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Friday, January 30, 2015

यादगार ही किरदार करने की चाहः रवीना टंडन

(प्रेमबाबू शर्मा )
बॉलीवुड की मस्त-मस्त गर्ल रवीना टंडन फिर से सिल्वर स्क्रीन पर अपना जलवा बिखेरने जा रही हैं। रवीना ने शादी के बाद फिल्मों में काम करना काफी हद तक कम कर दिया है। लेकिन उनकी चाह है कि अब केवल यादगार ही किरदार करना चाहती है। उन्होंने बुढा होगा तेरा बाप और शोभना 7 नाइट्स में विवाह के बाद देखा गया। एक फिल्म बोम्बे वेलवेट में भी काम किया लेकिन फिल्म कब रीलिज होगी इस बारे में रवीना को भी नही पता। सिल्वर स्क्रीन पर एक फिर से आने का मन बना लिया है और अब रवीना अनुराग कश्यप की दो फिल्में में अपना जलवा दिखाती नजर आएगीं। हाल में वह दिल्ली में जायरा डायमंड शो रूम की ओपनिंग में पहुंची इसी दौरान उनसे मुलाकात हुई पेश प्रस्तुत मुलाकात के चंद अंश ।
शादी के पांच के बाद सिल्वर स्क्रीन पर एक फिर से आने का मन बना लिया कैसा लग रहा है ?
अच्छा लग रहा है कला एक ऐसा कीडा है जिसे कलाकार चाह कर भी नही भुला सकता है। लेकिन पंाच कैसे बीते पता ही नही चला। जब अनुराग ने फिल्म में काम करने का आफर दिया तो चाह कर भी मना नही कर पायी।
 यह सब क्या अचानक हुआ ?
जी। दरअसल,अनुराग जी हमेशा से ही मेरे प्रिय निर्देशक रहे हैं। वह हमेशा से ही चाहते थे कि मैं उनके साथ फिल्मों में काम करूं। मैंने उनकी दो फिल्मों में काम करना स्वीकार किया है। 
जहां तक मुझे याद है, तो आखिरी बार आपने अनुराग के साथ में फिल्म शूल की थीं ?
जी हाॅ। राम गोपाल वर्मा की इस फिल्म में अनुराग कश्यप ने कहानी भी लिखी थी। जबकि इसके डारेक्टर ई निवास थे। 
बदलते समय के चलते एक की समकालीन हीरोईनस मे माधुरी और जूही ने भी सिल्बर स्क्रीन पर वापिसी की  इसको लेकर क्सा सोचती है ?
माधुरी जूही का वापिसी पर मुझे खुशी है वे गुलाब गंैग नामक सिल्बर स्क्रीन पर वापिसी कर रही है इस फिल्म की कहानी और उसमें उनके किरदार काफी मजबूत है। मैं ऐसी ही यादगार किरदार निभाने की चाह रखती हॅू।
Raveena Tandon
दो दशक से ज्यादा फिल्म इंडस्ट्री में आपने काम किया , कैसा रहा आपका यह सफर?
अब तक बहुत ही अच्छा रहा है और आगे भी अच्छा रहेगा। मैं उन भाग्यशाली लोगों में हूं, जो इस इंडस्ट्री की पैदाइश हैं। मेरे पिता फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े हुए हैं उन्हें इंडस्ट्री में करीब 50 साल हो गए। मेरी परवरिश यहां हुई और मैं जानती हूं कि एक दिन में इंडस्ट्री में ही अंतिम सांस लूंगी। हर फील्ड, हर लाइन में कुछ ऊंच-नीच तो रहती ही है, मैं लकी हूं कि मेरे आसपास के लोग- फ्रेंड, फैमिली, मजबूती से मेरे साथ खड़े रहे और आज भी खड़े हैं। मैं चाहूंगी कि आगे भी उनका साथ ऐसे ही मेरे साथ बना रहे।
अपनी इस कामयाबी में परिवार को श्रेय देना चाहेंगी?
