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Sunday, October 21, 2012

Snorkeling and boating trips at outlying islands


Snorkeling and boating trips at outlying islands arranged by Centra Coconut Beach Resort Samui

Sanjay Pahwa, Chandigarh/New Delhi: 
Snorkeling, boating, and kayaking at Koh Tan and Koh Mutsum, both of which are renowned diving and snorkeling spots, can be arranged for guests staying at Centra Coconut Beach Resort Samui, before or during their arrival. The two islands are within view of the resort, and are easily accessed from Samui. Koh Tan, also known as Coral Island, is a few hundred metres off the southwestern coast of Samui. A small island with no roads or cars and only one village, it is surrounded by a coral reef and with serene and sandy beaches, is an idyllic spot for snorkeling and sunbathing. Koh Mutsum is to the south of Koh Tan, and has a long and sandy beach that is ideal for picnics and barbeques. The intimately-scaled Centra Coconut Beach Resort Samui has 54 rooms and villas of living space including a furnished balcony or terrace. Perfect for couples and large enough for families, the accommodation includes pool view rooms and rooms with direct pool access, while the resort's seven villas each feature a Jacuzzi, a large living space and garden or ocean views. Thai and international cuisines with an emphasis on fresh seafood are served at the beachfront restaurant, and there is also a beach bar and a pool bar.

नई फिल्म ‘एक और शहादत’


Rambabu Sharma, delhi

आजाद फिल्मस की फिल्म ‘एक और शहादत’ सच्चाई और ईमानदारी की रह पर चलने वाले एक पुलिस इंस्पेक्टर  के डाकू बन जाने की कहानी है. समाज के भ्रष्ट नेता, ठेकेदार, राजनेता और पुलिस  इंस्पेक्टर शेर सिंह के आस पास घुमती कहानी एक ऐसे व्यक्ति की है जो डाकू बन कर भी ईमानदारी की रह पर चल कर समाज में फैली बुराई को जड़ से खत्म करने की सौगंध खाता है. डाकू शेर सिंह हर मुसीबत का सामना करते हुए न्याय की रह पर चलता है. उसकी दहाड सुन कर समाज के दुश्मनों में दहशत छा जाती है.

इस फिल्म के निर्माता निर्देशक राज अहमद की यह पहली फिल्म है, इससे पहले वह टेली फिल्म रौशनी और विडियोे फिल्म ‘हलाला’ बना चुके हैं. एक और शहादत की शूटिंग राजस्थान, हरयाणा और उत्तर प्रदेश में हुई है संगीतकार प्रदीप कुमार दस, गीतकार एम् वी खान हैं. फिल्म के मुख्य कलाकार हैं अष्फाक खान आजाद,तनवीर अहमद, सपना सेजावल, अली खान, मंजू सिसोदिया, सबीर अली, सुनीता राय, एम् वि खान, अनिल कुमार, महेंद्र ठाकुर, संजय पौरुष आदि.

फिल्म  19 अक्तूबर को प्रदर्शित हो रही है.


Monday, October 8, 2012

मासूमों के खून से रंगे इतिहास के पन्ने

- जिले में मासूमों की हत्याओं का नया नहीं है मामला
- कभी फिरौती तो कभी रंजिश बनी है हत्या का कारण

अमित सैनी, मुजफ्फरनगर। मुजफ्फरनगर इहितास के पन्ने मासूमों के लहू से रंगे हुए हैं। जिले में मासूमों की कत्लगाथा बहुत पुरानी है। कभी फिरौती तो कभी रंजिश, कभी संपत्ति की चाहत तो कभी अवैध संबंध और हवस की आंधी यहां बच्चों तथा किशोरों की हत्या का कारण बनी है। समय के साथ भले ही अतीत की तस्वीरें धुंधली होती जा रही हों, लेकिन जब कभी किसी बच्चे की हत्या का मामला प्रकाश में आता है तो यादें एकाएक ही ताजा होने लगती है। इस तरह के मामलों से जुड़े लोगों की धड़कने तेज और रूह कांप उठती है।
*
उदाहरण एक :छपार थाना क्षेत्र के खोजा नंगला निवासी मोमिन की पांच वर्षीया बेटी महविश का फिरौती के लिए पड़ौसी ने अपहरण कर लिया गया था। रात के समय में ही बच्ची की हत्या कर आरोपी शव के टुकड़े टुकड़े कर देवबंद थाना क्षेत्र के केतकी गांव के जंगल में फेंक आए थे। खुलासा होने पर पुलिस ने दो महिलाओं समेत चार को जेल भेजे थे।
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उदाहरण दो :मंसूरपुर थाना क्षेत्र के नोना गांव निवासी दलित संजय पुत्र हरिराम के ११ वर्षीय सावन और १० वर्षीय प्रियंका दो मार्च २०११ को रहस्यमय परिस्थितियों में घर के बाहर खेलते समय गायब हो गए थे। पांच दिन बाद दोनों के शव जंगल में पड़े मिले थे।
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उदाहरण तीन :सिविल लाईन थाना क्षेत्र के महमूदनगर से करीब डेढ़ वर्ष पूर्व छह वर्षीय अरबास का रंजिश के चलते अपहरण कर कत्ल कर दिया गया था। पुलिस ने इस मामले में पड़ौसियों को आरोपी बनाते हुए जेल भेजा था।
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उदाहरण चार :शहर कोतवाली क्षेत्र के न्याजूपुरा निवासी १२ वर्षीय हसीन शाहपुर थाना क्षेत्र के बसीकला निवासी अपने खालू हसीन के घर गया हुआ था। २६ दिसंबर २०११ की रात वह गायब हो गया। जिसका २९ दिसंबर को उमरपुर के जंगल में शव पड़ा मिला। खुलासा हुआ तो अवैध संबंध का मामला निकला। दरअसल, हसीन की खाला का किसी से अवैध संबंध चल रहे थे, जिनको उसने आपत्तिजनक स्थिति में देख लिया था। पोल खुलने के डर से खाला ने पे्रमी के साथ मिलकर उसकी हत्या की थी।
*
उदाहरण पांच :तितावी थाना क्षेत्र के अमीननगर निवासी बीरसिंह ने अपनी पत्नी मुकेश के साथ मिलकर २६ अगस्त २००६ को १२ वर्षीय बेटे अनुज और सास कश्मीरी की गला दबाकर हत्या कर दी थी। हत्या के पीछे कश्मीरी के नाम १२ बीघा जमीन और तांत्रिक क्रियाओं का कारण निकला था। जिसका खुलासा आरोपियों की छोटी बेटी ने पुलिस के सामने किया था।
*
उदाहरण छह :शहर कोतवाली क्षेत्र के प्रेमपुरी निवासी छह वर्षीय बच्चे की एक-डेढ़ साल पहले रंजिश के चलते हत्या कर दी गई थी।

