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Wednesday, April 29, 2015

"कायर" किसान को उकसाने मजबूर करने वालो पर मुकदमा क्यों नहीं...?


विकास बालियान। 


बात सही है धनकड़ की... असहमत हो ही नहीं सकते। आत्महत्या कायरता पूर्ण अपराध है। ये सत्य है ये अपराध है। ऐसा अपराधी बच जाए तो उसे गिरफ्तार किया जाता है। उसे सजा दी जाती है। ऐसे अपराधी के साथ रहना भी नहीं चाहिए। साथ देना भी नहीं चाहिए। मगर एक सवाल है। सिक्के के 2 पहलु है। आत्महत्या के इस खेल में भी किराफार अकेला नहीं है ...2 है। एक जो आत्महत्या करता है 1 जो उसे ये कदम उठाने को उकसाता है मजबूर करता है। आत्महत्या जैसा महा आत्मघाती कदम कोइ किसी मज़बूरी में उठाता है।

भारतीय कानून में साफ़ है आत्महत्या के लिए उकसाने या मजबूर करने वाले के खिलाफ IPC के तहत कानूनी कार्यवाही हो। उसे सज़ा दी जाए। जो आत्महत्या के लिए किसी को मजबूर करता है। किसान आत्महत्या  कर रहा है। कायरता है। गैर क़ानूनी है। अपराध है। मगर किसान को इस कृत्य के लिए उकसाने वाला मजबूर करने वाला कौन है। उसे तत्काल गिरफ्तार कर सज़ा दी जाए। उस पर मुकदमा चलाया जाए।

  • क्यों नहीं मिल रहा किसान को उसकी फसल का लाभकारी मुल्य?
  • क्यों नहीं होता किसान का फदल डालने के बाद भी 2-2 साल तक भुगतान?
  • क्यों बिकती है किसान की फसल 2-2, 3-3 रुपये किलो?

  • क्यूँ नहीं सरकारी खरीद केन्द्रों  पर होती किसान की पूरी फसल की खरीद?

  • क्यों किसान को 4 % कर्ज देने के बाद वसूली होती है 16 % ब्याज की?
  • क्यों किसान पर लगता है चक्रवर्ती पर चक्रवर्ती ब्याज?
  • क्यों किसान को नहीं मिलता फदल बीमा योजना का लाभ?
  • क्यों 2 लाख के क़र्ज़ के लिए 30 लाख की जमीन बंधक बनाई जाती है?
  • क्यूँ किसान के हालात को समझती नहीं सरकार?
  • क्यों क्यों क्यों......?
  • आखिर क्यों का जवाब देती क्यों नहीं सरकार....?

इस क्यों का जवाब नहीं देने वाली सरकारों ने ही किया किसान को आत्म हत्या के लिए मजबूर। आत्महत्या के लिए उकसाने वाली जिम्मेदार ये सरकारे है। जिनमे आप भी शामिल हो। फिर क्यों नहीं किसान के इस कायरतापूर्ण कदम के लिए किसान को उकसाने या मजबूर करने के लिए आप लोगो पर क्रिमिनल धाराओ में मुकदमा चलाया जाए। 

,,,,,,जवाब है तो दो जवाब??

लाडलों को न दें "मौत का सामान"!

  • - छात्रों की मौत का कारण बन रहे दुपहिया वाहन!
  • - सैंकड़ों छात्र-छात्राएं गंवा चुके हैं अपनी जिंदगी!

अमित सैनी।
अभिभावक अपने लाड़लों को हाईस्पीड बाइक के रूप में 'मौत का सामान' न दें, क्योंकि अब तक न जाने कितने दुपहिया वाहन सवार छात्रों की जिंदगी को डोर टूट चुकी है। आंकड़े साक्षी हैं कि सुरक्षा मानकों को धता बताकर सड़कों पर राईडिंग करने वाले नौजवानों की मौत का कारण दुपहिया वाहन ही हैं।




यातायात पुलिस लोगों को सड़क के नियमों को फोलो करने की हिदायत देते-देते थक चुकी है। 'जल्दी से देर भली', 'हेलमेट जरूर लगाएं', 'दुपहिया वाहनों पर दो से अधिक न बैठें', 'बिना लाइसेंस वाहन न चलाएं'... आदि स्लोगनों के जरिए विभाग वाहन चालकों को चेताते रहते हैं। बावजूद इसके इस ओर कोई ध्यान नहीं देता। अब तो स्कूल-कॉलेज में छात्र-छात्राओं का बाइक-स्कूटर आदि से जाना फैशन बन गया है। 

पब्लिक स्कूल हो या सरकारी.... बाइक और स्कूटर खड़े करने की जगह नहीं है। छोटी उम्र में ही अभिभावक अपने बच्चों को दुपहिया वाहन दे रहे हैं। 125 से लेकर 250 सीसी की बाइकें लेकर नौनिहाल सड़कों पर दौड़ रहे हैं, जिनमें से अधिकांश के पास न लाइसेंस हैं और न ही वें हेलमेट लगाते हैं। नियम-कानून की धज्जियां उड़ाने वाले छात्र हादसों का शिकार बन रहे हैं। 