मेरे अचीवमेंट्स में मेरे परिवार का जो सबसे बड़ा सहयोग रहा शुरुआत में मेरा परिवार नहीं जानता था कि मैं इंडस्ट्री में आऊंगी। लेकिन जब मैंने यह फैसला किया कि मुझे फिल्में करनी हैं तो उन्होंने पूरा सपोर्ट किया। मेरी कोशिश हमेशा बैलंस लाइफ जीने की कोशिश की है। कभी यह नहीं सोचा कि फिल्म इज माई लाइफ। दरअसल, फिल्में मेरी जिंदगी हैं, लेकिन यह मेरी जिंदगी का हिस्सा हैं।
अपने करियर के उतार-चढ़ाव के दौर में आप खुद को बूस्ट-अप करने के लिए क्या करती थीं?
 देखिए मुश्किल दौर में आपके साथ आपकी फैमिली होती है। पापा की सलाह हमेशा मेरे लिए काफी मायने रखती थी। पापा इस इंडस्ट्री से थे, उन्होंने भी काफी उतार-चढ़ाव देखे हैं। अप्स ऐंड डाउन तो होते ही हैं। इसकी लिए सब तैयार होते हैं। चढ़ते सूरज को हर कोई सलाम करता है। यह सिर्फ हमारी इंडस्ट्री में ही नहीं बल्कि हर जगह होता है। मुश्किल दौर में बस आपकी फैमिली का सपोर्ट होना जरूरी होता है क्योंकि यह ऐसा दौरा होता है जब आपको पता चलता है कि असल में आपका दोस्त कौन है और कौन आपके दोस्त नहीं हैं?
आपने कमर्शल फिल्म की हैं, साउथ की फिल्में की, टीवी शोज किए... कैसा रहा आपका अनुभव?
 साउथ की ही नहीं, मैंने मराठी ,बंगाली फिल्में भी की हैं। लैंग्वेज फिल्में करने का मेरा अनुभव बहुत ही अच्छा रहा है यह मेरे लिए गर्व की बात है। फिल्म एक ऐसा जरिया है जो हमेशा यूनिटिड रहता है।
कितनी भी पॉलिटिक्स क्रिएट करो लेकिन फिल्में अपने आर्ट और कल्चर से जुड़ी रहती है और कला सरहद की सीमाओं से जुड़ी नहीं है। इसके अलावा, टीवी शोज चक दे बच्चे,कामेडी का महामुकाबला,इटस माई लाइफ से जुडने का मौका मिला और मैंने बहुत ज्यादा इंजॉय किया। यह टाइम काफी अच्छा रहा। मेरे बच्चे काफी छोटे थे इसलिए हफ्ते में एक दिन की शूटिंग के शेड्यूल से मैं आसानी से फैमिली और बच्चों को पूरा टाइम दे पाई।
शादी के बाद मस्त-मस्त गर्ल व्यस्त-व्यस्त गर्ल हो गई, तो कैसे मैंनेज करती हैं?
 जी हां, शादी के बाद काफी व्यस्त शेड्यूल हो जाता है। अब मल्टि-टास्किंग करती हूं। बच्चों के क्लासेज भी याद रखने पड़ते हैं। कभी उन्हें स्विमिंग के लिए लेकर जाना होता है, कभी फुटबॉल, कभी टेनिस। बेटी कथक सीखती है तो वहां भी साथ जाती हूं। मां का रोल तो निभाना ही पड़ता है क्योंकि शादी के बाद प्रायॉरिटीज बदल जाती हैं। मुझे लगता है कि फिल्में जिंदगी भर आती-जाती रहेंगी पर बच्चों का बचपन फिर कभी वापस नहीं आएगा। मेरे लिए यही ज्यादा मायने रखता है।
फिल्मों के अलावा कौन-कौन से शौक हैं?
 म्यूजिक सुनना, खुद को रिलैक्स करने के लिए टीवी शोज देखती हूं। क्रिकेट का बहुत शौक नहीं, लेकिन अब पति और बेटे की वजह से देख लेती हूं। मुझे बच्चों के साथ टाइम बिताना ज्यादा पसंद है।
आप जायरा डायमंड की ओपनिंग में पहुंची कैसा लग रहा है ?
बहुत ही अच्छा मेहसूस हो रहा है,क्योंकि इसके एक पहले फैंचजाइज मे मुझे बुलाया था । अनिल अग्रवाल जी मेरे परिवार जैसे संबध है,इसलिए चाह कर भी ओपनिंग कार्यक्रम को स्थागित नही कर पाई। वैसे भी इस शो रूम में ढेरा डिजायन और विरायटी है,जिससे मैं प्रभावित रही हॅू । 


