मदद की बात कही | खुद जिला चिकित्सा अधिकारी भी लम्बे समय से जंजीरों में जकड़े रहने के कारण कई गंभीर बिमारी हो जाने की संभावना जाता रहे है | साथ ही चिकित्सको द्वारा उमेश का मेडिकल जाँच कराकर आगे की कार्यवाही की बात कहते है | मुख्य चिकित्सा अधिकारी भी जंजीरों में इस तरह से किसी भी युवक को कैद में रखने को गैर कानूनी भी मानते है | 
आज भारत देश को आज़ाद हुये भले ही ६२ बरस हो चुके हो लेकिन उमेश के पैरो में पड़ी इन लोहे की बेडियों को देखकर लगता है की उमेश आज भी  आज़ाद देश का गुलाम है | हालाकि यह सिर्फ उसके मानसिक संतुलन ठीक न होने के कारण जिन बूढ़े माँ बाप को बुढ़ापे में अपने बेटे से सेवा करने का सहारा होता है आज वही माँ बाप अपने जवान बेटे का सहारा बने है और उसकी मन से सेवा कर रहे है | उन्हें इंतजार है उस फ़रिश्ते की जो उनके बेटे को सही जगह भर्ती कराकर उसका इलाज करा सके | 

- Amit Saini

Tuesday, December 20, 2011

अंधविश्वास : औलाद की चाहत में मासूम बच्ची की बलि


- कई टुकड़ो में बरामद हुआ बच्चा का शव
- तांत्रिक क्रियाओं के चलते दी गयी बलि
मुजफ्फरनगर। आस-औलाद की चाहत में आरोपियों ने चार साल की मासूम बच्ची की तांत्रिक क्रियाओं के चलते बलि दे दी गयी। जिसका खुलासा उस समय हुआ, जब पुलिस ने शक के आधार पर आरोपियों को पकड़कर  पूछताछ की तो ये सनसनीखेज मामला सामने आया। पुलिस ने आरोपियों की निशानदेही पर बच्चे के शव को कई टुकड़ो में बरामद कर पंचनामा भरा और पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। जबकि पुलिस ने चोरी-छिपे ही आरोपियों को जेल भेज दिया।
छपार थाना क्षेत्र के नंगला खोजा निवासी मोमीन की 4 वर्षीया बेटी मेविश गत 7 दिसम्बर को रहस्यमय परिस्थितियों में गायब हो गयी थी, जिसको परिजनों ने आसपास खूब तलाश किया, लेकिन बच्ची का जब कुछ अता-पता नहीं चल सका तो मजबूरन पीडि़तो को पुलिस से शिकायत करनी पड़ी। पुलिस ने मामला गुमशुदगी में दर्ज कर कार्रवाई आगे बढा दी, मगर परिजन इससे संतुष्ट नहीं हुए तो पुलिस ने मामले को अपहरण में दर्ज कर लिया और शक के आधार पर गांव के ही सकील को उसकी पत्नी महरूबी, पुत्रवधु महरूनी पत्नी हुसैन, बेटे तनवीर और कलीम को उठाकर पूछताछ करनी शुरू कर दी। पहले तो आरोपी पुलिस की आंखों में धूल झौंकते रहे, लेकिन जब पुलिस ने सख्ताई से पूछताछ की तो आरोपी टूट गये और उन्होंने सारा वाक्या पुलिस को कह सुनाया।
डेमो पिक्चर 
दरअसल सकील के तीन बेटे है मौहम्मद हुसैन, तनवीर और कलीम। तीनों ही शादीशुदा तो है, लेकिन किसी को भी औलाद पैदा नहीं हुई, जिस पर उक्त लोगों ने तमाम नीम-हकीम और डाक्टरों से अपना और अपनी पत्नियों का उपचार कराया, लेकिन कोई फायदा नहीं हो सका तो अंधविश्वास के चलते आरोपी तंत्र-मंत्र के चक्कर में फंस गये। आरोप है कि आरोपियों को किसी तांत्रिक ने मासूम बच्चे की बलि देने की सलाह दी, जिस पर आरोपियों ने गत 7 दिसम्बर को मासूम मेविश का अपहरण कर लिया और फिर उसकी बलि दे डाली। आरोपियों के मुंह से ये सब सुनकर पुलिस का भी कलेजा फटा का फटा रह गया। आनन-फानन में आलाधिकारियों के निर्देश पर आरोपियों की निशानदेही पर पुलिस ने सहारनपुर जनपद के देवबंद थाना क्षेत्र के केंदकी गांव के जंगल में संजय त्यागी के खेत में तलाश किया तो बच्ची का शव छ: टुकड़ों में बरामद हो गया। सूत्रों की माने तो मौके से तांत्रिक क्रियाओं का भी सामान बरामद किया गया। पुलिस ने शव को पंचनामे के बाद पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।
बताया जाता है कि जैसे ही मामला आलाधिकारियों के संज्ञान में आया, वैसे ही पुलिस अधिकारियों द्वारा निर्देशित छपार पुलिस ने आनन-फानन में मामले को नर बलि से रंजिश की ओर मोड दिया तथा लिखा-पढी में मामला रंजिश का बताते हुए आरोपियों को जेल भेज दिये गये। ये भी बताया जा रहा है कि धर-पकड़ की सुचना मिलते ही हुसैन घबराकर दो दिन पहले ही कोर्ट के पेश होकर जेल जा चुका है, जबकि ये भी बताया जा रहा है कि इससे पहले भी आरोपीगण करीब चार वर्ष पूर्व गांव के ही रिजवान के चार वर्षीय बेटे मुसाहिद की बलि दे चुके है, जिसके खुलासे के बाद पुलिस ने आरोपियों को पकडकर जेल भेजा था, मगर बच्चे की चाह में इस बार फिर से आरोपियों ने इस खौफनाक वारदात को अंजाम दे डाला।


अमित सैनी
मुज़फ्फरनगर

Monday, December 19, 2011

फिरौती न देने पर दो किसानों की हत्या

मुजफ्फरनगर : जुर्म की दुनिया का बेताज बादशाह

- दो-दो लाख रूपये की मांगी गई थी फिरौती
- 7 दिसम्बर को किया गया था दोनों का अपहरण
मुजफ्फरनगर।
दो-दो लाख रूपये की फिरौती न देने पर बदमाशों ने अपहृत दो किसानों की गोली मारकर हत्या कर दी और उनके शवों को गन्ने के खेत में फेंक दिया, जिसका खुलासा उस समय हुआ जब पुलिस ने सर्विलांस की मदद से एक बदमाश को दबोच लिया, जिनसे पूछताछ में सारी घटना का खुलासा कर दिया। पकडे गये बदमाश की निशानदेही पर पुलिस ने दोनों किसानों के शवों को बरामद कर लिये, जिनको पंचनामे के बाद पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया, जबकि मामले की गंभीरता को देखते हुए गांव में भारी पुलिस बल तैनात किया गया है।
दरअसल पुरकाजी थाना क्षेत्र के नंगला दुहेली ग्राम निवासी 3० वर्षीय किसान ज्ञानसिंह पुत्र महावीर तथा 48 वर्षीय किसान राजपाल पुत्र चंद्रभान गत 7 दिसम्बर को घर से फसलों में डालने के लिए खाद लेने के लिए पुरकाजी कस्बे के लिए साईकिलों पर निकले थे, लेकिन देर शाम तक भी जब दोनों किसान वापिस घर नहीं पहुंचे तो परिजनों को चिंता सताने लगी, जिस पर परिजनों की ओर से पुलिस से शिकायत की गयी। छानबीन के दौरान दोनों किसानों की साईकिले क्षेत्र के तेजलहेड़ा और खाईखेड़ी गांव के जंगल से लावारिस अवस्था में पड़ी हुई मिल गयी, जबकि पुलिस ने तहरीर के अनुसार मामला गुमशुदगी में दर्ज कर कार्रवाई शुरू कर दी।

9 दिसम्बर को दोनों किसानों के परिजनों के मोबाईलों पर एक ही नम्बर से बदमाशों ने फोन करके दो-दो लाख रूपये की फिरौती मांगी, जिसकी सूचना परिजनों ने तत्काल ही पुलिस को दी, जिस पर पुलिस ने कथित मोबाइल नम्बर को सर्विलांस के जरिये ट्रेस किया और सोमवार को पुलिस ने भोपा थाना क्षेत्र के सीकरी ग्राम निवासी कलीम को धर-दबोचा, जिसने पूछताछ के दौरान पुलिस के सामने अपराध करना कुबूल करते हुए बताया कि उक्त ने अपने साथियों के साथ मिलकर दोनों किसानों का तेजलहेडा और खाईखेडी गांव के बीच अपहरण किया था, जबकि फिरौती न मिलने तथा पुलिस को सूचना देने पर उन्होंने दोनों की गोली मारकर हत्या कर दी थी। पुलिस ने कलीम की निशानदेही पर छपार थाना क्षेत्र के दतियाना गांव के जंगल से एक गन्ने के खेत से किसान ज्ञान सिंह और राजपाल के गोली लगे शव बरामद कर लिये। एक की जहां खोपडी में गोली मारी गयी थी, वहीं दूसरे की छाती को निशाना बनाया गया था। पुलिस ने दोनों शवों को कब्जे में लेकर पंचनामा भरा और पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। मामले की गंभीरता को देखते हुए गांव में भारी पुलिस बल तैनात किया गया है, जबकि पकडे गये बदमाश के अन्य साथियों को तलाश किया जा रहा है।
 
 
अमित सैनी
मुज़फ्फरनगर

Saturday, December 17, 2011

....मुजफ्फरनगर में लगा लाशों का ढेर

- कहीं पर हादशा तो कहीं पर वारदात के शिकार हुए मृतक
- बार्डर पर तैनात बीएसएफ का जवान हुआ पश्चिमी बंगाल में शहीद
मुजफ्फरनगर।
कहते है कि मौत कभी बताकर नहीं आती, वो कहीं भी और कभी भी बिन बताये जा पहुंचती। बहाने केवल अलग-अलग होते है, मगर जब आती है तो अपने पीछे दहशत और खौफ के अलावा कुछ नहीं छोड जाती। मुजफ्फरनगर के ग्यारह लोगों को अलग-अलग स्थानों पर मौत को लगे लगाना पड़ा। कोई हादशे का शिकार हुआ तो कोई वारदात में मारा गया, जबकि एक बीएसएफ का जवान भी पंश्चिमी बंगाल में शहीद हो गया, जबकि एक जवान अपनी पत्नी सहित हादशे का शिकार हो गया। इतना ही नहीं दो अलग-अलग स्थानों पर छ: लोग भी सड़क हादशों का शिकार होकर काल का ग्रास बन गये, जबकि इन हादशों और वारदातों में कई लोग बुरी तरह से घायल भी हुए, जिनको विभिन्न अस्पतालों में उपचार हेतु भर्ती कराये गये है।