Tuesday, April 28, 2015

Aryans Group of Colleges, Chandigarh is going to organize its “27th Aryans Job Fest”

Mohali , (Kulbir Singh Kalsi):-
Aryans Group of Colleges, Chandigarh is going to organize its “27th Aryans Job Fest” on 30th  Aprilat Aryans Campus situated on Chandigarh-Patiala Highway, near Chandigarh. More than 30 Big and Small Companies will be participating in the Fest. Free online Registration can be done from Aryans Website www.aryans.edu.in with other details of the participating companies.

Prof. B.S Sidhu, Registrar, Aryans Group while giving this information said that thousands of candidates from North India are expected to participate in the Fest. In this fest, job opportunities would be available for B.Tech, MBA, BBA, BCA, BA, B.Com, M.Tech, Diploma, ITI etc. He further informed that candidates should carry 10 copies of their resumes and passport size photographs.

Ms Tejinder Kaur, TPO, Aryans Group of Colleges said that the one day fest will witness participation from leading companies that are looking to engage with prospective employees. The fair will give an opportunity to final year students and fresh graduates from all streams to access career options available in various leading organizations under one roof. 

बच्चो की आत्महत्या के कारण और समाधान को दर्शाती फिल्म 'थिंक अगेन'

​प्रेमबाबू शर्मा​!
आये दिन हम टीवी चैनेलो ,अखबारों में बच्चो द्वारा किये गए आत्महत्याओं के बारे में पढ़ते और सुनते है .कोई बच्चा गरीबी से तंग आकर आत्महत्या कर लेता है तो कोई परीक्षा में फ़ैल होने पर ,पर क्या उनके द्वारा उठाये गानेवाले यह कदम सही है ,हम सब का यही जवाब ना ही होगा.पर इन सभी आत्महत्याओं को  होने से कैसे हम बचा सकते है यह बहुत जल्द एक फिल्म के माध्यम से निर्माता -निर्देशक विक्रांत मोरे दर्शाने जा रहे है .
पिछले दिनों मुंबई के अँधेरी स्तिथ केफेस्टा रेस्टोरेंट में फिल्म 'थिंक अगेन ' का प्रेस कॉन्फ्रेंस किया गया जहा इस फिल्म से जुड़े सभी स्टार कास्ट सहित सिंगर इरफ़ान खान भी मौजूद थे जिन्होंने इस फिल्म में बेहतरीन गाना गाया है.'थिंक अगेन ' यह फिल्म बच्चो द्वारा किये जाने वाले आत्महत्याओं के कारण और उसके समाधान को फिल्म के माध्यम से दर्शको तक पहुचाया जाएगा.इस फिल्म में लगभग सभी कलाकार नए है पर सभी कलाकारों का चयन उन्हें बेहतरीन अभिनय को देख कर चुना गया है जो अपने काम में बहुत ही अच्छे और गंभीर है.प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान सभी कलाकारों ने अपने-अपने किरदारों के बारे में मीडिया से बातचीत की.

विंग्स टू बॉलीवुड एंटरटेनमेंट के बैनर तले बनने जा रही इस फिल्म में कलाकारों में आशीष स्वामी और दिव्या लता  मुख्य भूमिका में नजर आएँगे वही बाकि कलाकारों में संजना ,जहान सैयद,हासिम अहमद ,मुस्ताक खान,गणेश यादव और गुलशन पाण्डेय शामिल है.फिल्म की शूटिंग बहुत जल्द मुंबई और महाराष्ट्र के अन्य लोकेशनों पर शूट की जाएगी .
निर्माता/निर्देशक-विक्रांत मोरे ,लेखक -अमित गुप्ता,एसोसिएट डायरेक्टर-धनञ्जय सिंह,संगीत-आर .के,रॉक (रंजीत),गीतकार-अलीम ताहिर,कैमरामैन-राजेश मिश्रा,पी,आर .ओ -संजय भूषण पटियाला.
मुख्य कलाकार- आशीष स्वामी , दिव्या लता  ,संजना ,जहान सैयद,हासिम अहमद ,मुस्ताक खान,गणेश यादव और गुलशन पाण्डेय  इत्यादि .