दो किशारों का बेरहमी से कत्ल


-कुकर्म के बाद की गई हत्या

अमित सैनी, मुजफ्फरनगर। 
शनिवार की देर शाम कुकर्म के बाद दो मासूम किशारों की बड़ी बेरहमी से कत्ल कर दिया गया। वारदात के बाद शवों को थाने के पीछे चंद कदमों की दूरी पर एक गन्ने के खेत में फेंककर आरोपी फरार हो गए। वारदात से गुस्साएं लोगों ने दिल्ली-देहरादून हाइवे पर करीब तीन घंटे तक जाम लगाए रखा। इस दौरान पुलिस और ग्रामीणों के बीच तीखी झड़पें भी हुई। पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर एक आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है।
जनपद मुजफ्फरनगर के दिल्ली-देहरादून हाईवे पर स्थित छपार निवासी १२ वर्षीय आमिर पुत्र मुदा और १३ वर्षीय साकिब पुत्र मंगता उर्फ इमरान शनिवार सुबह रहस्यमय परिस्थितियों में गायब हो गए थे। काफी प्रयास के बाद भी उनका पता नहीं पाया था। 
रविवार सुबह सात बजे दोनों के शव थाने के पीछे चंद कदमों की दूरी पर स्थित आशू पुत्र इसराइल के खेत में पड़े मिले। आमिर के पेट में दरांती घोंपी गई थी जबकि साकिब की हत्या उसी के बनियान से गला दबाकर की गई थी। सूचना मिलते ही आसपास के हजारों ग्रामीण मौके पर जा पहुंचे और हंगामे करने लगे। जिस पर एसपी सिटी राजकमल यादव, सीओ सदर आईपीएस पूनम छपार, पुरकाजी, चरथावल, महिला थाना पुलिस और एसओजी समेत मौके पर पहुंच गए। उत्तेजित ग्रामीणों ने हत्यारों की गिरफ्तारी और मृतकों के परिजनों को मुआवजा दिलाने की मांग के चलते सुबह साढ़े आठ से साढ़े ग्यारह बजे तक जाम लगाए रखा। पंचनामा भरने के लिए पुलिस को भारी मशक्कत करनी पड़ी और इस दौरान पुलिस व ग्रामीणों के बीच जमकर झड़प भी हुई। पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर छपार में रह रहे थिथकी निवासी साहिम को गिरफ्तार कर लिया है। जिसने बताया कि कुकर्म के बाद दोनों की पोल खुलने के डर से हत्या की गई। पुलिस उसके फरार साथियों की तलाश में जुट गई है। एसएसपी बीबी सिंह का कहना है कि मुख्य आरोपी को गिरफ्तार करने के साथ ही उसके साथियों को तलाश किया जा रहा है।