कैराना। क्षेत्र के ग्राम पंजीठ निवासी विनोद कुमार सैनी श्रीनगर में केन्द्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल में चालक के पद पर तैनात था। गत दिवस उसके परिवार में उसके भाई के बच्चे की हुई मौत का समाचार सुनकर विनोद छुट्टी लेकर अपनी पत्नी अनीता देवी व बच्चे को साथ लेकर श्रीनगर से कैराना के लिए चला था। पंजाब प्रदेश के पठानकोट शहर के निकट कोहरे के कारण हुए सड़क हादसे में विनोद एवं उसकी पत्नी अनीता की मौके पर ही मृत्यु हो गयी तथा बच्चे गंभीर रूप से घायल हो गये, जिन्हें राहगीरों ने निकट के चिकित्सालय में भर्ती कराकर उनके परिजनों को सूचना दी। सूचना मिलने पर मृतक विनोद का भाई मदन सैनी व अन्य ग्रामीणों के साथ मौके पर पहुंचे और विनोद व उसकी पत्नी का शव और घायल बच्चे का शव लेकर कैराना पहुंचे। उक्त दु:खद दुर्घटना के समाचार से हर ओर कोहराम मच गया तथा शनिवार को ग्राम पंजीठ में विनोद व उसकी पत्नी अनिता का जब दाह-संस्कार किया गया, तो सभी हिन्दू-मुस्लिम हजारों लोगों की आंखे रो उठी। सभी ने आंसू भरी आंखों से विनोद व उसकी पत्नी को अन्तिम विदाई दी।

खतौली। कोतवाली क्षेत्र के ग्राम केलावडा निवासी मुवासी पुत्र संगत के भाई लाल सिंह के कोई औलाद नही थी। लाल सिंह मरने से पूर्व पौने तीन बिघा जमीन व मकान की वसीयत मुवासी के नाम कर गया था। लाल सिंह की मौत के बाद इसके साले की लड़की माला के पति हरेन्द्र ने मकान व जमीन पर कब्जा कर लिया। वसीयत में चले मुकदमे में मुवासी जीत गया। लेखपाल ने जमीन व मकान पर कब्जा करा दिया था। मकान व जमीन चले जाने से क्षुब्ध हरेन्द्र व उसके पुत्र गौरव, टीटू, अभिषेक ने विगत रात्रि विजयपाल पर धारदार हथियारों से हमला कर घायल कर दिया था। सूचना मिलने पर पहुंची पुलिस ने घायल विजयपाल को इलाज हेतू सीएचसी पर भर्ती कराया। चिकित्सकों ने प्राथमिक उपचार देकर मुजफ्फरनगर रैफर कर दिया था। शनिवार की सुबह विजयपाल को चिकित्सकों ने मेरठ के लिए रैफर किया था, लेकिन मेरठ जाते समय विजयपाल की मौत हो गयी। परिजन शव को लेकर कोतवाली पहुंचे। पुलिस ने मृतक के शव का पंचनामा भरकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। मृतक के पुत्र मिन्टू द्वारा दी गयी तहरीर पर पुलिस ने गैर इरादतन हत्या करने का मुकदमा दर्ज कर लिया। पुलिस ने एक आरोपी गौरव को पकड़कर थाने बैठा लिया है। पुलिस हरेन्द्र, टिटू, अभिषेक की तालश में दबिशे दे रही है।

शामली (प्रबुद्घनगर)। मुंबई से आए अपने दोस्त को लेकर वापस लौट रहे कस्बा बनत के चार युवकों की इंडिको गाडी की डीजल टैंकर के साथ भिडंत के बाद गाडी में आग लगने से जिंदा जलकर दर्दनाक मौत हो गयी। उक्त घटना से कस्बा बनत में शोक की लहर दौड गयी है। सायं के समय जैसे ही तीन शव कस्बे में पहुंचे, म्रतकों के परिजनों के करूण रूद्रन से माहौल बेहद गमगीन हो गया जबकि चौथा शव उसके परिजन मुंबई ले गये। आदर्श मंडी थाना क्षेत्र के कस्बा बनत निवासी विशाल शर्मा उर्फ बंटी पुत्र श्रीपाल मौहल्ला पटेलनगर में अपने चाचा राजेन्द्र के पास रह रहा था। उसके पिता की स्टील फैक्टरी है। बताया जाता है कि बंटी मुंबई से दिल्ली हवाई जहाज द्वारा पहुंचा था और उसे एयरपोर्ट से लाने के लिए बनत निवासी उसके दोस्त उसे इंडिगों कार एचआर-१५-३११३ में लेने के लिए गए थे। गाडी १९ वर्षीय सरू उर्फ सरफराज पुत्र अख्तर निवासी दक्षिण प्रेमनगर बनत की थी और वह खुद ही गाडी चला रहा था जबकि उसके साथ जोया उर्फ दीया ,२२, वर्षीय पुत्र सैय्यद धम्मो मौहल्ला हकीकतनगर बनत, नटवर उर्फ नीटू पुत्र सतेन्द्र प्रतापनगर बनत गए थे। तीनों दोस्त बंटी को एयरपोर्ट पर रिसीव करने के बाद जब गाडी लेकर वाया सोनीपत-पानीपत होते हुए शामली आ रहे थे तो पानीपत और सिम्भालका के बीच एक मोड पर सामने से आ रहे ईंटों से भरे ट्रक से बचने के प्रयास में जैसे ही सरफराज ने गाडी मोडी तो उसकी भीषण टक्कर वहां से गुजर रहे एक डीजल के टैंकर से हो गयी, टक्कर इतनी जोरदार थी कि इंडिगों पलट गयी और पलटते ही उसमें आग लग गयी। गाडी अत्याधुनिक व कंप्यूटराइज्ड होने के कारण बिना रिमोट के उसके खिडकी व शीशे नहीं खुल पाए जिससे सभी गाडी के अंदर बुरी तरह झुलस गए। गाडी गाडी चालक सरफराज ने किसी तरह शीशे तोडकर शोर मचाया और दुर्घटना के बाद मौके पर पहुंची फायर ब्रिगेड ने आग पर काबू पाकर सबसे पहले सरफराज को गाडी से बाहर निकला। उस समय केवल उसी की संासें चल रही थी। जबकि शेष तीनों गाडी इस कदर जल चुकी थी कि उनकी शिनाख्त भी नहीं हो पा रही थी। सरफराज को उपचार के लिए एक निजी चिकित्सालय में ले जाया गया जहां उपचार के दौरान उसकी भी मौत हो गयी। मरने से पूर्व सरफराज ने अपने व अपने साथियों के बारे में पुलिस को जानकारी दी जिस पर पानीपत पुलिस ने शामली पुलिस व बनत में उसके परिजनों को घटना की जानकारी दी। कस्बे के चार जवान युवकों की मौत की सूचना मिलते ही बनत मे शोक की लहर दौड गयी और भारी संख्या में लोग उनके आवासों पर शोक जताने के लिए एकत्र हो गए। काफी संख्या में लोग मृतकों के शव पानीपत से लाने के लिए रवाना हुए। सायंकाल जैसे ही तीन शव कस्बे में पहुंचे, गमगीन परिजनों का सब्र टूट गया और उनके दहाडे मारकर करूण रूद्रन से माहौल बेहद गमगीन हो गया। बंटी का शव पोस्टमार्टम हाउस पर ही छोड दिया गया क्योकि उसके परिजन उसका शव मुबंई लेकर जायेंगे। मृतक सरफराज जहंा अपनी ही इंडिगो कार पर चालक था वहीं नीटू कृषि कार्य करता था।

जानसठ । पानीपत खटीमा हाइवे पर धागा फैक्ट्री के पास घने कोहरे के कारण तेज गति से चल रही डीसीएम आगे जा रहे ट्रक से जा टकराई। भीषण टक्कर से डीसीएम के परखच्चे उड़ गए। जिसमें सवार दो मजदूरों की मौके पर ही मौत हो गर्ई तथा चालक सहित चार अन्य मजदूर गंभीर रूप से घायल हो गए। गंभीर अवस्था में घायल एक मजदूर को मेरठ रेफर किया गया है।

शनिवार की सुबह गांव नवादा से डीसीएम गाड़ी में बैठकर थाना सरधना क्षेत्र के गांव सबदलपुर निवासी सलीम पुत्र इसमाइल, गांवं खिवाई निवासी अबरार पुत्र इसरार, नोशाद पुत्र तरीखत, गांव नवादा निवासी दिलशाद पुत्र अली हसन, रिजवान पुत्र युनुस, गांव हरसोपुर निवासी बाबूराम पुत्र रामपाल खोई लेने के लिए चांदपुर जा रहे थे। सुबह करीब छह बजे पानीपत खटीमा हाइवे पर धागा फैक्ट्री के पास आगे जा रहे ट्रक में पीछे से डीसीएम टकरा गई। जबदस्त टक्कर लगने से डीसीएम के आगे का हिस्सा पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गए। उसमें सवार सभी लोग दब गए। चींखने चिल्लाने की आवाज सुनकर वहां से गुजरने वाले अन्य वाहनों के चालकों ने पुलिस को सूचना दी। सूचना मिलने पर मौके पर पहुंची पुलिस खिड़की काटकर सभी घायल लोगों बाहर निकाला। जिनमें से सलीम और अबरार की मौत हो चुकी थी। पुलिस चारों घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया। जहां पर गंभीर अवस्था में घायल नोशाद को मेरठ के लिए रेफर किया गया है। पुलिस ने मृतक लोगों को पोस्टमार्टम के लिए भेजा।


जानसठ/सिखेड़ा। पश्चिम बंगाल में डयूटी के दौरान बीएसएफ के जवान की अचानक हार्टअटैक से मौत हो गई। जवान की मौत को लेकर पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई। शनिवार की सुबह गमगीन माहौल में जवान के शव का अंतिम संस्कार किया गया। इस दौरान बीएसएफ के जवानों ने अपने साथी को अंतिम सलामी दी। अंतिम संंस्कार में कोई भी प्रशासनिक अधिकारी नहीं पहुंचा।

थाना सिखेड़ा क्षेत्र के गांव फहीमपुर निवासी बलबीर सिंह के ४५ वर्षीय पुत्र प्रमोद कुमार सन् १९८९ में बीएसएफ में भर्ती हुआ था। फिलहाल उसकी तैनाती पश्चिम बंगाल के बालूघाट पर थी। शुक्रवार को डयूटी के दौरान अचानक हार्टअटैक आने से प्रमोद की मृत्यु हो गई। बीएसएफ के कमांडर ने इसकी सूचना उसके परिजनों को फोन पर दी। प्रमोद की मौत की खबर सुनते ही परिवार में कोहराम मच गया। प्रमोद की मौत से पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई। शुक्रवार की देर रात्रि को बीएसएफ के जवान मृतक प्रमोद का शव लेकर गांवं फहीमपुर पहुंचे। शनिवार की सुबह सवेरे प्रमोद के शव का अंतिम संस्कार कर दिया गया। अंतिम संस्कार करते समय ग्रामीणों की आंखे नम हो गई। ग्रामीणों का कहना था कि देशवासियों की रक्षा करने वाला एक जवान हमको छोड़ कर चलाया गया। शमशान में बीएसएफ के जवानों ने अपने साथी को सलामी देकर अंतिम विदाई दी। जवान के अंतिम संस्कार के मौके पर कोई भी प्रशासनिक अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा। जबकि पुलिस मौके पर मौजूद रही। प्रशासनिक अधिकारी के मौके पर नहीं पहुंचने को लेकर ग्रामीणों में रोष व्याप्त है।