Tuesday, April 14, 2015

सनी लियोनी के इवेन्ट मैनेजर फिल्म ‘प्लेजर’ से बने हीरो

 -प्रेमबाबू शर्मा
मशहूर हॉट स्टार सनी लियोनी की किस्मत है कि उन्होंने कम ही समय में अपने आप को एक स्थापित हीरोईन की लाइन में शामिल कर लिया। रागिनी एम एम एस ,जिस्म 2 के बाद हाल मे रीलिज एक पहली लीला में उनके काम की तारीॅ हो रही है, उसकी बढती ख्याति के फायदा उनके इवेन्ट मैनेजर पियूष आनंद को भी मिला । उनको बतौर हीरो निर्माता निर्देशक सी पी सिंह ने मौका दिया है फिल्म ‘प्लेजर’ मंे। ‘साईं बाबा फिल्म्स 97’ के बैनर तले बनी इस फिल्म का निर्देशन सी पी सिंह और ब्रह्मानंद, नवोदित नायक हैं पियूष आनंद और लीना विश्वकर्मा, साथ हैं प्रीत चैधरी, आकांक्षा सिंह और स्नेहल, संगीत मैनाक नंदी का है, कहानी का कांसेप्ट सी पी सिंह, कैमरा कमल लोखंडवाला  है, इ पी हैं रविश आनंद और मिनी शर्मा, एसोसिएट निर्माता हैं मदनपाल शर्मा मोरादाबाद। फिल्म का पोस्ट प्रोडक्शन ब्लेस्सफिल्म्स एंड पीआर में किया गया है, फिल्म प्रदर्शन के लिए तैयार है।
‘साईं बाबा फिल्म्स-97’ ने पियूष आनंद को तीन फिल्मो के लिए साइन किया है।  


