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Saturday, April 30, 2016

सुंदर पिचाई पर कोई क्यों नहीं बनाता फिल्म...!!

तारकेश कुमार ओझा 


80 के दशक में एक फिल्म आई थी, नाम था लव - मैरिज। किशोर उम्र में देखी गई इस फिल्म के अत्यंत साधारण होेने के बावजूद इसका मेरे जीवन में विशेष महत्व था  इस फिल्म के एक सीन से मैं कई दिनों तक रोमांचित रहा था। क्योंकि फिल्म में चरित्र अभिनेता चंद्रशेखर दुबे एक सीन पर मेरे शहर खड़गपुर का नाम लेते हैं। पेसों की तंगी और परिजनों की डांट - फटकार की परवाह किए बगैर सिर्फ अपने शहर का नाम सुनने के लिए मैने यह फिल्म कई बार देखी थी। क्योंकि इससे मुझे बड़ा सुखद अहसास होता था। वैसे मैने सुन रखा था कि महान फिल्मकार स्व,सत्यजीत राय समेत कुछ बांग्ला फिल्मों में खड़गपुर के दृश्य फिल्माए जा चुके हैं। लेकिन तब मैने सोचा भी नहीं थी कि कालांतर में मेरे शहर को केंद्र कर कभी कोई फिल्म बनेगी और उसकी यहां शूटिंग भी कई दिनों तक चलेगी। भारतीय क्रिकेट टीम के सबसे सफल कप्तान माने जाने वाले महेन्द्र सिंह धौनी पर बन रही फिल्म की शूटिंग देख हजारों शहरवासियों के साथ मुझे भी  सुखद आश्चर्य हुआ। बेशक उस कालखंड का गवाह होने की वजह से मैं मानता हूं कि धौनी की फर्श से अर्श तक पहुंचने की कहानी बिल्कुल किसी परीकथा की तरह है। कहां लेबर टाउन कहा जाने वाला खड़गपुर जैसा छोटा सा कस्बा और कहां क्रिकेट की जगमगाती दुनिया। एक नवोदित क्रिकेट खिलाड़ी के तौर पर उनके रेलवे की नौकरी के सिलसिले में शहर आने से लेकर कुछ साल के संघर्ष के बाद टीम में चयन और सफलता के शिखर तक पहुंचने का घटनाक्रम काफी हैरतअंगेज है। जिसकी वजह से धौनी व्यक्ति से ऊपर उठ कर एक परिघटना बन चुके हैं। उन पर बन रही फिल्म के बहाने जीवन में पहली बार किसी फिल्म की शूटिंग देख मेरे मन में दो सवाल उठे। पहला यही कि किसी फिल्म को बनाने में बेहिसाब धन खर्च होता है। जितने की कल्पना भी एक आम - आदमी नहीं कर सकता। दूसरा यह कि अपने देश में राजनीति , फिल्म और  क्रिकेट के सितारे ही रातों - रात प्रसिद्धि के शिखर पर पहुंच कर वह सब हासिल करने में सक्षम हैं, जिसकी दूसरे क्षेत्रों के संघर्षशील लोग कल्पना भी नहीं कर सकते। मेरे मन में अक्सर सवाल उठता है कि क्या वजह है कि मेरे शहर के वे खिलाड़ी हमेशा उपेक्षित ही रहे , जो अपने - अपने खेल के धौनी है। क्रिकेट की बदौलत जीवंत किवंदती बन गए धौनी के आश्चर्यजनक उड़ान पर हैरान होते हुए मैं अक्सर सोच में पड़ जाता हूं कि यदि बात सफलता की ही है तो उन सुंदर पिचाई पर कोई फिल्म क्यों  नहीं बनाता जो इसी शहर के आइआइटी से पढ़ कर आज इस मुकाम तक पहुंचे हैं। जबकि उनकी उपलब्धि का दायरा कहीं अधिक व्यापक है।   बेशक किसी की उपलब्धि को कम करके आंकना मेरा मकसद नहीं लेकिन यह सच है कि देश के लिए खेलने के बावजूद एक खिलाड़ी की उपलब्धियां काफी हद तक व्यक्तिगत ही होती है, जबकि इंटरनेट जैसे वरदान ने आज छोटे - बड़े और अमीर - गरीब को एक धरातल पर लाने का काम किया है। आइआइटी कैंपस जाने का अवसर मिलने पर मैं अक्सर ख्यालों में डूब जाता हूं कि इसी कैंपस में रहते हुए सुंदर पिचाई जैसे आइआइटीयंस ने पढ़ाई पूरी की होगी। जीवन के कई साल इसी शहर में उन्होंने गुजारे होंगे। कोई  नीरज उनकी सफलता को अनटोल्ड स्टोरी के तौर पर रुपहले पर्दे पर उतारने की क्यों नहीं सोचता।