मुजफ्फरनगर। मूल रूप से ककरौली निवासी धर्मवीर पुत्र लेखराम हाल में नई मण्डी कोतवाली क्षेत्र के सुभाषनगर में रह रहा था, जबकि वह खाईखेड़ी शुगर मिल में बॉयलर एटेंडेंट के रूप में कार्यरत था। बताया जाता है कि रोजाना की भांति शनिवार को भी वह मिल में गया, जहां पर अचानक से वह बॉयर की चेन में आकर बुरी तरह से घायल हो गया, जिसको तत्काल ही मिल प्रबंधन अपनी बिना नम्बर की न्यू ब्राडेंड बुलेरो कार द्वारा जिला चिकित्सालय ले जाया गया, लेकिन चिकित्सकों ने उसको गंभीर अवस्था के चलते तुरंत ही मेरठ अथवा दिल्ली ले जाने की सलाह दी, जिस पर मिल प्रबंधन बजाय उसको मेरठ ले जाने के चिकित्सालय के बाहर आकर खडे हो गये और पाल धर्मशाला के पास बुलेरो कार खड़ी करके घंटों तक विचार-विमर्श करते रहे, जिसके चलते धर्मवीर ने तडफ़ते हुए वहीं पर दम तोड़ दिया। संदिग्ध परिस्थितियों में इस तरह से कार खड़ी होना देख लोगों को संदेह हुआ तो कुछ लोगों ने कार के अंदर झांककर देखा तो उसके अंदर लाश पड़ी होना देख शोर मचा दिया, जिसक चलते आरोपी कार को लेकर रूड़की चुंगी की ओर दौड़ पड़े, मगर लोगों ने उनका वहां भी पीछा नहीं छोड़ा और कई लोगों ने जहां कार का पीछा करना शुरू कर दिया, वहीं इस सम्बंध में तत्काल ही पुलिस को भी सूचना दी। आरोप है कि आरोपीगण रूडकी रोड पर स्थित एक आर्युवेदिक अस्पताल के पास कार को छोड़कर फरार हो गये, जबकि सूचना मिलते ही एसपी सिटी केबी सिंह, सीओ सिटी शिवराम यादव मय पुलिस फोर्स के मौके पर जा पहुंचे, जिन्होंने शव को अपने कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।

इन्सान की अनुभूति किसी भी कला की जन्मदाता है: बिजेन्द्र शर्मा

नई दिल्ली! (Prem Babu Sharma)
प्रेम एक ऐसा कांटा है जिसमे पराया दर्द ही मिलता है, पर जब यह मिलता है तो इससे फूलो की खुशबू झरती है। यह कविता नही, चित्रो के कुछ नमूने है, जिन्हे अपनी कल्पना और रंगो के माध्यम से कलाकार विजेन्द्र शर्मा ने कैनवास पर उकेरा है। जिनकी उंगलियों में कमाल का जादू है, जब वे रंग और बर्श से कैनवास पर चित्र उकेरते है तो उसमें पूरी तरह डूब जाते है। यही वजह है की उनकी कृति वास्तविकता के काफी करीब और संजीव प्रतीत होती है। विजेन्द्र शर्मा कैनवास पर जीवन, मृत्यु, सधंर्ष, अध्यात्म और प्रकृति को ही चित्रित नही करते, बल्कि सामाजिक कुरीतियो और भष्ट्राचार को उकेर कर सामाजिक दायित्व का भी निर्वाह करते है, इनकी कला के प्रशंसको में बिरला अम्बानी ग्रुप, अभिनेता अमिताभ बच्चन के अलावा भारत के पूर्व राष्ट्रपति डा0 ए.पी.जे. अब्दुल कलाम प्रमुख है, डा.कलाम जब भारत के राष्ट्रपति थे तब इन्होने अपना स्वंय का पोट्रेट विजेन्द्र शर्मा से बनवाया था।
दिल्ली में जन्मे और दिल्ली कालेज आॅफ आर्टस से स्नातक और गोल्ड मेडलिस्ट विजेन्द्र के लिए यह गौरव की बात है। विजेन्द्र कहते है कि यहाँ तक पहुचने के लिए मुझे बहुत संधर्ष करना पड़ा, शुरुआत में किताबों आदि का कवर डिजाईन किया उसके बाद महाभारत, रामायण, विक्रम बेताल जैसे चर्चित सीरियल के लिए पेटिंग बनाई,
विजेन्द्र की पहली एकल प्रदर्शनी दिल्ली की श्रीधारणी आर्ट गैलरी में लगी। इसके बाद इन्होनें कभी पीछे मुड़कर नही देखा। देश और विदेशो में कई शोज हो चुके है। इस कला यात्रा के दौरान उन्हे कई पुरस्कार और सम्मानो के नवाजा गया जिसमे साहित्य कला परिषद सम्मान, आल इण्डिया पुलिस मीट सम्मान, पं0 रविशंकर अवार्ड आदि प्रमुख है। कलाकार विजेन्द्र शर्मा का मानना है कि इन्सान की अनुभूति किसी भी कला की जन्मदाता है। चित्रकला के माध्यम से इन्सान अपनी सवेदंनाओ की अभिव्यक्ति करता है, दिल्ली में जल्द ही प्रदर्शित होने वाली इस प्रदर्शनी में कलाकार विजेन्द्र शर्मा ने अपने देश के समाज और अध्यात्म को प्रभावशाली विषय बनाकर कैनवास पर विभिन्न रंगो से आकार देने की कोशिश की है।

Friday, December 16, 2011

एक और उद्यमी का सूर्यास्त : जेल में बंद धर्मदास जैन की मौत

- दहेज हत्या के मामले में सजायेआफ्ता
- मृतक कैदी था रेनबो स्टील का साझेदार
मुजफ्फरनगर।
जिला कारागार में उम्र कैद की सजा काट रहे उद्यमी की खून की कमी के चलते जिला चिकित्सालय में मौत हो गयी, जो कि दहेज हत्या के मामले में अपने तीनों बेटो सहित जेल में बंद थे, जबकि हाल ही में उनकी पत्नी को पैरोल पर छोड़ा गया था। मृतक रेनबो स्टील के मालिकों में से एक थे। पुलिस ने शव का पंचनामा भरकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।
जानी-मानी 'रेनबो स्टीलÓ के साझेदार नगर कोतवाली क्षेत्र के रेनबो विहार मौहल्ला निवासी धर्मदास जैन पुत्र मांगेराम के बेटे संजीव जैन की शादी सहारनपुर निवासी अल्पना के साथ हुई थी, जिसने सन् 1998 में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी, जिस पर अल्पना के परिजनों की ओर से दहेज हत्या का मामला दर्ज कराया गया था, जिसके चलते पुलिस ने धर्मदास जैन सहित उसकी पत्नी मेमलता जैन, बेटे संजीव जैन, राजीव जैन और अजय जैन को गिरफ्तार करके जेल भेज दिया था। केश ट्रायल पर आया तो जज ने दोनों पक्षों की सुनने के बाद कथित आरोपियों को दोषी करार देते हुए 4 अक्टूबर, सन् 2०1० में उम्र कैद की सजा सुना दी। बताया जाता है  हाल ही में उनकी पत्नी मेमलता को पैरोल पर छोडा गया था, जबकि 75 वर्षीय धर्मदास अपने तीनों बेटो सहित जेल में सजा काट रहे थे।
सूत्रों की माने तो पिछले कुछ दिनों से धर्मदास जैन खून की कमी की बिमारी से जूझ रहे थे, जिसके चलते उनको जेल के अस्पताल में भर्ती कराया गया था, मगर जब उनकी हालत बद से बदतर होती चली गयी तो उनको बृहस्पतिवार को जिला चिकित्सालय में भर्ती कराया गया, जहां पर उनको गत शाम उनको अस्पताल में ही एक बोतल खून चढाया गया था, जिसके चलते उनकी हालत में धीरे-धीरे सुधार भी होने लगा था। इतना ही नहीं सुबह सवेरे उन्होने अच्छी तरह से बातचीतों के अलावा कस्टडी के लिए तैनात सिपाहियों से हंसी-ठिठौली भी काफी दे तक की थी, जबकि उनकी पत्नी मेमलता उनको चाय अथवा कॉफी पीने के लिए कहने लगी तो उन्होंने पीने से इंकार कर दिया, मगर करीब साढे आठ बजे के लगभग उनको दम तोड़ दिया, जिसकी सूचना मिलते ही जेल प्रशासन में हड़कम्प मच गया। आनन-फानन में जेल अधिकारी अस्पताल पहुंचे, जबकि सूचना मिलते ही मृतक की पत्नी एवं बेटी-दामाद मौके पर जा पहुंचे। पुलिस ने शव का पंचनामा भरकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। ज्ञात रहे कि रेनबो स्टील में धर्मदास के अलावा पूर्व मंत्री विद्या भूषण भी साझेदार थे।
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Friday, January 30, 2015