बाइक सिखाने के पीछे छिपा था शैतानी चेहरा


-पोल खुलने के डर से दिया दोहरे हत्याकांड के अंजाम

अमित सैनी, मुजफ्फरनगर।
मुजफ्फरनगर के छपार कस्बे में घटित हुए सनसनीखेज और हौलनाक दोहरे हत्याकांड के पीछे आरोपियों का मकशद कुकर्म ही था। लेकिन किशारों के भारी विरोध और पोल खुलने के डर से आरोपियों ने उनको मौत के घाट उतार दिया। आरोपी मृतकों को बाइक सिखाने के बहाने जंगल में ले गए थे। जिनको ले जाते हुए एक ग्रामीण ने देख लिया था। 
छपार निवासी १२ वर्षीय आमिर पुत्र मुदा और १३ वर्षीय साकिब पुत्र मंगता उर्फ इमरान पिछले तीन-चार दिन से गांव में जोहड़ की रखवाली करने वाले मुर्सलीन के बेटे साहिम से बाइक चलाना सीख रहे थे। एसओ छपार संजय गर्ग ने बताया कि परिजनों के डर से दोनों शनिवार सुबह जंगल से चारा और लकड़ी चुनने का बहाना बनाकर घर से निकले थे। बीच रास्ते में साहिम उनको बाइक लिए मिले, जो पहले उन्हें पड़ौसी गांव खुड्डा के जंगल में ले गया। योजनाबद्ध तरीके से साहिम के तीन दोस्त बुड़ीना खुर्द निवासी अरशद, बहेड़ी निवासी जान मौहम्मद और सुजडू निवासी राकिब भी उनको जंगल मिले। यह लोग दोनों को थाने के पीछे आशू पुत्र इसराइल के खेत में ले गए और दोनों के साथ कुकर्म किया। हालांकि दोनों ने भारी विरोध किया, लेकिन आरोपियों ने उनके हाथ-पैर बांधकर घटना को अंजाम दिया और फिर पोल खुलने के डर से दोनों की हत्या कर दी। आमिर के पेट में दरांती गड़ा दी, जो पेट में ही फंसी रह गई। जबकि साकिब के उसी के बनियान से फांसी लगाकर मारा गया। वारदात के बाद चारों आरोपी वहां से फरार हो गए। सुबह घटना का खुलासा उस समय हो सका, जब खेत मालिक आशू पानी चलाने खेत में पहुंचा और वहां दोनों बच्चों के शव पड़े देखे।

सजग होती पुलिस तो बच सकती थी दोनों की जान

किशारों के रहस्यमय परिस्थितियों में गायब होने के तीन घंटे बाद ही परिजनों ने पुलिस को सूचना दे दी थी। लेकिन पुलिस ने मामले को हल्के में लिया और दोनों किशोरों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा। यहीं कारण रहा कि पुलिस को ग्रामीणों के आक्रोश का सामना करना पड़ा।
मासूम आमिर और साकिब घर से लगभग दस बजे निकले थे। दोनों १२ बजे भी वापस नहीं लौटे तो परिजनों को चिंता सताने लगी और दोनों को हर संभंव ठिकानों पर तलाश किया, लेकिन जब दोनों का कहीं कोई अता-पता नहीं चल सका तो करीब एक बजे परिजन छपार थाने पहुंचे और शिकायत कर उनको तलाश करने की गुहार लगाई। पुलिस ने मामले को हल्के में लेते हुए परिजनों से यह कहकर पल्ला झाड़ लिया कि कहीं घुमने चले गए होगें, घूम-फिर कर शाम तक लौट आएगें। जिस पर वह वापस लौट गए। इसी दौरान छपार बस स्टैंड पर सेब बेचने वाले मुखलतीब ने उनको बताया कि दोनों बच्चों को उसने साहिम के साथ बाइक पर घूमते हुए खुड्डा के जंगल में देखा है। परिजन एक बार फिर से पुलिस के पास पहुंचे और मामले से अवगत कराया। लेकिन पुलिस ने एक नहीं सुनी। देर रात करीब डेढ़ बजे परिजनों ने साहिम को दबोच लिया और ग्राम प्रधान के घर पर उससे पूछताछ की, लेकिन उसने कुछ नहीं बताया। पुलिस को भी सूचना दी गई, मगर पुलिस नहीं पहुंची तो परिजन गुपचाप बैठ गए। सुबह शव मिले तो परिजनों की आशंका पर साहिम को पुलिस ने उठाया और सख्ताई से पूछताछ की। जिसने थोड़ी ही देर में तोते की मानिंद सबकुछ उगल दिया। पुलिस की कार्य प्रणाली से क्षुब्ध लोगों ने हाइवे जाम कर अपना रोष प्रकट किया। जिसका सामना तीखी झड़प के रूप में पुलिस को करना पड़ा।

भावुक हुए एसपी सिटी, खेत से खुद उठाकर लाए शव

मौके पर पहुंचे एसपी सिटी राजकमल यादव मासूमों की निर्दयता से की गई हत्या से इतने भावुक हुए कि वह खुद ही कीचड़ भरे खेत में घुस गए। खुद ही शव को दोनों हाथों में उठाकर खेत से बाहर आए। हालांकि इसी दौरान उनको खबर मिली कि गुस्साएं लोगों ने हाइवे पर जाम लगा दिया है। जिसके चलते वह हाइवे स्थित जाम स्पॉट पर जा पहुंचे। भारी विरोध के बाद पुलिस ने पंचनामें भरकर दोनों शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिए।

रोती-बिलखती रही दोनों की मां

दोनों किशारों की हत्या की खबर मिलते ही उनके परिजनों में हड़कंप मच गया। आमिर की मां फैमिदा और साकिब की मां नईमा बदहवाश सी रोती-बिलखती मौके पर जाने की ओर दौड़ पड़ी। दोनों का रो-रोकर बुरा हाल था। दोनों के अंदर गुस्से का गुबार उस समय फूट पड़ा, जब महिला पुलिस उनको ढांढस बंधाने लगी। हाइवे पर पहुंचकर दोनों सड़क पर बैठ गई। पुलिस और ग्रामीणों ने उनको उठाने का प्रयास भी किया, लेकिन वह नहीं मानी।