लेखक पश्चिम बंगाल के खड़गपुर में रहते हैं और वरिष्ठ पत्रकार हैं।
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तारकेश कुमार ओझा, भगवानपुर, जनता विद्यालय के पास वार्ड नंबरः09 (नया) खड़गपुर ( प शिचम बंगाल) पिन ः721301
जिला प शिचम मेदिनीपुर 
संपर्कः 09434453934, 9635221463

Monday, April 25, 2016

जाइवी मोबाइल्स के नये प्रोडक्ट लांच


-प्रेमबाबू शर्मानई दिल्ली। जाइवी मोबाइल्स मैजिकाॅन इम्पेक्स प्रा. लि. के मोबाइल डिविजन ने भारत में फीचर फोन का नया प्रोडक्ट पोर्टफोलियो लांच किया है। इसमें शुरुआती कीमत 699रु. से लेकर 1199रु. के फोन हैं। शानदार स्टाइल के साथ आधुनिक तकनीक से निर्मित कम कीमत में बेहतरीन फोन है। 


नई रेंज़ की लांच पर जाइवी मोबाइल्स के सीईओ पंकज आनंद ने कहा, ‘‘हमारा प्रयास रहा है कि हम ग्राहकों को कम कीमत में अच्छा फोन दे और आने वाले सात नए फोन पेश करने की खुशी है। ये उनकी चाहत और जरूरत पूरा करेंगे जो बाजार में उपलब्ध महंगे फोन नहीं खरीद सकते। हमारे फोन 699रु., 799रु., 849रु., 949रु., 1099रु. और 1199रु. कीमत में उपलब्ध है। हमारे फोन और चार्जर भारतीय मानक ब्यूरो (आईएसआई) से मान्यता प्राप्त हैं। ये ‘मेक इन इंडिया’ प्रोडक्ट हैं जो दिल्ली में हाल में स्थापित हमारे संयंत्र में बनेंगे।’’

जाइवी के हर फीचर फोन के लिए ‘दोगुनी बचत दोगुना फायदा’ स्कीम के तहत 9 वाट का एलईडी बल्ब फ्री है। यह स्कीम भी नरेंद्र मोदी की स्कीम ‘प्रकाश पथ’ - ‘उजाला की ओर’ के अनुुरूप है जिसका मकसद आम आदमी की बिजली और पैसे की बचत करना है।

स्कीम पर श्री पंकज आनंद, सीईओ, जाइवी मोबाइल्स ने कहा, ‘‘हमारी यह पहल भी देश में जन-जन को ऊर्जा सक्षमता का संदेश देने के सरकारी प्रयास के अनुरूप है। हम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस विचार से पूर्ण सहमत हैं कि बिजली संकट दूर करने का सस्ता उपाय बिजली बचाना है न कि बिजली पैदा करना। हमारी स्कीम जन-जन में बिजली बचत की चेतना लाएगी। हम भारत में फीचर फोन की पूरी रेंज़ पर एलईडी बल्ब फ्री देंगे।’’  



कम्पनी देश में फीचर फोन बाजार की असीम संभावना का लाभ लेना चाहती है। यह आने वाले समय में इसके सारे डिवाइस भारत मंे बनाएगी। जाइवी मोबाइल्स भारत में ही बैट्री, चार्जर और हैण्ड्सफ्री बनाएगी जिससे ड्यूटी की बचत होगी जो वर्तमान में 29.5 प्रतिशत की दर से लागू है। बचत का लाभ ग्राहकों को दिया जाएगा।’’   

इस अवसर पर सीईओ श्री पंकज आनंद के साथ श्री गुरदीप सिंह, निदेशक, श्री एन के मोंगा, निदेशक, सुश्री आंचल अरोड़ा - प्रोडक्ट मैनेजर और श्री हर्ष वर्धन- हेड मार्केटिंग भी मौजूद थे। 