Friday, January 30, 2015

यादगार ही किरदार करने की चाहः रवीना टंडन

(प्रेमबाबू शर्मा )
बॉलीवुड की मस्त-मस्त गर्ल रवीना टंडन फिर से सिल्वर स्क्रीन पर अपना जलवा बिखेरने जा रही हैं। रवीना ने शादी के बाद फिल्मों में काम करना काफी हद तक कम कर दिया है। लेकिन उनकी चाह है कि अब केवल यादगार ही किरदार करना चाहती है। उन्होंने बुढा होगा तेरा बाप और शोभना 7 नाइट्स में विवाह के बाद देखा गया। एक फिल्म बोम्बे वेलवेट में भी काम किया लेकिन फिल्म कब रीलिज होगी इस बारे में रवीना को भी नही पता। सिल्वर स्क्रीन पर एक फिर से आने का मन बना लिया है और अब रवीना अनुराग कश्यप की दो फिल्में में अपना जलवा दिखाती नजर आएगीं। हाल में वह दिल्ली में जायरा डायमंड शो रूम की ओपनिंग में पहुंची इसी दौरान उनसे मुलाकात हुई पेश प्रस्तुत मुलाकात के चंद अंश ।
शादी के पांच के बाद सिल्वर स्क्रीन पर एक फिर से आने का मन बना लिया कैसा लग रहा है ?
अच्छा लग रहा है कला एक ऐसा कीडा है जिसे कलाकार चाह कर भी नही भुला सकता है। लेकिन पंाच कैसे बीते पता ही नही चला। जब अनुराग ने फिल्म में काम करने का आफर दिया तो चाह कर भी मना नही कर पायी।
 यह सब क्या अचानक हुआ ?
जी। दरअसल,अनुराग जी हमेशा से ही मेरे प्रिय निर्देशक रहे हैं। वह हमेशा से ही चाहते थे कि मैं उनके साथ फिल्मों में काम करूं। मैंने उनकी दो फिल्मों में काम करना स्वीकार किया है। 
जहां तक मुझे याद है, तो आखिरी बार आपने अनुराग के साथ में फिल्म शूल की थीं ?
जी हाॅ। राम गोपाल वर्मा की इस फिल्म में अनुराग कश्यप ने कहानी भी लिखी थी। जबकि इसके डारेक्टर ई निवास थे। 
बदलते समय के चलते एक की समकालीन हीरोईनस मे माधुरी और जूही ने भी सिल्बर स्क्रीन पर वापिसी की  इसको लेकर क्सा सोचती है ?
माधुरी जूही का वापिसी पर मुझे खुशी है वे गुलाब गंैग नामक सिल्बर स्क्रीन पर वापिसी कर रही है इस फिल्म की कहानी और उसमें उनके किरदार काफी मजबूत है। मैं ऐसी ही यादगार किरदार निभाने की चाह रखती हॅू।
Raveena Tandon
दो दशक से ज्यादा फिल्म इंडस्ट्री में आपने काम किया , कैसा रहा आपका यह सफर?
अब तक बहुत ही अच्छा रहा है और आगे भी अच्छा रहेगा। मैं उन भाग्यशाली लोगों में हूं, जो इस इंडस्ट्री की पैदाइश हैं। मेरे पिता फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े हुए हैं उन्हें इंडस्ट्री में करीब 50 साल हो गए। मेरी परवरिश यहां हुई और मैं जानती हूं कि एक दिन में इंडस्ट्री में ही अंतिम सांस लूंगी। हर फील्ड, हर लाइन में कुछ ऊंच-नीच तो रहती ही है, मैं लकी हूं कि मेरे आसपास के लोग- फ्रेंड, फैमिली, मजबूती से मेरे साथ खड़े रहे और आज भी खड़े हैं। मैं चाहूंगी कि आगे भी उनका साथ ऐसे ही मेरे साथ बना रहे।
अपनी इस कामयाबी में परिवार को श्रेय देना चाहेंगी?
मेरे अचीवमेंट्स में मेरे परिवार का जो सबसे बड़ा सहयोग रहा शुरुआत में मेरा परिवार नहीं जानता था कि मैं इंडस्ट्री में आऊंगी। लेकिन जब मैंने यह फैसला किया कि मुझे फिल्में करनी हैं तो उन्होंने पूरा सपोर्ट किया। मेरी कोशिश हमेशा बैलंस लाइफ जीने की कोशिश की है। कभी यह नहीं सोचा कि फिल्म इज माई लाइफ। दरअसल, फिल्में मेरी जिंदगी हैं, लेकिन यह मेरी जिंदगी का हिस्सा हैं।
अपने करियर के उतार-चढ़ाव के दौर में आप खुद को बूस्ट-अप करने के लिए क्या करती थीं?
 देखिए मुश्किल दौर में आपके साथ आपकी फैमिली होती है। पापा की सलाह हमेशा मेरे लिए काफी मायने रखती थी। पापा इस इंडस्ट्री से थे, उन्होंने भी काफी उतार-चढ़ाव देखे हैं। अप्स ऐंड डाउन तो होते ही हैं। इसकी लिए सब तैयार होते हैं। चढ़ते सूरज को हर कोई सलाम करता है। यह सिर्फ हमारी इंडस्ट्री में ही नहीं बल्कि हर जगह होता है। मुश्किल दौर में बस आपकी फैमिली का सपोर्ट होना जरूरी होता है क्योंकि यह ऐसा दौरा होता है जब आपको पता चलता है कि असल में आपका दोस्त कौन है और कौन आपके दोस्त नहीं हैं?
आपने कमर्शल फिल्म की हैं, साउथ की फिल्में की, टीवी शोज किए... कैसा रहा आपका अनुभव?
 साउथ की ही नहीं, मैंने मराठी ,बंगाली फिल्में भी की हैं। लैंग्वेज फिल्में करने का मेरा अनुभव बहुत ही अच्छा रहा है यह मेरे लिए गर्व की बात है। फिल्म एक ऐसा जरिया है जो हमेशा यूनिटिड रहता है।
कितनी भी पॉलिटिक्स क्रिएट करो लेकिन फिल्में अपने आर्ट और कल्चर से जुड़ी रहती है और कला सरहद की सीमाओं से जुड़ी नहीं है। इसके अलावा, टीवी शोज चक दे बच्चे,कामेडी का महामुकाबला,इटस माई लाइफ से जुडने का मौका मिला और मैंने बहुत ज्यादा इंजॉय किया। यह टाइम काफी अच्छा रहा। मेरे बच्चे काफी छोटे थे इसलिए हफ्ते में एक दिन की शूटिंग के शेड्यूल से मैं आसानी से फैमिली और बच्चों को पूरा टाइम दे पाई।
शादी के बाद मस्त-मस्त गर्ल व्यस्त-व्यस्त गर्ल हो गई, तो कैसे मैंनेज करती हैं?
 जी हां, शादी के बाद काफी व्यस्त शेड्यूल हो जाता है। अब मल्टि-टास्किंग करती हूं। बच्चों के क्लासेज भी याद रखने पड़ते हैं। कभी उन्हें स्विमिंग के लिए लेकर जाना होता है, कभी फुटबॉल, कभी टेनिस। बेटी कथक सीखती है तो वहां भी साथ जाती हूं। मां का रोल तो निभाना ही पड़ता है क्योंकि शादी के बाद प्रायॉरिटीज बदल जाती हैं। मुझे लगता है कि फिल्में जिंदगी भर आती-जाती रहेंगी पर बच्चों का बचपन फिर कभी वापस नहीं आएगा। मेरे लिए यही ज्यादा मायने रखता है।
फिल्मों के अलावा कौन-कौन से शौक हैं?
 म्यूजिक सुनना, खुद को रिलैक्स करने के लिए टीवी शोज देखती हूं। क्रिकेट का बहुत शौक नहीं, लेकिन अब पति और बेटे की वजह से देख लेती हूं। मुझे बच्चों के साथ टाइम बिताना ज्यादा पसंद है।
आप जायरा डायमंड की ओपनिंग में पहुंची कैसा लग रहा है ?
बहुत ही अच्छा मेहसूस हो रहा है,क्योंकि इसके एक पहले फैंचजाइज मे मुझे बुलाया था । अनिल अग्रवाल जी मेरे परिवार जैसे संबध है,इसलिए चाह कर भी ओपनिंग कार्यक्रम को स्थागित नही कर पाई। वैसे भी इस शो रूम में ढेरा डिजायन और विरायटी है,जिससे मैं प्रभावित रही हॅू । 


Wednesday, April 29, 2015

"कायर" किसान को उकसाने मजबूर करने वालो पर मुकदमा क्यों नहीं...?