Friday, July 27, 2012

आज़ाद देश का गुलाम


आज भले ही देश को आज़ादी मिले 65 बरस बीत चुके हो लेकिन पिछले 15 बरसो से लोहे की बेडियों में जकड़े उमेश उर्फ़ काका को भी अपनी आज़ादी का इंतजार है की कब उसके पैरो की बेडियों को खोलकर उसे आज़ादी दिलाई जाएगी | लोहे की बेडियों में कैद उमेश को किसी अंग्रेजी हुकूमत ने कैद नहीं किया बल्कि उसके खुद अपने परिजनों की कैद में है | सड़क किनारे पर बनी इस झोपडी में ही दिन की शुरुआत करने वाले उमेश की रात भी इसी में गुजर जाती है जिसका उसे पता ही नहीं चलता | बूढ़े हो चुके माँ बाप भी अपने जिगर के इस टुकड़े से तंग आ चुके है | 
सवस्थ व्यक्ति के लिए मानसिक संतुलन का ठीक होना आवश्यक है | यदि किसी व्यक्ति का मानसिक संतुलन बिगड़ जाये तों उसका जीवन नर्क के सामान हो जाता है |कभी कभी ज्यादा तनाव या फिर ज्यादा ख़ुशी मिलने से भी व्यक्ति का मानसिक संतुलन बिगड़ जाता है | ऐसा ही हुआ  मुजफ़्फ़र नगर के फलोदा गाँव में पिछले 10 बरसो से उमेश उर्फ़ काका का मानसिक संतुलन ऐसा बिगड़ा की उलटी सीधी हरकते करने लगा जिससे गाँव के लोग ही नहीं बल्कि परिजन भी उसकी हरकतों से तंग आ गये जिसके चलते 15 सालो से उसे लोहे की जंजीरों में बांध कर रखा जाता है | दरअसल जंजीरों में जकड़ा उमेश 12 साल पहले स्वस्थ था और अपनी पत्नी चन्द्र किरण  व दो  बच्चो के साथ अपना जीवन व्यतीत कर रहा था |लेकिन उसके भाँग का नशा करने के शोक ने उसका जीवन नर्क कर दिया और उलटी सीधी हरकते करने लगा जिससे परेशान होकर पत्नी भी अपने बच्चो को लेकर उमेश को छोड़कर चली गयी | बूढ़े माँ बाप ने काफी इलाज कराया लेकिन सब व्यर्थ था | 
धीरे धीरे उमेश की उदंडता बढती गयी जिसपर परिजनों ने उसके पैरो में लोहे की बेडिया डाल दी | हाथो  में  लाठी और चेहरे पर झुर्रियों का जाल लिए ये बूढ़ा व्यक्ति बुधराम उमेश का पिता है जिसकी झील सी इन गहरी आँखों में गम के सिवा कुछ भी नहीं है ये रोना तों चाहता है शायद वक़्त के थपेड़ो और मुफलिसी ने इसके आँसुओ को सोख लिया है | हमेशा अपने बेटे के ठीक हो जाने के लिए इश्वर से प्रार्थना करता है वंही इस बात को भी स्वीकार करता है की अपने जिगर के इस टुकड़े को बरसो से जंजीरों में कैद कर रखा है | उमेश की माँ प्रेमो भी अपने इस लाल से तंग आ चुकी है उसका कहना है की जिस उम्र में उनकी सेवा बेटे को करनी चाहिए थी लेकिन आज इन बुधो को अपने जवान बेटे के सभी काम काज करने पड़ते है,आज उनके पास अपने बेटे के इलाज करने के पैसे भी नहीं है मुश्किल से दो वक़्त की रोटी गाँव से चलती है | गाँव वालो को नुकसान न पंहुचा दे इसी लिए उमेश को जंजीरों में जकड़ा गया है | अपने दुखी मान से उमेश की माँ भी अब अपने बेटे से अपना पीछा छुड़ाना चाहती है | वो  चाहती है की कोई भी इसे ऐसी जगह भर्ती करा दे जंहा उनका बेटा इलाज से सही हो सके |
ग्रामीण भी काका को जंजीरों में जकड़े रहने को गलत मानते है मगर मदद के लिए कोई सामने आने को तैयार नहीं है \ ग्राम प्रधान का कहना है की कई बार इनकी मदद के लिए आवाज उठाई  मगर उनकी लाचारी ओर गरीबी के चलते प्रशासन के कानो पर भी जू नहीं रेंगी | 
जिला चिकित्सा अधिकारी से जब इस युवक के बारे में पूछा गया तो उन्होंने जानकारी ना होने के साथ साथ हर संभव मदद की बात कही | खुद जिला चिकित्सा अधिकारी भी लम्बे समय से जंजीरों में जकड़े रहने के कारण कई गंभीर बिमारी हो जाने की संभावना जाता रहे है | साथ ही चिकित्सको द्वारा उमेश का मेडिकल जाँच कराकर आगे की कार्यवाही की बात कहते है | मुख्य चिकित्सा अधिकारी भी जंजीरों में इस तरह से किसी भी युवक को कैद में रखने को गैर कानूनी भी मानते है | 
आज भारत देश को आज़ाद हुये भले ही ६२ बरस हो चुके हो लेकिन उमेश के पैरो में पड़ी इन लोहे की बेडियों को देखकर लगता है की उमेश आज भी  आज़ाद देश का गुलाम है | हालाकि यह सिर्फ उसके मानसिक संतुलन ठीक न होने के कारण जिन बूढ़े माँ बाप को बुढ़ापे में अपने बेटे से सेवा करने का सहारा होता है आज वही माँ बाप अपने जवान बेटे का सहारा बने है और उसकी मन से सेवा कर रहे है | उन्हें इंतजार है उस फ़रिश्ते की जो उनके बेटे को सही जगह भर्ती कराकर उसका इलाज करा सके | 