Thursday, January 8, 2015

कोई भी बन सकता है स्टाइलिश: स्याली भगत

(प्रेमबाबू शर्मा)
यारियांघोस्ट, द ट्रेन, हल्ला बोल, गुडलक, पेइंग गेस्ट, राजधानी एक्सप्रेस, और चालू मूवी जैसी अनेकों फिल्मों में अभिनय करने वाली एक्ट्रेस सयाली भगत मानती है कि कलाकार का सघर्ष कभी खत्म नही होता । इसमें दो राय नही कि सियाली को काम हमेशा मिलता रहा, लेकिन उन्हे खास पहचान नहीं मिल पाई। बीते दिनों सियाली गैलेक्सीज प्रोडक्शनस द्वारा आयोजित होने वाले एक कॉन्टेस्ट स्टाइलिश दीवा के एक कार्यक्रम में मुख्यातिथि के रूप में उपस्थित थीं। इसके अलावा सियाली भगत इन दिनों फिल्म होम स्टे अलाइवमें भी काम कर रही है। हाल में उनसे उनके करियर को लेकर हुई पेश है बातचीत के अंश !
आप होम स्टेफिल्म जुडी है इसके बारे में कुछ बताएं ?
यह एक ऐसी लडकी कहानी है,जिसके साथ चैबीस घंटों के दौरान क्या-क्या हादसे पेश आते हैं । यह एक थ्रिलर सस्पेंस फिल्म है। इस फिल्म में हॉरर एलिमेंट्स भी हैं।
फिल्म में आपका किरदार क्या  है ?
फिल्म में मैंने अक्षरा नामक एक टीवी एंकर के रोल को निभाया है, जो टीवी एंकर होने की वजह से यह लड़की इतनी क्यूरियस है। फिल्म में मेरे आपोजिट अष्मित पटेल भी है। जो एक पुलिस ऑफिसर है।
लेकिन पहले भी इससे मिलते कथानक पर भी आप फिल्म कर चुकी हैं?
हा, आप घोस्ट की बात कर रहे हैं तो वह एक अलग तरह की फिल्म थी। उसे आप एक कैरिकेचर फिल्म कह सकते हैं। लेकिन यह एक पैरानॉर्मल फिल्म है। मेरा मानना है कि भूतके बाद अभी तक इस जॉनर की अच्छी फिल्म नहीं आई है ।