‘सिया के राम’ में रामायण बिल्कुल अलग दृष्टिकोण से दिखाया गयाः मदिराक्षी

प्रेमबाबू शर्मा

छोटे परदे पर अब तक रामायण कई बार दिखाया जा चुका है। लेकिन स्टार प्लस पर प्रसारित होने वाले शो ष्ष्सिया के रामष्ष् में रामायण बिल्कुल अलग दृष्टिकोण से दिखाया जाएगा। इस बार माता सीता के नजरिये को उजागर किया जाएगा। ष्ष्सिया के रामष् में सीता की महत्वपूर्ण भूमिका में बिल्कुल नया चेहरा मदिराक्षी नजर आने वाली हैं। उन्होंने अब तक केवल एक दक्षिण की फिल्म की है। मदिराक्षी ने इस शो के बारे में प्रेमबाबू शर्मा से की बातचीत


‘सिया के राम’ टीवी पर आये रामायण के दूसरे संस्करणों से कितना अलग है?

सीता और राम की कहानी हमारी संस्कृति का अभिन्न हिस्सा रहे हैं। पूरी दुनिया की सभ्यताओं को इसने प्रभावित किया है। कर्त्तव्यए सम्मान और पारिवारिक जिम्मेदारियों का इस शो का संदेश आज के समय में भी उतना ही प्रासंगिक है। हालांकि इस कहानी के सारे संस्करण राम के नजरिये से हैं और राम सीता की इस कहानी में सीता के दृष्टिकोण को शायद ही कहीं जगह मिली हो। लेकिन पहली बार कहानी सीता के नजरिये से कही गयी है जो इसके पहले सुनी नहीं गयी। कहानी सीता को एक मजबूत और स्वतंत्र महिला के रूप में दिखायेगी। सीता समानता और शिक्षा में विास रखती है और उनका अपना विचार है। 

क्या शो का फोकस सिर्फ सीता के किरदार पर रहेगा?

सीता यहां राम की सच्ची अर्धागिनी और एक मजबूत इरादों व सोच वाली महिला के रूप में दिखायी देंगी। उनका किरदार आज की हर महिला के लिये प्रासंगिक होगा। यह शो सीता के दृष्टिकोण से कही जा रही एक आदर्श दम्पति सीता और राम के रिश्ते की कहानी है। कहानी जितनी राम की है उतनी ही सीता की भी है। सबसे जरूरी कि शो में ऐसे बहुत से उदाहरण आएंगे जो आज के समाज में भी प्रासंगिक हैं।

सीता की भूमिका के लिये तैयारी किस तरह की ?

हम रामोजी फिल्मसिटी हैदराबाद में शूटिंग कर रहे हैं जो लंबे समय से मेरा अपना शहर है। सीता की भूमिका निभाना आसान नहीं है।

टीवी पर लौटा धार्मिक सीरियलों का दौर

-प्रेमबाबू शर्मा

एक दौर जब टीवी पर सास भी कभी बहू थी,कहानी घर घर की, जैसे शो की लोकप्रियता के आगे कोई भी शो नही टिक पा रहा था,लेकिन बदलते समय के साथ टीवी ने भी करबट और अब एक बार फिर से धर्मिक सीरियलों का दौर रहा है। दूरदर्शन पर सबसे पहले रामायण, श्रीकृष्णा और फिर महाभारत ने रंग जमाया। साल 2011 में एकबार फिर रामायण का जबरदस्त दौर चला और इस बार चैबीस घंटे का माध्यम होने के कारण इसका प्रभाव दूरदर्शन के जमाने से भी ज्यादा मजबूत रहा। दरअसल धर्म के जरिए टीवी रह रहकर समाज में अपने ताकतवर होने का अहसास कराता रहा है। अब एक बार फिर से अचानक बहुत सारे धार्मिक सीरियल फिर से टीवी पर धूम मचाने आ गए हैं। वजह यही है कि इसकी जडंे सिनेमा के मुकाबले ज्यादा मजबूत 