यादगार ही किरदार करने की चाहः रवीना टंडन

(प्रेमबाबू शर्मा )
बॉलीवुड की मस्त-मस्त गर्ल रवीना टंडन फिर से सिल्वर स्क्रीन पर अपना जलवा बिखेरने जा रही हैं। रवीना ने शादी के बाद फिल्मों में काम करना काफी हद तक कम कर दिया है। लेकिन उनकी चाह है कि अब केवल यादगार ही किरदार करना चाहती है। उन्होंने बुढा होगा तेरा बाप और शोभना 7 नाइट्स में विवाह के बाद देखा गया। एक फिल्म बोम्बे वेलवेट में भी काम किया लेकिन फिल्म कब रीलिज होगी इस बारे में रवीना को भी नही पता। सिल्वर स्क्रीन पर एक फिर से आने का मन बना लिया है और अब रवीना अनुराग कश्यप की दो फिल्में में अपना जलवा दिखाती नजर आएगीं। हाल में वह दिल्ली में जायरा डायमंड शो रूम की ओपनिंग में पहुंची इसी दौरान उनसे मुलाकात हुई पेश प्रस्तुत मुलाकात के चंद अंश ।
शादी के पांच के बाद सिल्वर स्क्रीन पर एक फिर से आने का मन बना लिया कैसा लग रहा है ?
अच्छा लग रहा है कला एक ऐसा कीडा है जिसे कलाकार चाह कर भी नही भुला सकता है। लेकिन पंाच कैसे बीते पता ही नही चला। जब अनुराग ने फिल्म में काम करने का आफर दिया तो चाह कर भी मना नही कर पायी।
 यह सब क्या अचानक हुआ ?
जी। दरअसल,अनुराग जी हमेशा से ही मेरे प्रिय निर्देशक रहे हैं। वह हमेशा से ही चाहते थे कि मैं उनके साथ फिल्मों में काम करूं। मैंने उनकी दो फिल्मों में काम करना स्वीकार किया है। 
जहां तक मुझे याद है, तो आखिरी बार आपने अनुराग के साथ में फिल्म शूल की थीं ?
जी हाॅ। राम गोपाल वर्मा की इस फिल्म में अनुराग कश्यप ने कहानी भी लिखी थी। जबकि इसके डारेक्टर ई निवास थे। 
बदलते समय के चलते एक की समकालीन हीरोईनस मे माधुरी और जूही ने भी सिल्बर स्क्रीन पर वापिसी की  इसको लेकर क्सा सोचती है ?
माधुरी जूही का वापिसी पर मुझे खुशी है वे गुलाब गंैग नामक सिल्बर स्क्रीन पर वापिसी कर रही है इस फिल्म की कहानी और उसमें उनके किरदार काफी मजबूत है। मैं ऐसी ही यादगार किरदार निभाने की चाह रखती हॅू।
Raveena Tandon
दो दशक से ज्यादा फिल्म इंडस्ट्री में आपने काम किया , कैसा रहा आपका यह सफर?
अब तक बहुत ही अच्छा रहा है और आगे भी अच्छा रहेगा। मैं उन भाग्यशाली लोगों में हूं, जो इस इंडस्ट्री की पैदाइश हैं। मेरे पिता फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े हुए हैं उन्हें इंडस्ट्री में करीब 50 साल हो गए। मेरी परवरिश यहां हुई और मैं जानती हूं कि एक दिन में इंडस्ट्री में ही अंतिम सांस लूंगी। हर फील्ड, हर लाइन में कुछ ऊंच-नीच तो रहती ही है, मैं लकी हूं कि मेरे आसपास के लोग- फ्रेंड, फैमिली, मजबूती से मेरे साथ खड़े रहे और आज भी खड़े हैं। मैं चाहूंगी कि आगे भी उनका साथ ऐसे ही मेरे साथ बना रहे।
अपनी इस कामयाबी में परिवार को श्रेय देना चाहेंगी?
मेरे अचीवमेंट्स में मेरे परिवार का जो सबसे बड़ा सहयोग रहा शुरुआत में मेरा परिवार नहीं जानता था कि मैं इंडस्ट्री में आऊंगी। लेकिन जब मैंने यह फैसला किया कि मुझे फिल्में करनी हैं तो उन्होंने पूरा सपोर्ट किया। मेरी कोशिश हमेशा बैलंस लाइफ जीने की कोशिश की है। कभी यह नहीं सोचा कि फिल्म इज माई लाइफ। दरअसल, फिल्में मेरी जिंदगी हैं, लेकिन यह मेरी जिंदगी का हिस्सा हैं।
अपने करियर के उतार-चढ़ाव के दौर में आप खुद को बूस्ट-अप करने के लिए क्या करती थीं?
 देखिए मुश्किल दौर में आपके साथ आपकी फैमिली होती है। पापा की सलाह हमेशा मेरे लिए काफी मायने रखती थी। पापा इस इंडस्ट्री से थे, उन्होंने भी काफी उतार-चढ़ाव देखे हैं। अप्स ऐंड डाउन तो होते ही हैं। इसकी लिए सब तैयार होते हैं। चढ़ते सूरज को हर कोई सलाम करता है। यह सिर्फ हमारी इंडस्ट्री में ही नहीं बल्कि हर जगह होता है। मुश्किल दौर में बस आपकी फैमिली का सपोर्ट होना जरूरी होता है क्योंकि यह ऐसा दौरा होता है जब आपको पता चलता है कि असल में आपका दोस्त कौन है और कौन आपके दोस्त नहीं हैं?
आपने कमर्शल फिल्म की हैं, साउथ की फिल्में की, टीवी शोज किए... कैसा रहा आपका अनुभव?
 साउथ की ही नहीं, मैंने मराठी ,बंगाली फिल्में भी की हैं। लैंग्वेज फिल्में करने का मेरा अनुभव बहुत ही अच्छा रहा है यह मेरे लिए गर्व की बात है। फिल्म एक ऐसा जरिया है जो हमेशा यूनिटिड रहता है।
कितनी भी पॉलिटिक्स क्रिएट करो लेकिन फिल्में अपने आर्ट और कल्चर से जुड़ी रहती है और कला सरहद की सीमाओं से जुड़ी नहीं है। इसके अलावा, टीवी शोज चक दे बच्चे,कामेडी का महामुकाबला,इटस माई लाइफ से जुडने का मौका मिला और मैंने बहुत ज्यादा इंजॉय किया। यह टाइम काफी अच्छा रहा। मेरे बच्चे काफी छोटे थे इसलिए हफ्ते में एक दिन की शूटिंग के शेड्यूल से मैं आसानी से फैमिली और बच्चों को पूरा टाइम दे पाई।
शादी के बाद मस्त-मस्त गर्ल व्यस्त-व्यस्त गर्ल हो गई, तो कैसे मैंनेज करती हैं?
 जी हां, शादी के बाद काफी व्यस्त शेड्यूल हो जाता है। अब मल्टि-टास्किंग करती हूं। बच्चों के क्लासेज भी याद रखने पड़ते हैं। कभी उन्हें स्विमिंग के लिए लेकर जाना होता है, कभी फुटबॉल, कभी टेनिस। बेटी कथक सीखती है तो वहां भी साथ जाती हूं। मां का रोल तो निभाना ही पड़ता है क्योंकि शादी के बाद प्रायॉरिटीज बदल जाती हैं। मुझे लगता है कि फिल्में जिंदगी भर आती-जाती रहेंगी पर बच्चों का बचपन फिर कभी वापस नहीं आएगा। मेरे लिए यही ज्यादा मायने रखता है।
फिल्मों के अलावा कौन-कौन से शौक हैं?
 म्यूजिक सुनना, खुद को रिलैक्स करने के लिए टीवी शोज देखती हूं। क्रिकेट का बहुत शौक नहीं, लेकिन अब पति और बेटे की वजह से देख लेती हूं। मुझे बच्चों के साथ टाइम बिताना ज्यादा पसंद है।
आप जायरा डायमंड की ओपनिंग में पहुंची कैसा लग रहा है ?
बहुत ही अच्छा मेहसूस हो रहा है,क्योंकि इसके एक पहले फैंचजाइज मे मुझे बुलाया था । अनिल अग्रवाल जी मेरे परिवार जैसे संबध है,इसलिए चाह कर भी ओपनिंग कार्यक्रम को स्थागित नही कर पाई। वैसे भी इस शो रूम में ढेरा डिजायन और विरायटी है,जिससे मैं प्रभावित रही हॅू । 


Thursday, January 8, 2015

कोई भी बन सकता है स्टाइलिश: स्याली भगत

(प्रेमबाबू शर्मा)
यारियांघोस्ट, द ट्रेन, हल्ला बोल, गुडलक, पेइंग गेस्ट, राजधानी एक्सप्रेस, और चालू मूवी जैसी अनेकों फिल्मों में अभिनय करने वाली एक्ट्रेस सयाली भगत मानती है कि कलाकार का सघर्ष कभी खत्म नही होता । इसमें दो राय नही कि सियाली को काम हमेशा मिलता रहा, लेकिन उन्हे खास पहचान नहीं मिल पाई। बीते दिनों सियाली गैलेक्सीज प्रोडक्शनस द्वारा आयोजित होने वाले एक कॉन्टेस्ट स्टाइलिश दीवा के एक कार्यक्रम में मुख्यातिथि के रूप में उपस्थित थीं। इसके अलावा सियाली भगत इन दिनों फिल्म होम स्टे अलाइवमें भी काम कर रही है। हाल में उनसे उनके करियर को लेकर हुई पेश है बातचीत के अंश !
आप होम स्टेफिल्म जुडी है इसके बारे में कुछ बताएं ?
यह एक ऐसी लडकी कहानी है,जिसके साथ चैबीस घंटों के दौरान क्या-क्या हादसे पेश आते हैं । यह एक थ्रिलर सस्पेंस फिल्म है। इस फिल्म में हॉरर एलिमेंट्स भी हैं।
फिल्म में आपका किरदार क्या  है ?
फिल्म में मैंने अक्षरा नामक एक टीवी एंकर के रोल को निभाया है, जो टीवी एंकर होने की वजह से यह लड़की इतनी क्यूरियस है। फिल्म में मेरे आपोजिट अष्मित पटेल भी है। जो एक पुलिस ऑफिसर है।
लेकिन पहले भी इससे मिलते कथानक पर भी आप फिल्म कर चुकी हैं?
हा, आप घोस्ट की बात कर रहे हैं तो वह एक अलग तरह की फिल्म थी। उसे आप एक कैरिकेचर फिल्म कह सकते हैं। लेकिन यह एक पैरानॉर्मल फिल्म है। मेरा मानना है कि भूतके बाद अभी तक इस जॉनर की अच्छी फिल्म नहीं आई है ।

दर्जनों फिल्में करने के बाद भी बतौर अभिनेत्री आपको जो पहचान मिलनी चाहिये, लेकिन नही मिल पायी।
बतौर कलाकार मैं अच्छा काम करने में विश्वास करती हॅू। वही मैने किया। रही बात पहचान की,आज भी मेरे पास फिल्मों के आफर है और वैसे मेरी हर साल एक दो हिन्दी फिल्म तो रिलीज हो ही रही हैं।
आपको ऐसा नही लगता कि किसी कलाकर फिल्म हिट हो जाती है तो आपको दूसरी जगह से भी अच्छा रिस्पांस मिलना शुरू हो जाता है आपको शोज और इवेंट्स मिलने लगते हैं?
आपका कहना सच है, लेकिन फिल्म हिट का कोई पैमाना भी नही है। फिल्मोघोग में न तो मेरा कोई यहां गॉड फादर रहा और न ही कोई बैक। इसलिये जीवन यापन के लिए मेरे जैसे कलाकारों का काम करते रहना जरूरी होता है। रही शोज और इवेंट्स की, वह मैं कर ही रही हॅू। हाल में स्टालिस वीवा इवेंट से बतौर जज जुडी हॅू।
बालीवुड के अलावा दूसरी भाषा की फिल्में का आफर मिले तो करोगी ?
डेफिनेटली। आज मैं पंजाबी और कन्नड़ फिल्मों में हाईपेड एक्ट्रेस हूं। लेकिन मुझे अपनी मातृभाषा की फिल्म में काम नहीं मिला। इस बात को लेकर मुझे हैरानी भी है कि अभी तक किसी मराठी डायरेक्टर का मेरी तरफ ध्यान क्यों नहीं गया। इसका मुझे दुख भी है। लेकिन और मुझे महाराष्ट्रीयन होने पर गर्व है।
स्टालिस वीवा से कैसे जुडी ?
स्टालिस वीवा के तरूण माथुर ने मुझे गलैक्सीज से जुडनें का आफर दिया और उसके बारे में जानकारी दी तो यह अच्छा आफर लगा और मैं चवाह कर भी इंकार नही कर पायी। स्टालिस वीवा कलाकारों और माॅडलों को एक ंमंच देने के लिए बना है। जिसके माध्यम से पूरे देश में शोज और इवेंट्स किये जाएगें।
स्टाइलिस बनने के लिए क्या जरूरी हैं ?
स्टाइलिश कोई भी बन सकता है परन्तु उसके लिए एक जुनून, जज्बा व कड़ी मेहनत बहुत जरूरी है।
मिस इंडिया ब्यूटी कान्टेस्ट के समय उन्हें कौन सा राउंड ज्यादा मुश्किल लगा?