दर्जनों फिल्में करने के बाद भी बतौर अभिनेत्री आपको जो पहचान मिलनी चाहिये, लेकिन नही मिल पायी।
बतौर कलाकार मैं अच्छा काम करने में विश्वास करती हॅू। वही मैने किया। रही बात पहचान की,आज भी मेरे पास फिल्मों के आफर है और वैसे मेरी हर साल एक दो हिन्दी फिल्म तो रिलीज हो ही रही हैं।
आपको ऐसा नही लगता कि किसी कलाकर फिल्म हिट हो जाती है तो आपको दूसरी जगह से भी अच्छा रिस्पांस मिलना शुरू हो जाता है आपको शोज और इवेंट्स मिलने लगते हैं?
आपका कहना सच है, लेकिन फिल्म हिट का कोई पैमाना भी नही है। फिल्मोघोग में न तो मेरा कोई यहां गॉड फादर रहा और न ही कोई बैक। इसलिये जीवन यापन के लिए मेरे जैसे कलाकारों का काम करते रहना जरूरी होता है। रही शोज और इवेंट्स की, वह मैं कर ही रही हॅू। हाल में स्टालिस वीवा इवेंट से बतौर जज जुडी हॅू।
बालीवुड के अलावा दूसरी भाषा की फिल्में का आफर मिले तो करोगी ?
डेफिनेटली। आज मैं पंजाबी और कन्नड़ फिल्मों में हाईपेड एक्ट्रेस हूं। लेकिन मुझे अपनी मातृभाषा की फिल्म में काम नहीं मिला। इस बात को लेकर मुझे हैरानी भी है कि अभी तक किसी मराठी डायरेक्टर का मेरी तरफ ध्यान क्यों नहीं गया। इसका मुझे दुख भी है। लेकिन और मुझे महाराष्ट्रीयन होने पर गर्व है।
स्टालिस वीवा से कैसे जुडी ?
स्टालिस वीवा के तरूण माथुर ने मुझे गलैक्सीज से जुडनें का आफर दिया और उसके बारे में जानकारी दी तो यह अच्छा आफर लगा और मैं चवाह कर भी इंकार नही कर पायी। स्टालिस वीवा कलाकारों और माॅडलों को एक ंमंच देने के लिए बना है। जिसके माध्यम से पूरे देश में शोज और इवेंट्स किये जाएगें।
स्टाइलिस बनने के लिए क्या जरूरी हैं ?
स्टाइलिश कोई भी बन सकता है परन्तु उसके लिए एक जुनून, जज्बा व कड़ी मेहनत बहुत जरूरी है।
मिस इंडिया ब्यूटी कान्टेस्ट के समय उन्हें कौन सा राउंड ज्यादा मुश्किल लगा?

राउंड तो सारे ही मुश्किल थे परन्तु मैंने बहुत ही पैसन्ट होकर उनका जवाब दिया।
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Friday, January 30, 2015