‘‘सिया के राम’ सीरियल स्टार प्लस चैनल पर खूब देखा जा रहा है। इसमें सीता के जीवन की कहानी है। सोनी टीवी पर ‘‘संकट मोचन महाबली हनुमान‘‘ और ‘‘सूर्य पुत्र कर्ण‘‘ बैक टू बैक टेलीकास्ट होने का बावजूद दिन ब दिन अपनी दर्शक संख्या बढ़ा रहे हैं। एंड टीवी चैनल पर ‘‘जय संतोषी मां‘‘ की टीआरपी लगातार परवान चढ़ रही है। स्टार गोल्ड पर पुरानी वाली महाभारत की महिमा का देश के ग्रामीण इलाकों में अब भी कोई तोड़ नहीं है। एपिक चैनल पर रामायण ने एक खास दर्शक वर्ग बना लिया है।
  डिस्कवरी किड्स पर लिटिल कृष्णा का एनिमेशन अवतार बच्चों में जबरदस्त धूम मचा रहा है। इसी चैनल पर किसना भी बच्चों को आकर्षित कर रहा है। तो, कार्टुन नेटवर्क पर रिटर्न्स ऑफ हनुमान जब बच्चे देखते हैं, तो उठने का नाम ही नहीं लेते। बच्चों के एक और चैनल पोगो पर दिख रहे छोटा भीम ने तो घर-घर में जगह बना ली है।
माना जा सकता है कि परंपरा और संस्कृति की कहानियों को अगर ताजा अंदाज में कहा जाए, तो किसी भी काल में दर्शक वर्ग बन ही जाता है। बात सही भी है कि हमारी जो परंपरा हजारों साल से चली आ रही है, दर्शकों पर उसका असर तो होता ही है। हमारे टीवी के परदे पर यह उसी असर का परिदृश्य है, जिसमें सीता, राम, हनुमान, संतोषी मां, कर्ण, कृष्ण और भीम फिर से बहुत चाव के साथ देखे जा रहे हैं। 
यह हमारे टेलीविजन का नया चेहरा है। जो सास बहू और रिश्तों के रंग से आजाद होकर एक बार फिर से धर्म के रंग में रंगता दिख रहा है। टीवी के धर्म के रंग में रंगने का यह तीसरा दौर है। सबसे पहले कोई 25 साल पहले रामायण,श्रीकृष्णा ने धूम मचाई थी। उसके तत्काल बाद टीवी पर महाभारत आई। वह पहला दौर था। दूसरा दौर आया सन 2009 के आखिर में शनिदेव की माहिमा,फिर 2011 में जब लाइफ ओके चैनल पर भगवान शिव पर आधारित ‘‘देवों के देव..महादेव‘‘ की शुरुआत हुई। जबरदस्त टीआरपी मिलने से लाइफ ओके के हौसले बुलंद हुए, तो तत्काल बाद लाइफ ओके पर कथा महादेव पुत्र बाल गणोश की भी आ गई थी।अभी कुछ दिन पहले ही रतन राजपूत और ग्रेसी सिंह मुंबई के एक मंदिर में संतोषी माता की महाआरती करती दिखीं। दोनों वहां माता का आशीर्वाद लेने आई थीं। रतन ने कहा -‘‘मैं अपने हाल ही मैं प्रसारित हुए शो को लेकर कुछ नर्वस हूं। धर्म और भगवान में मेरा विास है। इसलिए उम्मीद है कि हमारा यह सीरियल अच्छा चलेगा।‘‘ सन् 2001 की सुपरहिट फिल्म ‘‘लगान‘‘ में गौरी के किरदार से अचानक बहुत विख्यात हुई और बाद में पंद्रह साल तक लुप्त हो गई। ग्रेसी सिंह भी ‘‘संतोषी मां‘‘ में नजर आ रही हैं। ग्रेसी इसमें संतोषी माता के किरदार में हैं। रतन राजपूत भी अहम रोल में हैं। 
स्टार प्लस पर प्रसारित होने वाले सीरियल ‘‘सिया के राम’ के सेट की खूब र्चचा है। रावण के साम्राज्य के बाहरी हिस्सों की शूटिंग के लिए जल्द ही इस प्रोडक्शन की टीम श्रीलंका जाएगी। ट्रैंगल प्रोडक्शन्स की तरफ से बताया गया कि सीरियल की शूटिंग फिलहाल भारत में की जा रही है। कुछ हिस्सों की शूटिंग भुज में की गई है और जल्द ही इस टीम के लोग भूटान जाएंगे। इस सीरियल में जब रावण का घर दिखाया जाएगा, तो उसे प्रामाणिक लुक देने के लिए एक टीम श्रीलंका में शूटिंग करेगी। इस कथा को पहली बार मिथिला कुमारी सीता के दृष्टिकोण से दिखाया जा रहा है। इसमें मदिराक्षी सीता की भूमिका में है। लाइफ ओके पर देवों के देव महादेव लगातार तीन साल तक अपना रंग जमाए रहा। उस दौरान महादेव का किरदार निभाने वाले कलाकार मोहित रैना के दर्शन करने लोग उनके घर के बाहर जमा होते थे वे जहां भी जाते, लोग उनके पांव छूने लग जाते थे।