राउंड तो सारे ही मुश्किल थे परन्तु मैंने बहुत ही पैसन्ट होकर उनका जवाब दिया।

Thursday, September 25, 2014

यार हुआ बेगानाः बीजेपी और शिवसेना में “तलाक“

लगातार बैठकों और काफी माथापच्ची के बाद भी बीजेपी-शिवसेना गठबंधन ग्रहण लग ही गया...दोनों पार्टियां अपनी-अपनी शर्तों पर अड़ी रही। नतीजन 25 साल पुराना याराना टूट गया। गुरूवार शाम बीजेपी ने आखिरकार साफ कर दिया कि बस...अब बहुत हो चुका...ये साथ यहीं तक था...बीजेपी ने गठबंधन तोड़ते हुए कहा है कि वो अपने छोटे दलों का साथ नहीं छोड़ेगी, लेकिन शिवसेना हर बार एक तरह के ही प्रस्ताव दे रही थी, जिसके चलते शिवसेना का साथ छोड़ दिया है।
BJP+SHIV SHENA


शिवसेना अपने फार्मूले 151:131:6 पर चुनाव लड़ना चाहती थी। यानि खुद 151, बीजेपी को 131 और अन्य दलों के लिए महज 6 सीटें ही दे रही थी, जबकि बीजेपी शिवसेना से वो सीटें मांग रही थी, जिन पर शिवसेना कभी जीती ही नहीं। साथ ही बीजेपी घटक दलों के लिए 18 सीटों की मांग कर रही थी। बैठकों के साथ-साथ दोनों पार्टियों के बीच रूठना-मनाना का ये खेल चलता रहा, मगर कोई परिणाम नहीं निकल सका। गठबंधन के छोटे सहयोगी दल भी 18 सीटों की मांग पर अड़े हुए हैं...सीटों के बंटवारे को लेकर चल रही रस्साकशी के बीच बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने अपना मुंबई दौरा भी रद्द कर दिया। शाह गुरूवार को मुंबई जाने वाले थे। गठबंधन की बरकरारी के लिए महाराष्ट्र बीजेपी के चुनाव प्रभारी ओम माथुर के घर पर बुधवार रात करीब दो बजे तक बैठक चली....मगर नतीजा वहीं ढाक के तीन पात ही रहा....
दूसरी तरफ, महाराष्ट्र में अभी कांग्रेस-एनसीपी के बीच विधानसभा चुनाव के लिए सीटों पर सुलह नहीं हुई है, लेकिन इसी दौरान कांग्रेस ने 118 कैंडिडेट्स की सूची जारी कर दी है।
CONGRESS + NCP

मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण और उनके कैबिनेट के कई अन्य मंत्रियों का नाम इस सूची में शामिल है। कांग्रेस उम्मीदवारों की घोषणा ऐसे समय की गयी है३३ जब शरद पवार की एनसीपी के साथ सीट साझेदारी पर कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है। वर्तमान में राज्य विधान परिषद के सदस्य चव्हाण को उनके गृह जिला सतारा में कराद दक्षिण सीट से प्रत्याशी बनाया गया है। उनके कैबिनेट के कई सहयोगी तथा वरिष्ठ नेताओं का सूची में नाम है जिनमें कुदाल से प्रचार कमिटी प्रमुख नारायण राणे, शिरडी से राधाकृष्ण विखे पाटिल, सांगमनेर से बालासाहेब थोराट हैं। लोकमान्य तिलक के प्रपौत्र रोहित दीपक तिलक को कांग्रेस ने पुणे शहर की कस्बा पेठ से उम्मीदवार बनाया है। पूर्व मुख्यमंत्री विलासराव देशमुख के पुत्र अमित देशमुख  को लातूर और पूर्व केंद्रीय गृहमंत्री सुशील कुमार शिंदे की पुत्री प्रणेति शिंदे को शोलापुर से चुनाव मैदान में उतारा गया है।

हालांकि नामांकन दाखिल करने के अंतिम तिथि 27 सितंबर है। कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी अभी तक सीटों के बंटवारे के मुद्दे पर किसी नतीजे पर नहीं पहुंच पाए हैं।

Wednesday, August 28, 2013

मुजफ्फरनगर में हिंसा

मुजफ्फरनगर :

जानसठ थाना क्षेत्र के कवाल में हुई तीन हत्याओं के मामले में दूसरे दिन भी गांव में सांप्रदायिक आग सुलगती रही। दो दर्जन मकानों में तोड़फोड़ की, आग लगा दी। लोगों ने जाम लगाकर दो बाइक फूंक डालीं। राहगीरों पर हमला बोल दिया, जिसमें एक महिला व बच्ची समेत पांच लोग घायल हो गए। पुलिस ने गोलियां हवा में दागीं और लाठियां फटकारकर लोगों को खदेड़ा। एडीजी कानून- व्यवस्था अरुण कुमार समेत तमाम आला अधिकारियों ने हालात पर बमुश्किल काबू पाया।
मलिकपुरा निवासी गौरव व सचिन और कवाल निवासी शाहनवाज की मंगलवार को कवाल में हत्या कर दी गई थी। मंगलवार की रात्रि पोस्टमार्टम के बाद हजारों लोग सचिन व गौरव के शवों को लेकर मलिकपुरा पहुंचे। शव देखते ही परिजनों में हाहाकार मच गया। मंजर देख लोगों में आक्रोश भर गया और वह कवाल गांव की ओर दौड़ लिए। कुछ लोगों ने उन्हें किसी तरह समझाकर अंतिम संस्कार कराया। इस दौरान तय हुआ कि 31 अगस्त को कवाल स्थित स्कूल में पंचायत कर आगे की रणनीति तय की जाएगी।
अंतिम संस्कार के बाद एक बार फिर भीड़ बेकाबू हो गई और कवाल की और बढ़नी शुरू हो गई। इस दौरान पुलिस बेबस रही। हजारों लोगों ने कवाल पहुंचते ही कई मकानों व दुकानों में जमकर तोड़फोड़ की। भीड़ ने कई राहगीरों को मारपीट कर घायल कर दिया। इस दौरान पुलिस ने करीब एक दर्जन हवाई फायर करते हुए जमकर लाठी भांजी। इसके बाद भीड़ तितर-बितर हुई।
तोड़फोड़ करती हुई भीड़ पानीपत-खटीमा राजमार्ग पर पहुंची और तीन जगह जाम लगा दिया। एक बस में तोड़फोड़ की, जिससे कई यात्री घायल हो गए। एक दंपती को मारपीट कर घायल कर दिया। लोगों ने दो अलग-अलग स्थानों पर वहां से गुजर रहे दो लोगों की बाइक फूंक दी। बस अड्डे के सामने स्थित एक मकान में आग लगा दी। पानीपत-खटीमा मार्ग पर एक दुकान को फूंक डाला। मारपीट में एक महिला और बच्ची समेत कुल पांच लोग घायल हो गए।
मौके पर पहुंचे बिजनौर भाजपा विधायक कुंवर भारतेंदु सिंह व भाजपा नेता संजीव बालियान आदि ने जाम लगा रहे लोगों को समझाया। इधर नेता लोगों को समझा रहे थे और उधर कुछ युवकों ने निकट ही एक झोपड़ी में आग लगा दी। एडीजी कानून-व्यवस्था अरुण कुमार, नवागत डीएम कौशलराज शर्मा, नवागत एसएसपी सुभाष चंद दुबे व एडीएम ई इंद्रमणि त्रिपाठी ने बमुश्किल हालात पर काबू पाया।