विकास बालियान। 


बात सही है धनकड़ की... असहमत हो ही नहीं सकते। आत्महत्या कायरता पूर्ण अपराध है। ये सत्य है ये अपराध है। ऐसा अपराधी बच जाए तो उसे गिरफ्तार किया जाता है। उसे सजा दी जाती है। ऐसे अपराधी के साथ रहना भी नहीं चाहिए। साथ देना भी नहीं चाहिए। मगर एक सवाल है। सिक्के के 2 पहलु है। आत्महत्या के इस खेल में भी किराफार अकेला नहीं है ...2 है। एक जो आत्महत्या करता है 1 जो उसे ये कदम उठाने को उकसाता है मजबूर करता है। आत्महत्या जैसा महा आत्मघाती कदम कोइ किसी मज़बूरी में उठाता है।

भारतीय कानून में साफ़ है आत्महत्या के लिए उकसाने या मजबूर करने वाले के खिलाफ IPC के तहत कानूनी कार्यवाही हो। उसे सज़ा दी जाए। जो आत्महत्या के लिए किसी को मजबूर करता है। किसान आत्महत्या  कर रहा है। कायरता है। गैर क़ानूनी है। अपराध है। मगर किसान को इस कृत्य के लिए उकसाने वाला मजबूर करने वाला कौन है। उसे तत्काल गिरफ्तार कर सज़ा दी जाए। उस पर मुकदमा चलाया जाए।

  • क्यों नहीं मिल रहा किसान को उसकी फसल का लाभकारी मुल्य?
  • क्यों नहीं होता किसान का फदल डालने के बाद भी 2-2 साल तक भुगतान?
  • क्यों बिकती है किसान की फसल 2-2, 3-3 रुपये किलो?

  • क्यूँ नहीं सरकारी खरीद केन्द्रों  पर होती किसान की पूरी फसल की खरीद?

  • क्यों किसान को 4 % कर्ज देने के बाद वसूली होती है 16 % ब्याज की?
  • क्यों किसान पर लगता है चक्रवर्ती पर चक्रवर्ती ब्याज?
  • क्यों किसान को नहीं मिलता फदल बीमा योजना का लाभ?
  • क्यों 2 लाख के क़र्ज़ के लिए 30 लाख की जमीन बंधक बनाई जाती है?
  • क्यूँ किसान के हालात को समझती नहीं सरकार?
  • क्यों क्यों क्यों......?
  • आखिर क्यों का जवाब देती क्यों नहीं सरकार....?

इस क्यों का जवाब नहीं देने वाली सरकारों ने ही किया किसान को आत्म हत्या के लिए मजबूर। आत्महत्या के लिए उकसाने वाली जिम्मेदार ये सरकारे है। जिनमे आप भी शामिल हो। फिर क्यों नहीं किसान के इस कायरतापूर्ण कदम के लिए किसान को उकसाने या मजबूर करने के लिए आप लोगो पर क्रिमिनल धाराओ में मुकदमा चलाया जाए। 

,,,,,,जवाब है तो दो जवाब??

लाडलों को न दें "मौत का सामान"!

  • - छात्रों की मौत का कारण बन रहे दुपहिया वाहन!
  • - सैंकड़ों छात्र-छात्राएं गंवा चुके हैं अपनी जिंदगी!

अमित सैनी।
अभिभावक अपने लाड़लों को हाईस्पीड बाइक के रूप में 'मौत का सामान' न दें, क्योंकि अब तक न जाने कितने दुपहिया वाहन सवार छात्रों की जिंदगी को डोर टूट चुकी है। आंकड़े साक्षी हैं कि सुरक्षा मानकों को धता बताकर सड़कों पर राईडिंग करने वाले नौजवानों की मौत का कारण दुपहिया वाहन ही हैं।




यातायात पुलिस लोगों को सड़क के नियमों को फोलो करने की हिदायत देते-देते थक चुकी है। 'जल्दी से देर भली', 'हेलमेट जरूर लगाएं', 'दुपहिया वाहनों पर दो से अधिक न बैठें', 'बिना लाइसेंस वाहन न चलाएं'... आदि स्लोगनों के जरिए विभाग वाहन चालकों को चेताते रहते हैं। बावजूद इसके इस ओर कोई ध्यान नहीं देता। अब तो स्कूल-कॉलेज में छात्र-छात्राओं का बाइक-स्कूटर आदि से जाना फैशन बन गया है। 

पब्लिक स्कूल हो या सरकारी.... बाइक और स्कूटर खड़े करने की जगह नहीं है। छोटी उम्र में ही अभिभावक अपने बच्चों को दुपहिया वाहन दे रहे हैं। 125 से लेकर 250 सीसी की बाइकें लेकर नौनिहाल सड़कों पर दौड़ रहे हैं, जिनमें से अधिकांश के पास न लाइसेंस हैं और न ही वें हेलमेट लगाते हैं। नियम-कानून की धज्जियां उड़ाने वाले छात्र हादसों का शिकार बन रहे हैं। 