यादगार ही किरदार करने की चाहः रवीना टंडन

(प्रेमबाबू शर्मा )
बॉलीवुड की मस्त-मस्त गर्ल रवीना टंडन फिर से सिल्वर स्क्रीन पर अपना जलवा बिखेरने जा रही हैं। रवीना ने शादी के बाद फिल्मों में काम करना काफी हद तक कम कर दिया है। लेकिन उनकी चाह है कि अब केवल यादगार ही किरदार करना चाहती है। उन्होंने बुढा होगा तेरा बाप और शोभना 7 नाइट्स में विवाह के बाद देखा गया। एक फिल्म बोम्बे वेलवेट में भी काम किया लेकिन फिल्म कब रीलिज होगी इस बारे में रवीना को भी नही पता। सिल्वर स्क्रीन पर एक फिर से आने का मन बना लिया है और अब रवीना अनुराग कश्यप की दो फिल्में में अपना जलवा दिखाती नजर आएगीं। हाल में वह दिल्ली में जायरा डायमंड शो रूम की ओपनिंग में पहुंची इसी दौरान उनसे मुलाकात हुई पेश प्रस्तुत मुलाकात के चंद अंश ।
शादी के पांच के बाद सिल्वर स्क्रीन पर एक फिर से आने का मन बना लिया कैसा लग रहा है ?
अच्छा लग रहा है कला एक ऐसा कीडा है जिसे कलाकार चाह कर भी नही भुला सकता है। लेकिन पंाच कैसे बीते पता ही नही चला। जब अनुराग ने फिल्म में काम करने का आफर दिया तो चाह कर भी मना नही कर पायी।
 यह सब क्या अचानक हुआ ?
जी। दरअसल,अनुराग जी हमेशा से ही मेरे प्रिय निर्देशक रहे हैं। वह हमेशा से ही चाहते थे कि मैं उनके साथ फिल्मों में काम करूं। मैंने उनकी दो फिल्मों में काम करना स्वीकार किया है। 
जहां तक मुझे याद है, तो आखिरी बार आपने अनुराग के साथ में फिल्म शूल की थीं ?
जी हाॅ। राम गोपाल वर्मा की इस फिल्म में अनुराग कश्यप ने कहानी भी लिखी थी। जबकि इसके डारेक्टर ई निवास थे। 
बदलते समय के चलते एक की समकालीन हीरोईनस मे माधुरी और जूही ने भी सिल्बर स्क्रीन पर वापिसी की  इसको लेकर क्सा सोचती है ?
माधुरी जूही का वापिसी पर मुझे खुशी है वे गुलाब गंैग नामक सिल्बर स्क्रीन पर वापिसी कर रही है इस फिल्म की कहानी और उसमें उनके किरदार काफी मजबूत है। मैं ऐसी ही यादगार किरदार निभाने की चाह रखती हॅू।
Raveena Tandon
दो दशक से ज्यादा फिल्म इंडस्ट्री में आपने काम किया , कैसा रहा आपका यह सफर?
अब तक बहुत ही अच्छा रहा है और आगे भी अच्छा रहेगा। मैं उन भाग्यशाली लोगों में हूं, जो इस इंडस्ट्री की पैदाइश हैं। मेरे पिता फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े हुए हैं उन्हें इंडस्ट्री में करीब 50 साल हो गए। मेरी परवरिश यहां हुई और मैं जानती हूं कि एक दिन में इंडस्ट्री में ही अंतिम सांस लूंगी। हर फील्ड, हर लाइन में कुछ ऊंच-नीच तो रहती ही है, मैं लकी हूं कि मेरे आसपास के लोग- फ्रेंड, फैमिली, मजबूती से मेरे साथ खड़े रहे और आज भी खड़े हैं। मैं चाहूंगी कि आगे भी उनका साथ ऐसे ही मेरे साथ बना रहे।
अपनी इस कामयाबी में परिवार को श्रेय देना चाहेंगी?
मेरे अचीवमेंट्स में मेरे परिवार का जो सबसे बड़ा सहयोग रहा शुरुआत में मेरा परिवार नहीं जानता था कि मैं इंडस्ट्री में आऊंगी। लेकिन जब मैंने यह फैसला किया कि मुझे फिल्में करनी हैं तो उन्होंने पूरा सपोर्ट किया। मेरी कोशिश हमेशा बैलंस लाइफ जीने की कोशिश की है। कभी यह नहीं सोचा कि फिल्म इज माई लाइफ। दरअसल, फिल्में मेरी जिंदगी हैं, लेकिन यह मेरी जिंदगी का हिस्सा हैं।
अपने करियर के उतार-चढ़ाव के दौर में आप खुद को बूस्ट-अप करने के लिए क्या करती थीं?
 देखिए मुश्किल दौर में आपके साथ आपकी फैमिली होती है। पापा की सलाह हमेशा मेरे लिए काफी मायने रखती थी। पापा इस इंडस्ट्री से थे, उन्होंने भी काफी उतार-चढ़ाव देखे हैं। अप्स ऐंड डाउन तो होते ही हैं। इसकी लिए सब तैयार होते हैं। चढ़ते सूरज को हर कोई सलाम करता है। यह सिर्फ हमारी इंडस्ट्री में ही नहीं बल्कि हर जगह होता है। मुश्किल दौर में बस आपकी फैमिली का सपोर्ट होना जरूरी होता है क्योंकि यह ऐसा दौरा होता है जब आपको पता चलता है कि असल में आपका दोस्त कौन है और कौन आपके दोस्त नहीं हैं?
आपने कमर्शल फिल्म की हैं, साउथ की फिल्में की, टीवी शोज किए... कैसा रहा आपका अनुभव?
 साउथ की ही नहीं, मैंने मराठी ,बंगाली फिल्में भी की हैं। लैंग्वेज फिल्में करने का मेरा अनुभव बहुत ही अच्छा रहा है यह मेरे लिए गर्व की बात है। फिल्म एक ऐसा जरिया है जो हमेशा यूनिटिड रहता है।
कितनी भी पॉलिटिक्स क्रिएट करो लेकिन फिल्में अपने आर्ट और कल्चर से जुड़ी रहती है और कला सरहद की सीमाओं से जुड़ी नहीं है। इसके अलावा, टीवी शोज चक दे बच्चे,कामेडी का महामुकाबला,इटस माई लाइफ से जुडने का मौका मिला और मैंने बहुत ज्यादा इंजॉय किया। यह टाइम काफी अच्छा रहा। मेरे बच्चे काफी छोटे थे इसलिए हफ्ते में एक दिन की शूटिंग के शेड्यूल से मैं आसानी से फैमिली और बच्चों को पूरा टाइम दे पाई।
शादी के बाद मस्त-मस्त गर्ल व्यस्त-व्यस्त गर्ल हो गई, तो कैसे मैंनेज करती हैं?
 जी हां, शादी के बाद काफी व्यस्त शेड्यूल हो जाता है। अब मल्टि-टास्किंग करती हूं। बच्चों के क्लासेज भी याद रखने पड़ते हैं। कभी उन्हें स्विमिंग के लिए लेकर जाना होता है, कभी फुटबॉल, कभी टेनिस। बेटी कथक सीखती है तो वहां भी साथ जाती हूं। मां का रोल तो निभाना ही पड़ता है क्योंकि शादी के बाद प्रायॉरिटीज बदल जाती हैं। मुझे लगता है कि फिल्में जिंदगी भर आती-जाती रहेंगी पर बच्चों का बचपन फिर कभी वापस नहीं आएगा। मेरे लिए यही ज्यादा मायने रखता है।
फिल्मों के अलावा कौन-कौन से शौक हैं?
 म्यूजिक सुनना, खुद को रिलैक्स करने के लिए टीवी शोज देखती हूं। क्रिकेट का बहुत शौक नहीं, लेकिन अब पति और बेटे की वजह से देख लेती हूं। मुझे बच्चों के साथ टाइम बिताना ज्यादा पसंद है।
आप जायरा डायमंड की ओपनिंग में पहुंची कैसा लग रहा है ?
बहुत ही अच्छा मेहसूस हो रहा है,क्योंकि इसके एक पहले फैंचजाइज मे मुझे बुलाया था । अनिल अग्रवाल जी मेरे परिवार जैसे संबध है,इसलिए चाह कर भी ओपनिंग कार्यक्रम को स्थागित नही कर पाई। वैसे भी इस शो रूम में ढेरा डिजायन और विरायटी है,जिससे मैं प्रभावित रही हॅू । 