टीवी पर धर्म के इस तीसरे दौर के बारे में समाजशास्त्री डॉ. विजय शर्मा कहते हैं कि ‘‘बहुत सालों से लोग टीवी पर सास बहू के सीरियल देखकर ऊब गए थे। अब एक बार फिर से हमारी संस्कृति की पारंपरिक कथाएं नए स्वरूप में आ रही हैं, तो लोग तो देखेंगे ही। यही कारण है कि गीता, रामायण और महाभारत के किरदार अलग-अलग कहानियों के साथ फिर से पूरी धमक के साथ लौट आए हैं।‘‘ सफलता के सुर जब सिर चढ़कर बोलने लगते हैं, तो सुनने वाले भी मिल ही जाते हैं। यही कारण है कि सीता, राम, हनुमान, कर्ण और कृष्ण, सारे के सारे टीआरपी के मैदान में बाजी मारने को बेताब हैं। सही मायने में कहा जाए तो दुनिया में किसी भी देश के मुकाबले भारत में टीवी बहुत देर से आया है। हमारे देश में टीवी का वास्तविक विकास तो सिर्फ बीस-पच्चीस साल ही पुराना है। यह अभी-अभी जवान हुआ है। टेलीविजन के असली विकास की शुरुआत को अभी लगभग ढाई दशक का समय भी नहीं बीता लेकिन टीवी आज सबसे ज्यादा और गहरे असरकारक माध्यम के रूप में हमारे सामने है। आज किसी को भी अपनी बात कहनी हो, तो टीवी सबसे व्यापक, सबसे तेज और सबसे असरकारक माध्यम है। तब, जब हमारे देश में सिर्फ दूरदर्शन ही हुआ करता था, तब से ही रामायण और महाभारत के दौर में इसकी भनक मिल गई थी। इसी कारण धार्मिक सीरियल रह रहकर मजबूती के साथ सामने आते रहे हैं।पच्चीस साल पहले जब दूरदर्शन पर रामायण सीरियल आया था तो लोग उस समय टीवी के सामने दिया जलाकर, फूल चढ़ाने के साथ जूते-चप्पल उतारकर सीरियल देखते थे और सीरियल की समाप्ति पर आरती के बाद प्रसाद भी बांटा करते थे। बी.आर. चोपड़ा के महाभारत के कृष्ण नीतीश भारद्वाज को तो गांवों में लोग भगवान का अवतार ही मानते थे। टीवी धारावाहिक निर्माता धीरज कुमार की बात बिल्कुल सही लगती है कि ‘‘आज के पेरेंट्स चाहते हैं कि उनके बच्चे धार्मिक धारावाहिक देखें और उनसे संस्कार लेने के साथ अच्छी बातें भी सीखें। इसलिए धार्मिक धारावाहिक कुछ-कुछ अंतराल के बाद अलग-अलग रूप में अवतरित होते रहे हैं।‘‘ सोनी, कलर्स, जी, स्टार प्लस और ऐसे ही मुख्यधारा के चैनलों की तो छोड़िये, काटरून नेटवर्क, पोगो, सोनिक, डिज्नी, डिस्कवरी किड्स, जैसे चैनल भी इसी धारा में बह रहे हैं, क्योंकि बच्चों को तो संस्कार और परंपरा की सीख वहीं से मिलेगी। जहां तक आम दर्शक की बात है तो वह आधुनिकता की दौड़ में सहभागी होने के साथ-साथ अपनी जड़ों से जुड़े रहना ज्यादा पसंद करता है। यही देखकर टीवी के परदे का ताजा परिदृश्य देखें, तो सच्चाई यही है कि ज्यादातर चैनल धर्म के रंग की ऐसी कहानियां रच रहे हैं जिनसे समाज को प्रेरणा मिले और बच्चे, बड़े और बूढ़े हर किसी के जीवन में कुछ न कुछ बदलाव आए। टीवी धारावाहिकों की फैक्टरी के नाम से मशहूर एकता कपूर की इस बात में दम है कि व्यक्ति चाहे कितना भी आधुनिक क्यों न हो जाए, वह उस आधुनिकता को भी धर्म के अनुसार ही जीता है। क्योंकि संस्कार हमारे जीवन की जड़ें हैं और आपसी लड़ाई झगड़े हमारी दिनर्चया का हिस्सा। ये सारी चीजें साथ-साथ चलती हैं। यही वजह है कि टीवी के परदे पर अचानक बहुत रंग भर गई जिंदगी की कहानियों के बीच धर्म ने भी अपनी धमक फिर से बना ली है