Tuesday, April 28, 2015

Aryans Group of Colleges, Chandigarh is going to organize its “27th Aryans Job Fest”

Mohali , (Kulbir Singh Kalsi):-
Aryans Group of Colleges, Chandigarh is going to organize its “27th Aryans Job Fest” on 30th  Aprilat Aryans Campus situated on Chandigarh-Patiala Highway, near Chandigarh. More than 30 Big and Small Companies will be participating in the Fest. Free online Registration can be done from Aryans Website www.aryans.edu.in with other details of the participating companies.

Prof. B.S Sidhu, Registrar, Aryans Group while giving this information said that thousands of candidates from North India are expected to participate in the Fest. In this fest, job opportunities would be available for B.Tech, MBA, BBA, BCA, BA, B.Com, M.Tech, Diploma, ITI etc. He further informed that candidates should carry 10 copies of their resumes and passport size photographs.

Ms Tejinder Kaur, TPO, Aryans Group of Colleges said that the one day fest will witness participation from leading companies that are looking to engage with prospective employees. The fair will give an opportunity to final year students and fresh graduates from all streams to access career options available in various leading organizations under one roof. 

बच्चो की आत्महत्या के कारण और समाधान को दर्शाती फिल्म 'थिंक अगेन'

​प्रेमबाबू शर्मा​!
आये दिन हम टीवी चैनेलो ,अखबारों में बच्चो द्वारा किये गए आत्महत्याओं के बारे में पढ़ते और सुनते है .कोई बच्चा गरीबी से तंग आकर आत्महत्या कर लेता है तो कोई परीक्षा में फ़ैल होने पर ,पर क्या उनके द्वारा उठाये गानेवाले यह कदम सही है ,हम सब का यही जवाब ना ही होगा.पर इन सभी आत्महत्याओं को  होने से कैसे हम बचा सकते है यह बहुत जल्द एक फिल्म के माध्यम से निर्माता -निर्देशक विक्रांत मोरे दर्शाने जा रहे है .
पिछले दिनों मुंबई के अँधेरी स्तिथ केफेस्टा रेस्टोरेंट में फिल्म 'थिंक अगेन ' का प्रेस कॉन्फ्रेंस किया गया जहा इस फिल्म से जुड़े सभी स्टार कास्ट सहित सिंगर इरफ़ान खान भी मौजूद थे जिन्होंने इस फिल्म में बेहतरीन गाना गाया है.'थिंक अगेन ' यह फिल्म बच्चो द्वारा किये जाने वाले आत्महत्याओं के कारण और उसके समाधान को फिल्म के माध्यम से दर्शको तक पहुचाया जाएगा.इस फिल्म में लगभग सभी कलाकार नए है पर सभी कलाकारों का चयन उन्हें बेहतरीन अभिनय को देख कर चुना गया है जो अपने काम में बहुत ही अच्छे और गंभीर है.प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान सभी कलाकारों ने अपने-अपने किरदारों के बारे में मीडिया से बातचीत की.

विंग्स टू बॉलीवुड एंटरटेनमेंट के बैनर तले बनने जा रही इस फिल्म में कलाकारों में आशीष स्वामी और दिव्या लता  मुख्य भूमिका में नजर आएँगे वही बाकि कलाकारों में संजना ,जहान सैयद,हासिम अहमद ,मुस्ताक खान,गणेश यादव और गुलशन पाण्डेय शामिल है.फिल्म की शूटिंग बहुत जल्द मुंबई और महाराष्ट्र के अन्य लोकेशनों पर शूट की जाएगी .
निर्माता/निर्देशक-विक्रांत मोरे ,लेखक -अमित गुप्ता,एसोसिएट डायरेक्टर-धनञ्जय सिंह,संगीत-आर .के,रॉक (रंजीत),गीतकार-अलीम ताहिर,कैमरामैन-राजेश मिश्रा,पी,आर .ओ -संजय भूषण पटियाला.
मुख्य कलाकार- आशीष स्वामी , दिव्या लता  ,संजना ,जहान सैयद,हासिम अहमद ,मुस्ताक खान,गणेश यादव और गुलशन पाण्डेय  इत्यादि .