- Amit Saini

Sunday, October 21, 2012

Snorkeling and boating trips at outlying islands


Snorkeling and boating trips at outlying islands arranged by Centra Coconut Beach Resort Samui

Sanjay Pahwa, Chandigarh/New Delhi: 
Snorkeling, boating, and kayaking at Koh Tan and Koh Mutsum, both of which are renowned diving and snorkeling spots, can be arranged for guests staying at Centra Coconut Beach Resort Samui, before or during their arrival. The two islands are within view of the resort, and are easily accessed from Samui. Koh Tan, also known as Coral Island, is a few hundred metres off the southwestern coast of Samui. A small island with no roads or cars and only one village, it is surrounded by a coral reef and with serene and sandy beaches, is an idyllic spot for snorkeling and sunbathing. Koh Mutsum is to the south of Koh Tan, and has a long and sandy beach that is ideal for picnics and barbeques. The intimately-scaled Centra Coconut Beach Resort Samui has 54 rooms and villas of living space including a furnished balcony or terrace. Perfect for couples and large enough for families, the accommodation includes pool view rooms and rooms with direct pool access, while the resort's seven villas each feature a Jacuzzi, a large living space and garden or ocean views. Thai and international cuisines with an emphasis on fresh seafood are served at the beachfront restaurant, and there is also a beach bar and a pool bar.

नई फिल्म ‘एक और शहादत’


Rambabu Sharma, delhi

आजाद फिल्मस की फिल्म ‘एक और शहादत’ सच्चाई और ईमानदारी की रह पर चलने वाले एक पुलिस इंस्पेक्टर  के डाकू बन जाने की कहानी है. समाज के भ्रष्ट नेता, ठेकेदार, राजनेता और पुलिस  इंस्पेक्टर शेर सिंह के आस पास घुमती कहानी एक ऐसे व्यक्ति की है जो डाकू बन कर भी ईमानदारी की रह पर चल कर समाज में फैली बुराई को जड़ से खत्म करने की सौगंध खाता है. डाकू शेर सिंह हर मुसीबत का सामना करते हुए न्याय की रह पर चलता है. उसकी दहाड सुन कर समाज के दुश्मनों में दहशत छा जाती है.

इस फिल्म के निर्माता निर्देशक राज अहमद की यह पहली फिल्म है, इससे पहले वह टेली फिल्म रौशनी और विडियोे फिल्म ‘हलाला’ बना चुके हैं. एक और शहादत की शूटिंग राजस्थान, हरयाणा और उत्तर प्रदेश में हुई है संगीतकार प्रदीप कुमार दस, गीतकार एम् वी खान हैं. फिल्म के मुख्य कलाकार हैं अष्फाक खान आजाद,तनवीर अहमद, सपना सेजावल, अली खान, मंजू सिसोदिया, सबीर अली, सुनीता राय, एम् वि खान, अनिल कुमार, महेंद्र ठाकुर, संजय पौरुष आदि.

फिल्म  19 अक्तूबर को प्रदर्शित हो रही है.


Monday, October 8, 2012

मासूमों के खून से रंगे इतिहास के पन्ने

- जिले में मासूमों की हत्याओं का नया नहीं है मामला
- कभी फिरौती तो कभी रंजिश बनी है हत्या का कारण

अमित सैनी, मुजफ्फरनगर। मुजफ्फरनगर इहितास के पन्ने मासूमों के लहू से रंगे हुए हैं। जिले में मासूमों की कत्लगाथा बहुत पुरानी है। कभी फिरौती तो कभी रंजिश, कभी संपत्ति की चाहत तो कभी अवैध संबंध और हवस की आंधी यहां बच्चों तथा किशोरों की हत्या का कारण बनी है। समय के साथ भले ही अतीत की तस्वीरें धुंधली होती जा रही हों, लेकिन जब कभी किसी बच्चे की हत्या का मामला प्रकाश में आता है तो यादें एकाएक ही ताजा होने लगती है। इस तरह के मामलों से जुड़े लोगों की धड़कने तेज और रूह कांप उठती है।
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उदाहरण एक :छपार थाना क्षेत्र के खोजा नंगला निवासी मोमिन की पांच वर्षीया बेटी महविश का फिरौती के लिए पड़ौसी ने अपहरण कर लिया गया था। रात के समय में ही बच्ची की हत्या कर आरोपी शव के टुकड़े टुकड़े कर देवबंद थाना क्षेत्र के केतकी गांव के जंगल में फेंक आए थे। खुलासा होने पर पुलिस ने दो महिलाओं समेत चार को जेल भेजे थे।
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उदाहरण दो :मंसूरपुर थाना क्षेत्र के नोना गांव निवासी दलित संजय पुत्र हरिराम के ११ वर्षीय सावन और १० वर्षीय प्रियंका दो मार्च २०११ को रहस्यमय परिस्थितियों में घर के बाहर खेलते समय गायब हो गए थे। पांच दिन बाद दोनों के शव जंगल में पड़े मिले थे।
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उदाहरण तीन :सिविल लाईन थाना क्षेत्र के महमूदनगर से करीब डेढ़ वर्ष पूर्व छह वर्षीय अरबास का रंजिश के चलते अपहरण कर कत्ल कर दिया गया था। पुलिस ने इस मामले में पड़ौसियों को आरोपी बनाते हुए जेल भेजा था।
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उदाहरण चार :शहर कोतवाली क्षेत्र के न्याजूपुरा निवासी १२ वर्षीय हसीन शाहपुर थाना क्षेत्र के बसीकला निवासी अपने खालू हसीन के घर गया हुआ था। २६ दिसंबर २०११ की रात वह गायब हो गया। जिसका २९ दिसंबर को उमरपुर के जंगल में शव पड़ा मिला। खुलासा हुआ तो अवैध संबंध का मामला निकला। दरअसल, हसीन की खाला का किसी से अवैध संबंध चल रहे थे, जिनको उसने आपत्तिजनक स्थिति में देख लिया था। पोल खुलने के डर से खाला ने पे्रमी के साथ मिलकर उसकी हत्या की थी।
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उदाहरण पांच :तितावी थाना क्षेत्र के अमीननगर निवासी बीरसिंह ने अपनी पत्नी मुकेश के साथ मिलकर २६ अगस्त २००६ को १२ वर्षीय बेटे अनुज और सास कश्मीरी की गला दबाकर हत्या कर दी थी। हत्या के पीछे कश्मीरी के नाम १२ बीघा जमीन और तांत्रिक क्रियाओं का कारण निकला था। जिसका खुलासा आरोपियों की छोटी बेटी ने पुलिस के सामने किया था।
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उदाहरण छह :शहर कोतवाली क्षेत्र के प्रेमपुरी निवासी छह वर्षीय बच्चे की एक-डेढ़ साल पहले रंजिश के चलते हत्या कर दी गई थी।