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कोई भी बन सकता है स्टाइलिश: स्याली भगत

(प्रेमबाबू शर्मा)
यारियांघोस्ट, द ट्रेन, हल्ला बोल, गुडलक, पेइंग गेस्ट, राजधानी एक्सप्रेस, और चालू मूवी जैसी अनेकों फिल्मों में अभिनय करने वाली एक्ट्रेस सयाली भगत मानती है कि कलाकार का सघर्ष कभी खत्म नही होता । इसमें दो राय नही कि सियाली को काम हमेशा मिलता रहा, लेकिन उन्हे खास पहचान नहीं मिल पाई। बीते दिनों सियाली गैलेक्सीज प्रोडक्शनस द्वारा आयोजित होने वाले एक कॉन्टेस्ट स्टाइलिश दीवा के एक कार्यक्रम में मुख्यातिथि के रूप में उपस्थित थीं। इसके अलावा सियाली भगत इन दिनों फिल्म होम स्टे अलाइवमें भी काम कर रही है। हाल में उनसे उनके करियर को लेकर हुई पेश है बातचीत के अंश !
आप होम स्टेफिल्म जुडी है इसके बारे में कुछ बताएं ?
यह एक ऐसी लडकी कहानी है,जिसके साथ चैबीस घंटों के दौरान क्या-क्या हादसे पेश आते हैं । यह एक थ्रिलर सस्पेंस फिल्म है। इस फिल्म में हॉरर एलिमेंट्स भी हैं।
फिल्म में आपका किरदार क्या  है ?
फिल्म में मैंने अक्षरा नामक एक टीवी एंकर के रोल को निभाया है, जो टीवी एंकर होने की वजह से यह लड़की इतनी क्यूरियस है। फिल्म में मेरे आपोजिट अष्मित पटेल भी है। जो एक पुलिस ऑफिसर है।
लेकिन पहले भी इससे मिलते कथानक पर भी आप फिल्म कर चुकी हैं?
हा, आप घोस्ट की बात कर रहे हैं तो वह एक अलग तरह की फिल्म थी। उसे आप एक कैरिकेचर फिल्म कह सकते हैं। लेकिन यह एक पैरानॉर्मल फिल्म है। मेरा मानना है कि भूतके बाद अभी तक इस जॉनर की अच्छी फिल्म नहीं आई है ।