Tuesday, April 14, 2015

सनी लियोनी के इवेन्ट मैनेजर फिल्म ‘प्लेजर’ से बने हीरो

 -प्रेमबाबू शर्मा
मशहूर हॉट स्टार सनी लियोनी की किस्मत है कि उन्होंने कम ही समय में अपने आप को एक स्थापित हीरोईन की लाइन में शामिल कर लिया। रागिनी एम एम एस ,जिस्म 2 के बाद हाल मे रीलिज एक पहली लीला में उनके काम की तारीॅ हो रही है, उसकी बढती ख्याति के फायदा उनके इवेन्ट मैनेजर पियूष आनंद को भी मिला । उनको बतौर हीरो निर्माता निर्देशक सी पी सिंह ने मौका दिया है फिल्म ‘प्लेजर’ मंे। ‘साईं बाबा फिल्म्स 97’ के बैनर तले बनी इस फिल्म का निर्देशन सी पी सिंह और ब्रह्मानंद, नवोदित नायक हैं पियूष आनंद और लीना विश्वकर्मा, साथ हैं प्रीत चैधरी, आकांक्षा सिंह और स्नेहल, संगीत मैनाक नंदी का है, कहानी का कांसेप्ट सी पी सिंह, कैमरा कमल लोखंडवाला  है, इ पी हैं रविश आनंद और मिनी शर्मा, एसोसिएट निर्माता हैं मदनपाल शर्मा मोरादाबाद। फिल्म का पोस्ट प्रोडक्शन ब्लेस्सफिल्म्स एंड पीआर में किया गया है, फिल्म प्रदर्शन के लिए तैयार है।
‘साईं बाबा फिल्म्स-97’ ने पियूष आनंद को तीन फिल्मो के लिए साइन किया है।  