दो किशारों का बेरहमी से कत्ल


-कुकर्म के बाद की गई हत्या

अमित सैनी, मुजफ्फरनगर। 
शनिवार की देर शाम कुकर्म के बाद दो मासूम किशारों की बड़ी बेरहमी से कत्ल कर दिया गया। वारदात के बाद शवों को थाने के पीछे चंद कदमों की दूरी पर एक गन्ने के खेत में फेंककर आरोपी फरार हो गए। वारदात से गुस्साएं लोगों ने दिल्ली-देहरादून हाइवे पर करीब तीन घंटे तक जाम लगाए रखा। इस दौरान पुलिस और ग्रामीणों के बीच तीखी झड़पें भी हुई। पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर एक आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है।
जनपद मुजफ्फरनगर के दिल्ली-देहरादून हाईवे पर स्थित छपार निवासी १२ वर्षीय आमिर पुत्र मुदा और १३ वर्षीय साकिब पुत्र मंगता उर्फ इमरान शनिवार सुबह रहस्यमय परिस्थितियों में गायब हो गए थे। काफी प्रयास के बाद भी उनका पता नहीं पाया था। 
रविवार सुबह सात बजे दोनों के शव थाने के पीछे चंद कदमों की दूरी पर स्थित आशू पुत्र इसराइल के खेत में पड़े मिले। आमिर के पेट में दरांती घोंपी गई थी जबकि साकिब की हत्या उसी के बनियान से गला दबाकर की गई थी। सूचना मिलते ही आसपास के हजारों ग्रामीण मौके पर जा पहुंचे और हंगामे करने लगे। जिस पर एसपी सिटी राजकमल यादव, सीओ सदर आईपीएस पूनम छपार, पुरकाजी, चरथावल, महिला थाना पुलिस और एसओजी समेत मौके पर पहुंच गए। उत्तेजित ग्रामीणों ने हत्यारों की गिरफ्तारी और मृतकों के परिजनों को मुआवजा दिलाने की मांग के चलते सुबह साढ़े आठ से साढ़े ग्यारह बजे तक जाम लगाए रखा। पंचनामा भरने के लिए पुलिस को भारी मशक्कत करनी पड़ी और इस दौरान पुलिस व ग्रामीणों के बीच जमकर झड़प भी हुई। पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर छपार में रह रहे थिथकी निवासी साहिम को गिरफ्तार कर लिया है। जिसने बताया कि कुकर्म के बाद दोनों की पोल खुलने के डर से हत्या की गई। पुलिस उसके फरार साथियों की तलाश में जुट गई है। एसएसपी बीबी सिंह का कहना है कि मुख्य आरोपी को गिरफ्तार करने के साथ ही उसके साथियों को तलाश किया जा रहा है।