Friday, July 27, 2012

आज़ाद देश का गुलाम


आज भले ही देश को आज़ादी मिले 65 बरस बीत चुके हो लेकिन पिछले 15 बरसो से लोहे की बेडियों में जकड़े उमेश उर्फ़ काका को भी अपनी आज़ादी का इंतजार है की कब उसके पैरो की बेडियों को खोलकर उसे आज़ादी दिलाई जाएगी | लोहे की बेडियों में कैद उमेश को किसी अंग्रेजी हुकूमत ने कैद नहीं किया बल्कि उसके खुद अपने परिजनों की कैद में है | सड़क किनारे पर बनी इस झोपडी में ही दिन की शुरुआत करने वाले उमेश की रात भी इसी में गुजर जाती है जिसका उसे पता ही नहीं चलता | बूढ़े हो चुके माँ बाप भी अपने जिगर के इस टुकड़े से तंग आ चुके है | 
सवस्थ व्यक्ति के लिए मानसिक संतुलन का ठीक होना आवश्यक है | यदि किसी व्यक्ति का मानसिक संतुलन बिगड़ जाये तों उसका जीवन नर्क के सामान हो जाता है |कभी कभी ज्यादा तनाव या फिर ज्यादा ख़ुशी मिलने से भी व्यक्ति का मानसिक संतुलन बिगड़ जाता है | ऐसा ही हुआ  मुजफ़्फ़र नगर के फलोदा गाँव में पिछले 10 बरसो से उमेश उर्फ़ काका का मानसिक संतुलन ऐसा बिगड़ा की उलटी सीधी हरकते करने लगा जिससे गाँव के लोग ही नहीं बल्कि परिजन भी उसकी हरकतों से तंग आ गये जिसके चलते 15 सालो से उसे लोहे की जंजीरों में बांध कर रखा जाता है | दरअसल जंजीरों में जकड़ा उमेश 12 साल पहले स्वस्थ था और अपनी पत्नी चन्द्र किरण  व दो  बच्चो के साथ अपना जीवन व्यतीत कर रहा था |लेकिन उसके भाँग का नशा करने के शोक ने उसका जीवन नर्क कर दिया और उलटी सीधी हरकते करने लगा जिससे परेशान होकर पत्नी भी अपने बच्चो को लेकर उमेश को छोड़कर चली गयी | बूढ़े माँ बाप ने काफी इलाज कराया लेकिन सब व्यर्थ था | 
धीरे धीरे उमेश की उदंडता बढती गयी जिसपर परिजनों ने उसके पैरो में लोहे की बेडिया डाल दी | हाथो  में  लाठी और चेहरे पर झुर्रियों का जाल लिए ये बूढ़ा व्यक्ति बुधराम उमेश का पिता है जिसकी झील सी इन गहरी आँखों में गम के सिवा कुछ भी नहीं है ये रोना तों चाहता है शायद वक़्त के थपेड़ो और मुफलिसी ने इसके आँसुओ को सोख लिया है | हमेशा अपने बेटे के ठीक हो जाने के लिए इश्वर से प्रार्थना करता है वंही इस बात को भी स्वीकार करता है की अपने जिगर के इस टुकड़े को बरसो से जंजीरों में कैद कर रखा है | उमेश की माँ प्रेमो भी अपने इस लाल से तंग आ चुकी है उसका कहना है की जिस उम्र में उनकी सेवा बेटे को करनी चाहिए थी लेकिन आज इन बुधो को अपने जवान बेटे के सभी काम काज करने पड़ते है,आज उनके पास अपने बेटे के इलाज करने के पैसे भी नहीं है मुश्किल से दो वक़्त की रोटी गाँव से चलती है | गाँव वालो को नुकसान न पंहुचा दे इसी लिए उमेश को जंजीरों में जकड़ा गया है | अपने दुखी मान से उमेश की माँ भी अब अपने बेटे से अपना पीछा छुड़ाना चाहती है | वो  चाहती है की कोई भी इसे ऐसी जगह भर्ती करा दे जंहा उनका बेटा इलाज से सही हो सके |
ग्रामीण भी काका को जंजीरों में जकड़े रहने को गलत मानते है मगर मदद के लिए कोई सामने आने को तैयार नहीं है \ ग्राम प्रधान का कहना है की कई बार इनकी मदद के लिए आवाज उठाई  मगर उनकी लाचारी ओर गरीबी के चलते प्रशासन के कानो पर भी जू नहीं रेंगी | 
जिला चिकित्सा अधिकारी से जब इस युवक के बारे में पूछा गया तो उन्होंने जानकारी ना होने के साथ साथ हर संभव मदद की बात कही | खुद जिला चिकित्सा अधिकारी भी लम्बे समय से जंजीरों में जकड़े रहने के कारण कई गंभीर बिमारी हो जाने की संभावना जाता रहे है | साथ ही चिकित्सको द्वारा उमेश का मेडिकल जाँच कराकर आगे की कार्यवाही की बात कहते है | मुख्य चिकित्सा अधिकारी भी जंजीरों में इस तरह से किसी भी युवक को कैद में रखने को गैर कानूनी भी मानते है | 
आज भारत देश को आज़ाद हुये भले ही ६२ बरस हो चुके हो लेकिन उमेश के पैरो में पड़ी इन लोहे की बेडियों को देखकर लगता है की उमेश आज भी  आज़ाद देश का गुलाम है | हालाकि यह सिर्फ उसके मानसिक संतुलन ठीक न होने के कारण जिन बूढ़े माँ बाप को बुढ़ापे में अपने बेटे से सेवा करने का सहारा होता है आज वही माँ बाप अपने जवान बेटे का सहारा बने है और उसकी मन से सेवा कर रहे है | उन्हें इंतजार है उस फ़रिश्ते की जो उनके बेटे को सही जगह भर्ती कराकर उसका इलाज करा सके | 

- Amit Saini

Tuesday, December 20, 2011

अंधविश्वास : औलाद की चाहत में मासूम बच्ची की बलि


- कई टुकड़ो में बरामद हुआ बच्चा का शव
- तांत्रिक क्रियाओं के चलते दी गयी बलि
मुजफ्फरनगर। आस-औलाद की चाहत में आरोपियों ने चार साल की मासूम बच्ची की तांत्रिक क्रियाओं के चलते बलि दे दी गयी। जिसका खुलासा उस समय हुआ, जब पुलिस ने शक के आधार पर आरोपियों को पकड़कर  पूछताछ की तो ये सनसनीखेज मामला सामने आया। पुलिस ने आरोपियों की निशानदेही पर बच्चे के शव को कई टुकड़ो में बरामद कर पंचनामा भरा और पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। जबकि पुलिस ने चोरी-छिपे ही आरोपियों को जेल भेज दिया।
छपार थाना क्षेत्र के नंगला खोजा निवासी मोमीन की 4 वर्षीया बेटी मेविश गत 7 दिसम्बर को रहस्यमय परिस्थितियों में गायब हो गयी थी, जिसको परिजनों ने आसपास खूब तलाश किया, लेकिन बच्ची का जब कुछ अता-पता नहीं चल सका तो मजबूरन पीडि़तो को पुलिस से शिकायत करनी पड़ी। पुलिस ने मामला गुमशुदगी में दर्ज कर कार्रवाई आगे बढा दी, मगर परिजन इससे संतुष्ट नहीं हुए तो पुलिस ने मामले को अपहरण में दर्ज कर लिया और शक के आधार पर गांव के ही सकील को उसकी पत्नी महरूबी, पुत्रवधु महरूनी पत्नी हुसैन, बेटे तनवीर और कलीम को उठाकर पूछताछ करनी शुरू कर दी। पहले तो आरोपी पुलिस की आंखों में धूल झौंकते रहे, लेकिन जब पुलिस ने सख्ताई से पूछताछ की तो आरोपी टूट गये और उन्होंने सारा वाक्या पुलिस को कह सुनाया।
डेमो पिक्चर 
दरअसल सकील के तीन बेटे है मौहम्मद हुसैन, तनवीर और कलीम। तीनों ही शादीशुदा तो है, लेकिन किसी को भी औलाद पैदा नहीं हुई, जिस पर उक्त लोगों ने तमाम नीम-हकीम और डाक्टरों से अपना और अपनी पत्नियों का उपचार कराया, लेकिन कोई फायदा नहीं हो सका तो अंधविश्वास के चलते आरोपी तंत्र-मंत्र के चक्कर में फंस गये। आरोप है कि आरोपियों को किसी तांत्रिक ने मासूम बच्चे की बलि देने की सलाह दी, जिस पर आरोपियों ने गत 7 दिसम्बर को मासूम मेविश का अपहरण कर लिया और फिर उसकी बलि दे डाली। आरोपियों के मुंह से ये सब सुनकर पुलिस का भी कलेजा फटा का फटा रह गया। आनन-फानन में आलाधिकारियों के निर्देश पर आरोपियों की निशानदेही पर पुलिस ने सहारनपुर जनपद के देवबंद थाना क्षेत्र के केंदकी गांव के जंगल में संजय त्यागी के खेत में तलाश किया तो बच्ची का शव छ: टुकड़ों में बरामद हो गया। सूत्रों की माने तो मौके से तांत्रिक क्रियाओं का भी सामान बरामद किया गया। पुलिस ने शव को पंचनामे के बाद पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।
बताया जाता है कि जैसे ही मामला आलाधिकारियों के संज्ञान में आया, वैसे ही पुलिस अधिकारियों द्वारा निर्देशित छपार पुलिस ने आनन-फानन में मामले को नर बलि से रंजिश की ओर मोड दिया तथा लिखा-पढी में मामला रंजिश का बताते हुए आरोपियों को जेल भेज दिये गये। ये भी बताया जा रहा है कि धर-पकड़ की सुचना मिलते ही हुसैन घबराकर दो दिन पहले ही कोर्ट के पेश होकर जेल जा चुका है, जबकि ये भी बताया जा रहा है कि इससे पहले भी आरोपीगण करीब चार वर्ष पूर्व गांव के ही रिजवान के चार वर्षीय बेटे मुसाहिद की बलि दे चुके है, जिसके खुलासे के बाद पुलिस ने आरोपियों को पकडकर जेल भेजा था, मगर बच्चे की चाह में इस बार फिर से आरोपियों ने इस खौफनाक वारदात को अंजाम दे डाला।


अमित सैनी
मुज़फ्फरनगर

Monday, December 19, 2011

फिरौती न देने पर दो किसानों की हत्या

मुजफ्फरनगर : जुर्म की दुनिया का बेताज बादशाह

- दो-दो लाख रूपये की मांगी गई थी फिरौती
- 7 दिसम्बर को किया गया था दोनों का अपहरण
मुजफ्फरनगर।
दो-दो लाख रूपये की फिरौती न देने पर बदमाशों ने अपहृत दो किसानों की गोली मारकर हत्या कर दी और उनके शवों को गन्ने के खेत में फेंक दिया, जिसका खुलासा उस समय हुआ जब पुलिस ने सर्विलांस की मदद से एक बदमाश को दबोच लिया, जिनसे पूछताछ में सारी घटना का खुलासा कर दिया। पकडे गये बदमाश की निशानदेही पर पुलिस ने दोनों किसानों के शवों को बरामद कर लिये, जिनको पंचनामे के बाद पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया, जबकि मामले की गंभीरता को देखते हुए गांव में भारी पुलिस बल तैनात किया गया है।
दरअसल पुरकाजी थाना क्षेत्र के नंगला दुहेली ग्राम निवासी 3० वर्षीय किसान ज्ञानसिंह पुत्र महावीर तथा 48 वर्षीय किसान राजपाल पुत्र चंद्रभान गत 7 दिसम्बर को घर से फसलों में डालने के लिए खाद लेने के लिए पुरकाजी कस्बे के लिए साईकिलों पर निकले थे, लेकिन देर शाम तक भी जब दोनों किसान वापिस घर नहीं पहुंचे तो परिजनों को चिंता सताने लगी, जिस पर परिजनों की ओर से पुलिस से शिकायत की गयी। छानबीन के दौरान दोनों किसानों की साईकिले क्षेत्र के तेजलहेड़ा और खाईखेड़ी गांव के जंगल से लावारिस अवस्था में पड़ी हुई मिल गयी, जबकि पुलिस ने तहरीर के अनुसार मामला गुमशुदगी में दर्ज कर कार्रवाई शुरू कर दी।

9 दिसम्बर को दोनों किसानों के परिजनों के मोबाईलों पर एक ही नम्बर से बदमाशों ने फोन करके दो-दो लाख रूपये की फिरौती मांगी, जिसकी सूचना परिजनों ने तत्काल ही पुलिस को दी, जिस पर पुलिस ने कथित मोबाइल नम्बर को सर्विलांस के जरिये ट्रेस किया और सोमवार को पुलिस ने भोपा थाना क्षेत्र के सीकरी ग्राम निवासी कलीम को धर-दबोचा, जिसने पूछताछ के दौरान पुलिस के सामने अपराध करना कुबूल करते हुए बताया कि उक्त ने अपने साथियों के साथ मिलकर दोनों किसानों का तेजलहेडा और खाईखेडी गांव के बीच अपहरण किया था, जबकि फिरौती न मिलने तथा पुलिस को सूचना देने पर उन्होंने दोनों की गोली मारकर हत्या कर दी थी। पुलिस ने कलीम की निशानदेही पर छपार थाना क्षेत्र के दतियाना गांव के जंगल से एक गन्ने के खेत से किसान ज्ञान सिंह और राजपाल के गोली लगे शव बरामद कर लिये। एक की जहां खोपडी में गोली मारी गयी थी, वहीं दूसरे की छाती को निशाना बनाया गया था। पुलिस ने दोनों शवों को कब्जे में लेकर पंचनामा भरा और पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। मामले की गंभीरता को देखते हुए गांव में भारी पुलिस बल तैनात किया गया है, जबकि पकडे गये बदमाश के अन्य साथियों को तलाश किया जा रहा है।
 