Friday, January 30, 2015

यादगार ही किरदार करने की चाहः रवीना टंडन

(प्रेमबाबू शर्मा )
बॉलीवुड की मस्त-मस्त गर्ल रवीना टंडन फिर से सिल्वर स्क्रीन पर अपना जलवा बिखेरने जा रही हैं। रवीना ने शादी के बाद फिल्मों में काम करना काफी हद तक कम कर दिया है। लेकिन उनकी चाह है कि अब केवल यादगार ही किरदार करना चाहती है। उन्होंने बुढा होगा तेरा बाप और शोभना 7 नाइट्स में विवाह के बाद देखा गया। एक फिल्म बोम्बे वेलवेट में भी काम किया लेकिन फिल्म कब रीलिज होगी इस बारे में रवीना को भी नही पता। सिल्वर स्क्रीन पर एक फिर से आने का मन बना लिया है और अब रवीना अनुराग कश्यप की दो फिल्में में अपना जलवा दिखाती नजर आएगीं। हाल में वह दिल्ली में जायरा डायमंड शो रूम की ओपनिंग में पहुंची इसी दौरान उनसे मुलाकात हुई पेश प्रस्तुत मुलाकात के चंद अंश ।
शादी के पांच के बाद सिल्वर स्क्रीन पर एक फिर से आने का मन बना लिया कैसा लग रहा है ?
अच्छा लग रहा है कला एक ऐसा कीडा है जिसे कलाकार चाह कर भी नही भुला सकता है। लेकिन पंाच कैसे बीते पता ही नही चला। जब अनुराग ने फिल्म में काम करने का आफर दिया तो चाह कर भी मना नही कर पायी।
 यह सब क्या अचानक हुआ ?
जी। दरअसल,अनुराग जी हमेशा से ही मेरे प्रिय निर्देशक रहे हैं। वह हमेशा से ही चाहते थे कि मैं उनके साथ फिल्मों में काम करूं। मैंने उनकी दो फिल्मों में काम करना स्वीकार किया है। 
जहां तक मुझे याद है, तो आखिरी बार आपने अनुराग के साथ में फिल्म शूल की थीं ?
जी हाॅ। राम गोपाल वर्मा की इस फिल्म में अनुराग कश्यप ने कहानी भी लिखी थी। जबकि इसके डारेक्टर ई निवास थे। 
बदलते समय के चलते एक की समकालीन हीरोईनस मे माधुरी और जूही ने भी सिल्बर स्क्रीन पर वापिसी की  इसको लेकर क्सा सोचती है ?
माधुरी जूही का वापिसी पर मुझे खुशी है वे गुलाब गंैग नामक सिल्बर स्क्रीन पर वापिसी कर रही है इस फिल्म की कहानी और उसमें उनके किरदार काफी मजबूत है। मैं ऐसी ही यादगार किरदार निभाने की चाह रखती हॅू।
Raveena Tandon
दो दशक से ज्यादा फिल्म इंडस्ट्री में आपने काम किया , कैसा रहा आपका यह सफर?
अब तक बहुत ही अच्छा रहा है और आगे भी अच्छा रहेगा। मैं उन भाग्यशाली लोगों में हूं, जो इस इंडस्ट्री की पैदाइश हैं। मेरे पिता फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े हुए हैं उन्हें इंडस्ट्री में करीब 50 साल हो गए। मेरी परवरिश यहां हुई और मैं जानती हूं कि एक दिन में इंडस्ट्री में ही अंतिम सांस लूंगी। हर फील्ड, हर लाइन में कुछ ऊंच-नीच तो रहती ही है, मैं लकी हूं कि मेरे आसपास के लोग- फ्रेंड, फैमिली, मजबूती से मेरे साथ खड़े रहे और आज भी खड़े हैं। मैं चाहूंगी कि आगे भी उनका साथ ऐसे ही मेरे साथ बना रहे।
अपनी इस कामयाबी में परिवार को श्रेय देना चाहेंगी?
मेरे अचीवमेंट्स में मेरे परिवार का जो सबसे बड़ा सहयोग रहा शुरुआत में मेरा परिवार नहीं जानता था कि मैं इंडस्ट्री में आऊंगी। लेकिन जब मैंने यह फैसला किया कि मुझे फिल्में करनी हैं तो उन्होंने पूरा सपोर्ट किया। मेरी कोशिश हमेशा बैलंस लाइफ जीने की कोशिश की है। कभी यह नहीं सोचा कि फिल्म इज माई लाइफ। दरअसल, फिल्में मेरी जिंदगी हैं, लेकिन यह मेरी जिंदगी का हिस्सा हैं।
अपने करियर के उतार-चढ़ाव के दौर में आप खुद को बूस्ट-अप करने के लिए क्या करती थीं?
 देखिए मुश्किल दौर में आपके साथ आपकी फैमिली होती है। पापा की सलाह हमेशा मेरे लिए काफी मायने रखती थी। पापा इस इंडस्ट्री से थे, उन्होंने भी काफी उतार-चढ़ाव देखे हैं। अप्स ऐंड डाउन तो होते ही हैं। इसकी लिए सब तैयार होते हैं। चढ़ते सूरज को हर कोई सलाम करता है। यह सिर्फ हमारी इंडस्ट्री में ही नहीं बल्कि हर जगह होता है। मुश्किल दौर में बस आपकी फैमिली का सपोर्ट होना जरूरी होता है क्योंकि यह ऐसा दौरा होता है जब आपको पता चलता है कि असल में आपका दोस्त कौन है और कौन आपके दोस्त नहीं हैं?
आपने कमर्शल फिल्म की हैं, साउथ की फिल्में की, टीवी शोज किए... कैसा रहा आपका अनुभव?
 साउथ की ही नहीं, मैंने मराठी ,बंगाली फिल्में भी की हैं। लैंग्वेज फिल्में करने का मेरा अनुभव बहुत ही अच्छा रहा है यह मेरे लिए गर्व की बात है। फिल्म एक ऐसा जरिया है जो हमेशा यूनिटिड रहता है।
कितनी भी पॉलिटिक्स क्रिएट करो लेकिन फिल्में अपने आर्ट और कल्चर से जुड़ी रहती है और कला सरहद की सीमाओं से जुड़ी नहीं है। इसके अलावा, टीवी शोज चक दे बच्चे,कामेडी का महामुकाबला,इटस माई लाइफ से जुडने का मौका मिला और मैंने बहुत ज्यादा इंजॉय किया। यह टाइम काफी अच्छा रहा। मेरे बच्चे काफी छोटे थे इसलिए हफ्ते में एक दिन की शूटिंग के शेड्यूल से मैं आसानी से फैमिली और बच्चों को पूरा टाइम दे पाई।
शादी के बाद मस्त-मस्त गर्ल व्यस्त-व्यस्त गर्ल हो गई, तो कैसे मैंनेज करती हैं?
 जी हां, शादी के बाद काफी व्यस्त शेड्यूल हो जाता है। अब मल्टि-टास्किंग करती हूं। बच्चों के क्लासेज भी याद रखने पड़ते हैं। कभी उन्हें स्विमिंग के लिए लेकर जाना होता है, कभी फुटबॉल, कभी टेनिस। बेटी कथक सीखती है तो वहां भी साथ जाती हूं। मां का रोल तो निभाना ही पड़ता है क्योंकि शादी के बाद प्रायॉरिटीज बदल जाती हैं। मुझे लगता है कि फिल्में जिंदगी भर आती-जाती रहेंगी पर बच्चों का बचपन फिर कभी वापस नहीं आएगा। मेरे लिए यही ज्यादा मायने रखता है।
फिल्मों के अलावा कौन-कौन से शौक हैं?
 म्यूजिक सुनना, खुद को रिलैक्स करने के लिए टीवी शोज देखती हूं। क्रिकेट का बहुत शौक नहीं, लेकिन अब पति और बेटे की वजह से देख लेती हूं। मुझे बच्चों के साथ टाइम बिताना ज्यादा पसंद है।
आप जायरा डायमंड की ओपनिंग में पहुंची कैसा लग रहा है ?
बहुत ही अच्छा मेहसूस हो रहा है,क्योंकि इसके एक पहले फैंचजाइज मे मुझे बुलाया था । अनिल अग्रवाल जी मेरे परिवार जैसे संबध है,इसलिए चाह कर भी ओपनिंग कार्यक्रम को स्थागित नही कर पाई। वैसे भी इस शो रूम में ढेरा डिजायन और विरायटी है,जिससे मैं प्रभावित रही हॅू ।