बाइक सिखाने के पीछे छिपा था शैतानी चेहरा


-पोल खुलने के डर से दिया दोहरे हत्याकांड के अंजाम

अमित सैनी, मुजफ्फरनगर।
मुजफ्फरनगर के छपार कस्बे में घटित हुए सनसनीखेज और हौलनाक दोहरे हत्याकांड के पीछे आरोपियों का मकशद कुकर्म ही था। लेकिन किशारों के भारी विरोध और पोल खुलने के डर से आरोपियों ने उनको मौत के घाट उतार दिया। आरोपी मृतकों को बाइक सिखाने के बहाने जंगल में ले गए थे। जिनको ले जाते हुए एक ग्रामीण ने देख लिया था। 
छपार निवासी १२ वर्षीय आमिर पुत्र मुदा और १३ वर्षीय साकिब पुत्र मंगता उर्फ इमरान पिछले तीन-चार दिन से गांव में जोहड़ की रखवाली करने वाले मुर्सलीन के बेटे साहिम से बाइक चलाना सीख रहे थे। एसओ छपार संजय गर्ग ने बताया कि परिजनों के डर से दोनों शनिवार सुबह जंगल से चारा और लकड़ी चुनने का बहाना बनाकर घर से निकले थे। बीच रास्ते में साहिम उनको बाइक लिए मिले, जो पहले उन्हें पड़ौसी गांव खुड्डा के जंगल में ले गया। योजनाबद्ध तरीके से साहिम के तीन दोस्त बुड़ीना खुर्द निवासी अरशद, बहेड़ी निवासी जान मौहम्मद और सुजडू निवासी राकिब भी उनको जंगल मिले। यह लोग दोनों को थाने के पीछे आशू पुत्र इसराइल के खेत में ले गए और दोनों के साथ कुकर्म किया। हालांकि दोनों ने भारी विरोध किया, लेकिन आरोपियों ने उनके हाथ-पैर बांधकर घटना को अंजाम दिया और फिर पोल खुलने के डर से दोनों की हत्या कर दी। आमिर के पेट में दरांती गड़ा दी, जो पेट में ही फंसी रह गई। जबकि साकिब के उसी के बनियान से फांसी लगाकर मारा गया। वारदात के बाद चारों आरोपी वहां से फरार हो गए। सुबह घटना का खुलासा उस समय हो सका, जब खेत मालिक आशू पानी चलाने खेत में पहुंचा और वहां दोनों बच्चों के शव पड़े देखे।

सजग होती पुलिस तो बच सकती थी दोनों की जान

किशारों के रहस्यमय परिस्थितियों में गायब होने के तीन घंटे बाद ही परिजनों ने पुलिस को सूचना दे दी थी। लेकिन पुलिस ने मामले को हल्के में लिया और दोनों किशोरों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा। यहीं कारण रहा कि पुलिस को ग्रामीणों के आक्रोश का सामना करना पड़ा।
मासूम आमिर और साकिब घर से लगभग दस बजे निकले थे। दोनों १२ बजे भी वापस नहीं लौटे तो परिजनों को चिंता सताने लगी और दोनों को हर संभंव ठिकानों पर तलाश किया, लेकिन जब दोनों का कहीं कोई अता-पता नहीं चल सका तो करीब एक बजे परिजन छपार थाने पहुंचे और शिकायत कर उनको तलाश करने की गुहार लगाई। पुलिस ने मामले को हल्के में लेते हुए परिजनों से यह कहकर पल्ला झाड़ लिया कि कहीं घुमने चले गए होगें, घूम-फिर कर शाम तक लौट आएगें। जिस पर वह वापस लौट गए। इसी दौरान छपार बस स्टैंड पर सेब बेचने वाले मुखलतीब ने उनको बताया कि दोनों बच्चों को उसने साहिम के साथ बाइक पर घूमते हुए खुड्डा के जंगल में देखा है। परिजन एक बार फिर से पुलिस के पास पहुंचे और मामले से अवगत कराया। लेकिन पुलिस ने एक नहीं सुनी। देर रात करीब डेढ़ बजे परिजनों ने साहिम को दबोच लिया और ग्राम प्रधान के घर पर उससे पूछताछ की, लेकिन उसने कुछ नहीं बताया। पुलिस को भी सूचना दी गई, मगर पुलिस नहीं पहुंची तो परिजन गुपचाप बैठ गए। सुबह शव मिले तो परिजनों की आशंका पर साहिम को पुलिस ने उठाया और सख्ताई से पूछताछ की। जिसने थोड़ी ही देर में तोते की मानिंद सबकुछ उगल दिया। पुलिस की कार्य प्रणाली से क्षुब्ध लोगों ने हाइवे जाम कर अपना रोष प्रकट किया। जिसका सामना तीखी झड़प के रूप में पुलिस को करना पड़ा।

भावुक हुए एसपी सिटी, खेत से खुद उठाकर लाए शव

मौके पर पहुंचे एसपी सिटी राजकमल यादव मासूमों की निर्दयता से की गई हत्या से इतने भावुक हुए कि वह खुद ही कीचड़ भरे खेत में घुस गए। खुद ही शव को दोनों हाथों में उठाकर खेत से बाहर आए। हालांकि इसी दौरान उनको खबर मिली कि गुस्साएं लोगों ने हाइवे पर जाम लगा दिया है। जिसके चलते वह हाइवे स्थित जाम स्पॉट पर जा पहुंचे। भारी विरोध के बाद पुलिस ने पंचनामें भरकर दोनों शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिए।

रोती-बिलखती रही दोनों की मां

दोनों किशारों की हत्या की खबर मिलते ही उनके परिजनों में हड़कंप मच गया। आमिर की मां फैमिदा और साकिब की मां नईमा बदहवाश सी रोती-बिलखती मौके पर जाने की ओर दौड़ पड़ी। दोनों का रो-रोकर बुरा हाल था। दोनों के अंदर गुस्से का गुबार उस समय फूट पड़ा, जब महिला पुलिस उनको ढांढस बंधाने लगी। हाइवे पर पहुंचकर दोनों सड़क पर बैठ गई। पुलिस और ग्रामीणों ने उनको उठाने का प्रयास भी किया, लेकिन वह नहीं मानी।