दर्जनों फिल्में करने के बाद भी बतौर अभिनेत्री आपको जो पहचान मिलनी चाहिये, लेकिन नही मिल पायी।
बतौर कलाकार मैं अच्छा काम करने में विश्वास करती हॅू। वही मैने किया। रही बात पहचान की,आज भी मेरे पास फिल्मों के आफर है और वैसे मेरी हर साल एक दो हिन्दी फिल्म तो रिलीज हो ही रही हैं।
आपको ऐसा नही लगता कि किसी कलाकर फिल्म हिट हो जाती है तो आपको दूसरी जगह से भी अच्छा रिस्पांस मिलना शुरू हो जाता है आपको शोज और इवेंट्स मिलने लगते हैं?
आपका कहना सच है, लेकिन फिल्म हिट का कोई पैमाना भी नही है। फिल्मोघोग में न तो मेरा कोई यहां गॉड फादर रहा और न ही कोई बैक। इसलिये जीवन यापन के लिए मेरे जैसे कलाकारों का काम करते रहना जरूरी होता है। रही शोज और इवेंट्स की, वह मैं कर ही रही हॅू। हाल में स्टालिस वीवा इवेंट से बतौर जज जुडी हॅू।
बालीवुड के अलावा दूसरी भाषा की फिल्में का आफर मिले तो करोगी ?
डेफिनेटली। आज मैं पंजाबी और कन्नड़ फिल्मों में हाईपेड एक्ट्रेस हूं। लेकिन मुझे अपनी मातृभाषा की फिल्म में काम नहीं मिला। इस बात को लेकर मुझे हैरानी भी है कि अभी तक किसी मराठी डायरेक्टर का मेरी तरफ ध्यान क्यों नहीं गया। इसका मुझे दुख भी है। लेकिन और मुझे महाराष्ट्रीयन होने पर गर्व है।
स्टालिस वीवा से कैसे जुडी ?
स्टालिस वीवा के तरूण माथुर ने मुझे गलैक्सीज से जुडनें का आफर दिया और उसके बारे में जानकारी दी तो यह अच्छा आफर लगा और मैं चवाह कर भी इंकार नही कर पायी। स्टालिस वीवा कलाकारों और माॅडलों को एक ंमंच देने के लिए बना है। जिसके माध्यम से पूरे देश में शोज और इवेंट्स किये जाएगें।
स्टाइलिस बनने के लिए क्या जरूरी हैं ?
स्टाइलिश कोई भी बन सकता है परन्तु उसके लिए एक जुनून, जज्बा व कड़ी मेहनत बहुत जरूरी है।
मिस इंडिया ब्यूटी कान्टेस्ट के समय उन्हें कौन सा राउंड ज्यादा मुश्किल लगा?

राउंड तो सारे ही मुश्किल थे परन्तु मैंने बहुत ही पैसन्ट होकर उनका जवाब दिया।