 
अमित सैनी
मुज़फ्फरनगर

Saturday, December 17, 2011

....मुजफ्फरनगर में लगा लाशों का ढेर

- कहीं पर हादशा तो कहीं पर वारदात के शिकार हुए मृतक
- बार्डर पर तैनात बीएसएफ का जवान हुआ पश्चिमी बंगाल में शहीद
मुजफ्फरनगर।
कहते है कि मौत कभी बताकर नहीं आती, वो कहीं भी और कभी भी बिन बताये जा पहुंचती। बहाने केवल अलग-अलग होते है, मगर जब आती है तो अपने पीछे दहशत और खौफ के अलावा कुछ नहीं छोड जाती। मुजफ्फरनगर के ग्यारह लोगों को अलग-अलग स्थानों पर मौत को लगे लगाना पड़ा। कोई हादशे का शिकार हुआ तो कोई वारदात में मारा गया, जबकि एक बीएसएफ का जवान भी पंश्चिमी बंगाल में शहीद हो गया, जबकि एक जवान अपनी पत्नी सहित हादशे का शिकार हो गया। इतना ही नहीं दो अलग-अलग स्थानों पर छ: लोग भी सड़क हादशों का शिकार होकर काल का ग्रास बन गये, जबकि इन हादशों और वारदातों में कई लोग बुरी तरह से घायल भी हुए, जिनको विभिन्न अस्पतालों में उपचार हेतु भर्ती कराये गये है।




कैराना। क्षेत्र के ग्राम पंजीठ निवासी विनोद कुमार सैनी श्रीनगर में केन्द्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल में चालक के पद पर तैनात था। गत दिवस उसके परिवार में उसके भाई के बच्चे की हुई मौत का समाचार सुनकर विनोद छुट्टी लेकर अपनी पत्नी अनीता देवी व बच्चे को साथ लेकर श्रीनगर से कैराना के लिए चला था। पंजाब प्रदेश के पठानकोट शहर के निकट कोहरे के कारण हुए सड़क हादसे में विनोद एवं उसकी पत्नी अनीता की मौके पर ही मृत्यु हो गयी तथा बच्चे गंभीर रूप से घायल हो गये, जिन्हें राहगीरों ने निकट के चिकित्सालय में भर्ती कराकर उनके परिजनों को सूचना दी। सूचना मिलने पर मृतक विनोद का भाई मदन सैनी व अन्य ग्रामीणों के साथ मौके पर पहुंचे और विनोद व उसकी पत्नी का शव और घायल बच्चे का शव लेकर कैराना पहुंचे। उक्त दु:खद दुर्घटना के समाचार से हर ओर कोहराम मच गया तथा शनिवार को ग्राम पंजीठ में विनोद व उसकी पत्नी अनिता का जब दाह-संस्कार किया गया, तो सभी हिन्दू-मुस्लिम हजारों लोगों की आंखे रो उठी। सभी ने आंसू भरी आंखों से विनोद व उसकी पत्नी को अन्तिम विदाई दी।

खतौली। कोतवाली क्षेत्र के ग्राम केलावडा निवासी मुवासी पुत्र संगत के भाई लाल सिंह के कोई औलाद नही थी। लाल सिंह मरने से पूर्व पौने तीन बिघा जमीन व मकान की वसीयत मुवासी के नाम कर गया था। लाल सिंह की मौत के बाद इसके साले की लड़की माला के पति हरेन्द्र ने मकान व जमीन पर कब्जा कर लिया। वसीयत में चले मुकदमे में मुवासी जीत गया। लेखपाल ने जमीन व मकान पर कब्जा करा दिया था। मकान व जमीन चले जाने से क्षुब्ध हरेन्द्र व उसके पुत्र गौरव, टीटू, अभिषेक ने विगत रात्रि विजयपाल पर धारदार हथियारों से हमला कर घायल कर दिया था। सूचना मिलने पर पहुंची पुलिस ने घायल विजयपाल को इलाज हेतू सीएचसी पर भर्ती कराया। चिकित्सकों ने प्राथमिक उपचार देकर मुजफ्फरनगर रैफर कर दिया था। शनिवार की सुबह विजयपाल को चिकित्सकों ने मेरठ के लिए रैफर किया था, लेकिन मेरठ जाते समय विजयपाल की मौत हो गयी। परिजन शव को लेकर कोतवाली पहुंचे। पुलिस ने मृतक के शव का पंचनामा भरकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। मृतक के पुत्र मिन्टू द्वारा दी गयी तहरीर पर पुलिस ने गैर इरादतन हत्या करने का मुकदमा दर्ज कर लिया। पुलिस ने एक आरोपी गौरव को पकड़कर थाने बैठा लिया है। पुलिस हरेन्द्र, टिटू, अभिषेक की तालश में दबिशे दे रही है।

शामली (प्रबुद्घनगर)। मुंबई से आए अपने दोस्त को लेकर वापस लौट रहे कस्बा बनत के चार युवकों की इंडिको गाडी की डीजल टैंकर के साथ भिडंत के बाद गाडी में आग लगने से जिंदा जलकर दर्दनाक मौत हो गयी। उक्त घटना से कस्बा बनत में शोक की लहर दौड गयी है। सायं के समय जैसे ही तीन शव कस्बे में पहुंचे, म्रतकों के परिजनों के करूण रूद्रन से माहौल बेहद गमगीन हो गया जबकि चौथा शव उसके परिजन मुंबई ले गये। आदर्श मंडी थाना क्षेत्र के कस्बा बनत निवासी विशाल शर्मा उर्फ बंटी पुत्र श्रीपाल मौहल्ला पटेलनगर में अपने चाचा राजेन्द्र के पास रह रहा था। उसके पिता की स्टील फैक्टरी है। बताया जाता है कि बंटी मुंबई से दिल्ली हवाई जहाज द्वारा पहुंचा था और उसे एयरपोर्ट से लाने के लिए बनत निवासी उसके दोस्त उसे इंडिगों कार एचआर-१५-३११३ में लेने के लिए गए थे। गाडी १९ वर्षीय सरू उर्फ सरफराज पुत्र अख्तर निवासी दक्षिण प्रेमनगर बनत की थी और वह खुद ही गाडी चला रहा था जबकि उसके साथ जोया उर्फ दीया ,२२, वर्षीय पुत्र सैय्यद धम्मो मौहल्ला हकीकतनगर बनत, नटवर उर्फ नीटू पुत्र सतेन्द्र प्रतापनगर बनत गए थे। तीनों दोस्त बंटी को एयरपोर्ट पर रिसीव करने के बाद जब गाडी लेकर वाया सोनीपत-पानीपत होते हुए शामली आ रहे थे तो पानीपत और सिम्भालका के बीच एक मोड पर सामने से आ रहे ईंटों से भरे ट्रक से बचने के प्रयास में जैसे ही सरफराज ने गाडी मोडी तो उसकी भीषण टक्कर वहां से गुजर रहे एक डीजल के टैंकर से हो गयी, टक्कर इतनी जोरदार थी कि इंडिगों पलट गयी और पलटते ही उसमें आग लग गयी। गाडी अत्याधुनिक व कंप्यूटराइज्ड होने के कारण बिना रिमोट के उसके खिडकी व शीशे नहीं खुल पाए जिससे सभी गाडी के अंदर बुरी तरह झुलस गए। गाडी गाडी चालक सरफराज ने किसी तरह शीशे तोडकर शोर मचाया और दुर्घटना के बाद मौके पर पहुंची फायर ब्रिगेड ने आग पर काबू पाकर सबसे पहले सरफराज को गाडी से बाहर निकला। उस समय केवल उसी की संासें चल रही थी। जबकि शेष तीनों गाडी इस कदर जल चुकी थी कि उनकी शिनाख्त भी नहीं हो पा रही थी। सरफराज को उपचार के लिए एक निजी चिकित्सालय में ले जाया गया जहां उपचार के दौरान उसकी भी मौत हो गयी। मरने से पूर्व सरफराज ने अपने व अपने साथियों के बारे में पुलिस को जानकारी दी जिस पर पानीपत पुलिस ने शामली पुलिस व बनत में उसके परिजनों को घटना की जानकारी दी। कस्बे के चार जवान युवकों की मौत की सूचना मिलते ही बनत मे शोक की लहर दौड गयी और भारी संख्या में लोग उनके आवासों पर शोक जताने के लिए एकत्र हो गए। काफी संख्या में लोग मृतकों के शव पानीपत से लाने के लिए रवाना हुए। सायंकाल जैसे ही तीन शव कस्बे में पहुंचे, गमगीन परिजनों का सब्र टूट गया और उनके दहाडे मारकर करूण रूद्रन से माहौल बेहद गमगीन हो गया। बंटी का शव पोस्टमार्टम हाउस पर ही छोड दिया गया क्योकि उसके परिजन उसका शव मुबंई लेकर जायेंगे। मृतक सरफराज जहंा अपनी ही इंडिगो कार पर चालक था वहीं नीटू कृषि कार्य करता था।

जानसठ । पानीपत खटीमा हाइवे पर धागा फैक्ट्री के पास घने कोहरे के कारण तेज गति से चल रही डीसीएम आगे जा रहे ट्रक से जा टकराई। भीषण टक्कर से डीसीएम के परखच्चे उड़ गए। जिसमें सवार दो मजदूरों की मौके पर ही मौत हो गर्ई तथा चालक सहित चार अन्य मजदूर गंभीर रूप से घायल हो गए। गंभीर अवस्था में घायल एक मजदूर को मेरठ रेफर किया गया है।

शनिवार की सुबह गांव नवादा से डीसीएम गाड़ी में बैठकर थाना सरधना क्षेत्र के गांव सबदलपुर निवासी सलीम पुत्र इसमाइल, गांवं खिवाई निवासी अबरार पुत्र इसरार, नोशाद पुत्र तरीखत, गांव नवादा निवासी दिलशाद पुत्र अली हसन, रिजवान पुत्र युनुस, गांव हरसोपुर निवासी बाबूराम पुत्र रामपाल खोई लेने के लिए चांदपुर जा रहे थे। सुबह करीब छह बजे पानीपत खटीमा हाइवे पर धागा फैक्ट्री के पास आगे जा रहे ट्रक में पीछे से डीसीएम टकरा गई। जबदस्त टक्कर लगने से डीसीएम के आगे का हिस्सा पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गए। उसमें सवार सभी लोग दब गए। चींखने चिल्लाने की आवाज सुनकर वहां से गुजरने वाले अन्य वाहनों के चालकों ने पुलिस को सूचना दी। सूचना मिलने पर मौके पर पहुंची पुलिस खिड़की काटकर सभी घायल लोगों बाहर निकाला। जिनमें से सलीम और अबरार की मौत हो चुकी थी। पुलिस चारों घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया। जहां पर गंभीर अवस्था में घायल नोशाद को मेरठ के लिए रेफर किया गया है। पुलिस ने मृतक लोगों को पोस्टमार्टम के लिए भेजा।