Friday, July 27, 2012

आज़ाद देश का गुलाम


आज भले ही देश को आज़ादी मिले 65 बरस बीत चुके हो लेकिन पिछले 15 बरसो से लोहे की बेडियों में जकड़े उमेश उर्फ़ काका को भी अपनी आज़ादी का इंतजार है की कब उसके पैरो की बेडियों को खोलकर उसे आज़ादी दिलाई जाएगी | लोहे की बेडियों में कैद उमेश को किसी अंग्रेजी हुकूमत ने कैद नहीं किया बल्कि उसके खुद अपने परिजनों की कैद में है | सड़क किनारे पर बनी इस झोपडी में ही दिन की शुरुआत करने वाले उमेश की रात भी इसी में गुजर जाती है जिसका उसे पता ही नहीं चलता | बूढ़े हो चुके माँ बाप भी अपने जिगर के इस टुकड़े से तंग आ चुके है | 
सवस्थ व्यक्ति के लिए मानसिक संतुलन का ठीक होना आवश्यक है | यदि किसी व्यक्ति का मानसिक संतुलन बिगड़ जाये तों उसका जीवन नर्क के सामान हो जाता है |कभी कभी ज्यादा तनाव या फिर ज्यादा ख़ुशी मिलने से भी व्यक्ति का मानसिक संतुलन बिगड़ जाता है | ऐसा ही हुआ  मुजफ़्फ़र नगर के फलोदा गाँव में पिछले 10 बरसो से उमेश उर्फ़ काका का मानसिक संतुलन ऐसा बिगड़ा की उलटी सीधी हरकते करने लगा जिससे गाँव के लोग ही नहीं बल्कि परिजन भी उसकी हरकतों से तंग आ गये जिसके चलते 15 सालो से उसे लोहे की जंजीरों में बांध कर रखा जाता है | दरअसल जंजीरों में जकड़ा उमेश 12 साल पहले स्वस्थ था और अपनी पत्नी चन्द्र किरण  व दो  बच्चो के साथ अपना जीवन व्यतीत कर रहा था |लेकिन उसके भाँग का नशा करने के शोक ने उसका जीवन नर्क कर दिया और उलटी सीधी हरकते करने लगा जिससे परेशान होकर पत्नी भी अपने बच्चो को लेकर उमेश को छोड़कर चली गयी | बूढ़े माँ बाप ने काफी इलाज कराया लेकिन सब व्यर्थ था | 
धीरे धीरे उमेश की उदंडता बढती गयी जिसपर परिजनों ने उसके पैरो में लोहे की बेडिया डाल दी | हाथो  में  लाठी और चेहरे पर झुर्रियों का जाल लिए ये बूढ़ा व्यक्ति बुधराम उमेश का पिता है जिसकी झील सी इन गहरी आँखों में गम के सिवा कुछ भी नहीं है ये रोना तों चाहता है शायद वक़्त के थपेड़ो और मुफलिसी ने इसके आँसुओ को सोख लिया है | हमेशा अपने बेटे के ठीक हो जाने के लिए इश्वर से प्रार्थना करता है वंही इस बात को भी स्वीकार करता है की अपने जिगर के इस टुकड़े को बरसो से जंजीरों में कैद कर रखा है | उमेश की माँ प्रेमो भी अपने इस लाल से तंग आ चुकी है उसका कहना है की जिस उम्र में उनकी सेवा बेटे को करनी चाहिए थी लेकिन आज इन बुधो को अपने जवान बेटे के सभी काम काज करने पड़ते है,आज उनके पास अपने बेटे के इलाज करने के पैसे भी नहीं है मुश्किल से दो वक़्त की रोटी गाँव से चलती है | गाँव वालो को नुकसान न पंहुचा दे इसी लिए उमेश को जंजीरों में जकड़ा गया है | अपने दुखी मान से उमेश की माँ भी अब अपने बेटे से अपना पीछा छुड़ाना चाहती है | वो  चाहती है की कोई भी इसे ऐसी जगह भर्ती करा दे जंहा उनका बेटा इलाज से सही हो सके |
ग्रामीण भी काका को जंजीरों में जकड़े रहने को गलत मानते है मगर मदद के लिए कोई सामने आने को तैयार नहीं है \ ग्राम प्रधान का कहना है की कई बार इनकी मदद के लिए आवाज उठाई  मगर उनकी लाचारी ओर गरीबी के चलते प्रशासन के कानो पर भी जू नहीं रेंगी | 
जिला चिकित्सा अधिकारी से जब इस युवक के बारे में पूछा गया तो उन्होंने जानकारी ना होने के साथ साथ हर संभव मदद की बात कही | खुद जिला चिकित्सा अधिकारी भी लम्बे समय से जंजीरों में जकड़े रहने के कारण कई गंभीर बिमारी हो जाने की संभावना जाता रहे है | साथ ही चिकित्सको द्वारा उमेश का मेडिकल जाँच कराकर आगे की कार्यवाही की बात कहते है | मुख्य चिकित्सा अधिकारी भी जंजीरों में इस तरह से किसी भी युवक को कैद में रखने को गैर कानूनी भी मानते है | 
आज भारत देश को आज़ाद हुये भले ही ६२ बरस हो चुके हो लेकिन उमेश के पैरो में पड़ी इन लोहे की बेडियों को देखकर लगता है की उमेश आज भी  आज़ाद देश का गुलाम है | हालाकि यह सिर्फ उसके मानसिक संतुलन ठीक न होने के कारण जिन बूढ़े माँ बाप को बुढ़ापे में अपने बेटे से सेवा करने का सहारा होता है आज वही माँ बाप अपने जवान बेटे का सहारा बने है और उसकी मन से सेवा कर रहे है | उन्हें इंतजार है उस फ़रिश्ते की जो उनके बेटे को सही जगह भर्ती कराकर उसका इलाज करा सके | 

- Amit Saini