जानसठ/सिखेड़ा। पश्चिम बंगाल में डयूटी के दौरान बीएसएफ के जवान की अचानक हार्टअटैक से मौत हो गई। जवान की मौत को लेकर पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई। शनिवार की सुबह गमगीन माहौल में जवान के शव का अंतिम संस्कार किया गया। इस दौरान बीएसएफ के जवानों ने अपने साथी को अंतिम सलामी दी। अंतिम संंस्कार में कोई भी प्रशासनिक अधिकारी नहीं पहुंचा।

थाना सिखेड़ा क्षेत्र के गांव फहीमपुर निवासी बलबीर सिंह के ४५ वर्षीय पुत्र प्रमोद कुमार सन् १९८९ में बीएसएफ में भर्ती हुआ था। फिलहाल उसकी तैनाती पश्चिम बंगाल के बालूघाट पर थी। शुक्रवार को डयूटी के दौरान अचानक हार्टअटैक आने से प्रमोद की मृत्यु हो गई। बीएसएफ के कमांडर ने इसकी सूचना उसके परिजनों को फोन पर दी। प्रमोद की मौत की खबर सुनते ही परिवार में कोहराम मच गया। प्रमोद की मौत से पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई। शुक्रवार की देर रात्रि को बीएसएफ के जवान मृतक प्रमोद का शव लेकर गांवं फहीमपुर पहुंचे। शनिवार की सुबह सवेरे प्रमोद के शव का अंतिम संस्कार कर दिया गया। अंतिम संस्कार करते समय ग्रामीणों की आंखे नम हो गई। ग्रामीणों का कहना था कि देशवासियों की रक्षा करने वाला एक जवान हमको छोड़ कर चलाया गया। शमशान में बीएसएफ के जवानों ने अपने साथी को सलामी देकर अंतिम विदाई दी। जवान के अंतिम संस्कार के मौके पर कोई भी प्रशासनिक अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा। जबकि पुलिस मौके पर मौजूद रही। प्रशासनिक अधिकारी के मौके पर नहीं पहुंचने को लेकर ग्रामीणों में रोष व्याप्त है।

मुजफ्फरनगर। मूल रूप से ककरौली निवासी धर्मवीर पुत्र लेखराम हाल में नई मण्डी कोतवाली क्षेत्र के सुभाषनगर में रह रहा था, जबकि वह खाईखेड़ी शुगर मिल में बॉयलर एटेंडेंट के रूप में कार्यरत था। बताया जाता है कि रोजाना की भांति शनिवार को भी वह मिल में गया, जहां पर अचानक से वह बॉयर की चेन में आकर बुरी तरह से घायल हो गया, जिसको तत्काल ही मिल प्रबंधन अपनी बिना नम्बर की न्यू ब्राडेंड बुलेरो कार द्वारा जिला चिकित्सालय ले जाया गया, लेकिन चिकित्सकों ने उसको गंभीर अवस्था के चलते तुरंत ही मेरठ अथवा दिल्ली ले जाने की सलाह दी, जिस पर मिल प्रबंधन बजाय उसको मेरठ ले जाने के चिकित्सालय के बाहर आकर खडे हो गये और पाल धर्मशाला के पास बुलेरो कार खड़ी करके घंटों तक विचार-विमर्श करते रहे, जिसके चलते धर्मवीर ने तडफ़ते हुए वहीं पर दम तोड़ दिया। संदिग्ध परिस्थितियों में इस तरह से कार खड़ी होना देख लोगों को संदेह हुआ तो कुछ लोगों ने कार के अंदर झांककर देखा तो उसके अंदर लाश पड़ी होना देख शोर मचा दिया, जिसक चलते आरोपी कार को लेकर रूड़की चुंगी की ओर दौड़ पड़े, मगर लोगों ने उनका वहां भी पीछा नहीं छोड़ा और कई लोगों ने जहां कार का पीछा करना शुरू कर दिया, वहीं इस सम्बंध में तत्काल ही पुलिस को भी सूचना दी। आरोप है कि आरोपीगण रूडकी रोड पर स्थित एक आर्युवेदिक अस्पताल के पास कार को छोड़कर फरार हो गये, जबकि सूचना मिलते ही एसपी सिटी केबी सिंह, सीओ सिटी शिवराम यादव मय पुलिस फोर्स के मौके पर जा पहुंचे, जिन्होंने शव को अपने कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।

इन्सान की अनुभूति किसी भी कला की जन्मदाता है: बिजेन्द्र शर्मा

नई दिल्ली! (Prem Babu Sharma)
प्रेम एक ऐसा कांटा है जिसमे पराया दर्द ही मिलता है, पर जब यह मिलता है तो इससे फूलो की खुशबू झरती है। यह कविता नही, चित्रो के कुछ नमूने है, जिन्हे अपनी कल्पना और रंगो के माध्यम से कलाकार विजेन्द्र शर्मा ने कैनवास पर उकेरा है। जिनकी उंगलियों में कमाल का जादू है, जब वे रंग और बर्श से कैनवास पर चित्र उकेरते है तो उसमें पूरी तरह डूब जाते है। यही वजह है की उनकी कृति वास्तविकता के काफी करीब और संजीव प्रतीत होती है। विजेन्द्र शर्मा कैनवास पर जीवन, मृत्यु, सधंर्ष, अध्यात्म और प्रकृति को ही चित्रित नही करते, बल्कि सामाजिक कुरीतियो और भष्ट्राचार को उकेर कर सामाजिक दायित्व का भी निर्वाह करते है, इनकी कला के प्रशंसको में बिरला अम्बानी ग्रुप, अभिनेता अमिताभ बच्चन के अलावा भारत के पूर्व राष्ट्रपति डा0 ए.पी.जे. अब्दुल कलाम प्रमुख है, डा.कलाम जब भारत के राष्ट्रपति थे तब इन्होने अपना स्वंय का पोट्रेट विजेन्द्र शर्मा से बनवाया था।
दिल्ली में जन्मे और दिल्ली कालेज आॅफ आर्टस से स्नातक और गोल्ड मेडलिस्ट विजेन्द्र के लिए यह गौरव की बात है। विजेन्द्र कहते है कि यहाँ तक पहुचने के लिए मुझे बहुत संधर्ष करना पड़ा, शुरुआत में किताबों आदि का कवर डिजाईन किया उसके बाद महाभारत, रामायण, विक्रम बेताल जैसे चर्चित सीरियल के लिए पेटिंग बनाई,
विजेन्द्र की पहली एकल प्रदर्शनी दिल्ली की श्रीधारणी आर्ट गैलरी में लगी। इसके बाद इन्होनें कभी पीछे मुड़कर नही देखा। देश और विदेशो में कई शोज हो चुके है। इस कला यात्रा के दौरान उन्हे कई पुरस्कार और सम्मानो के नवाजा गया जिसमे साहित्य कला परिषद सम्मान, आल इण्डिया पुलिस मीट सम्मान, पं0 रविशंकर अवार्ड आदि प्रमुख है। कलाकार विजेन्द्र शर्मा का मानना है कि इन्सान की अनुभूति किसी भी कला की जन्मदाता है। चित्रकला के माध्यम से इन्सान अपनी सवेदंनाओ की अभिव्यक्ति करता है, दिल्ली में जल्द ही प्रदर्शित होने वाली इस प्रदर्शनी में कलाकार विजेन्द्र शर्मा ने अपने देश के समाज और अध्यात्म को प्रभावशाली विषय बनाकर कैनवास पर विभिन्न रंगो से आकार देने की कोशिश की है।

Friday, December 16, 2011

एक और उद्यमी का सूर्यास्त : जेल में बंद धर्मदास जैन की मौत

- दहेज हत्या के मामले में सजायेआफ्ता
- मृतक कैदी था रेनबो स्टील का साझेदार
मुजफ्फरनगर।
जिला कारागार में उम्र कैद की सजा काट रहे उद्यमी की खून की कमी के चलते जिला चिकित्सालय में मौत हो गयी, जो कि दहेज हत्या के मामले में अपने तीनों बेटो सहित जेल में बंद थे, जबकि हाल ही में उनकी पत्नी को पैरोल पर छोड़ा गया था। मृतक रेनबो स्टील के मालिकों में से एक थे। पुलिस ने शव का पंचनामा भरकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।
जानी-मानी 'रेनबो स्टीलÓ के साझेदार नगर कोतवाली क्षेत्र के रेनबो विहार मौहल्ला निवासी धर्मदास जैन पुत्र मांगेराम के बेटे संजीव जैन की शादी सहारनपुर निवासी अल्पना के साथ हुई थी, जिसने सन् 1998 में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी, जिस पर अल्पना के परिजनों की ओर से दहेज हत्या का मामला दर्ज कराया गया था, जिसके चलते पुलिस ने धर्मदास जैन सहित उसकी पत्नी मेमलता जैन, बेटे संजीव जैन, राजीव जैन और अजय जैन को गिरफ्तार करके जेल भेज दिया था। केश ट्रायल पर आया तो जज ने दोनों पक्षों की सुनने के बाद कथित आरोपियों को दोषी करार देते हुए 4 अक्टूबर, सन् 2०1० में उम्र कैद की सजा सुना दी। बताया जाता है  हाल ही में उनकी पत्नी मेमलता को पैरोल पर छोडा गया था, जबकि 75 वर्षीय धर्मदास अपने तीनों बेटो सहित जेल में सजा काट रहे थे।
सूत्रों की माने तो पिछले कुछ दिनों से धर्मदास जैन खून की कमी की बिमारी से जूझ रहे थे, जिसके चलते उनको जेल के अस्पताल में भर्ती कराया गया था, मगर जब उनकी हालत बद से बदतर होती चली गयी तो उनको बृहस्पतिवार को जिला चिकित्सालय में भर्ती कराया गया, जहां पर उनको गत शाम उनको अस्पताल में ही एक बोतल खून चढाया गया था, जिसके चलते उनकी हालत में धीरे-धीरे सुधार भी होने लगा था। इतना ही नहीं सुबह सवेरे उन्होने अच्छी तरह से बातचीतों के अलावा कस्टडी के लिए तैनात सिपाहियों से हंसी-ठिठौली भी काफी दे तक की थी, जबकि उनकी पत्नी मेमलता उनको चाय अथवा कॉफी पीने के लिए कहने लगी तो उन्होंने पीने से इंकार कर दिया, मगर करीब साढे आठ बजे के लगभग उनको दम तोड़ दिया, जिसकी सूचना मिलते ही जेल प्रशासन में हड़कम्प मच गया। आनन-फानन में जेल अधिकारी अस्पताल पहुंचे, जबकि सूचना मिलते ही मृतक की पत्नी एवं बेटी-दामाद मौके पर जा पहुंचे। पुलिस ने शव का पंचनामा भरकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। ज्ञात रहे कि रेनबो स्टील में धर्मदास के अलावा पूर्व मंत्री विद्या भूषण भी साझेदार थे।