‘चक्रवर्ती सम्राट अशोक’ में नए अशोक

-प्रेमबाबू शर्मा

कलर्स पर प्रसारित होने वाले धारावाहिक ‘चक्रवर्ती सम्राट अशोक’ अब कई सालों का लीप ले रहा है और खास बात यह है कि इसमें लोगों के चहीते अशोक यानी कि सिद्धार्थ निगम की जगह मोहित रैना दिखने वाले हैं।
पिछले कई दिनों से यह चर्चा चल रही थी कि सालों के लीप के बाद अशोक का किरदार कौन करेगा। अब खुद चैनल ने मोहित के नाम की आधिकारिक घोषणा कर दी है।

मोहित इससे पहले देवों के देव महादेव में काम कर चुके हैं और इसमें मोहित को काफी पसंद किया गया था। चक्रवर्ती सम्राट अशोक में बदलाव को लेकर कई दिनों से बातें हो रही हैं।

खुद चैनल की ओर से जारी किए गए एक टीजर में दिखाया जा चुका है कि अशोक अब बड़े हो चुके हैं। हालांकि उसमें बदले गए अशोक का चेहरा नहीं गुप्त रखा गया था।

24 शहरों में होगा "भजन रत्‍न’’ रिएलिटी शो का ऑडिशन

अनूप जलोटा, मालिनी अवस्‍थी और पंडित बिरजू महराज करेंगे इस शो को जज

-प्रेमबाबू शर्मा


नई दिल्‍ली। एक बार फिर देश में रिएलिटी शो की धूम मची है। डांस इंडिया डांस, यू थिंक यू कैन डांस, के बीच एक नये रिएलिटी शो का आगाज होने जा रहा हैा लेकिन यह रिएलिटी शो बिलकुल अनूठा है। जो भजन पर बेस्‍ड हैा अथ इंटरटेनमेंट के बैनर तले शुरू होने जा रहे इस रिएलिटी शो क नाम रखा गया है भजन रत्‍न । इस रिएलिटी शो के डायरेक्‍टर पंकज नारायण कहते हैं, ‘’ हम पूरे देश से भजन रत्‍न ढूंढ रहे हैं और यह अपनी तरह का पहला रीयालिटी शो है जिसमें नामी गिरामी बॉलीवुड हस्तियों का uuu yuuu समर्थन मिल रहा है। इस रिएलिटी शो का ऑडिशन 28 मई से शुरू होगा जो 9 जुलाई तक चलेगा। मुंबई, दिल्‍ली, चंडीगढ, देहरादून, गुडगांव, नोएडा, पटना, रांची, हैदराबाद आदि 24 शहरों में इसका ऑडिशन होगा। आस्‍था चैनल पर प्रसारित होने वाले भजन रत्‍न रिएलिटी शो को दर्शक 15 जुलाई से देख सकेंगे।

यह अपने आप में पहली तरह का अनूठा रियालिटी शो है जिसमें सभी धर्म के लोग गाएंगे जिसमें सूफी भी शामिल होगा। जो जीतेगा उसे ‘’भजन रत्‍न‘’ के सम्‍मान से नवाजा जाएगा। एक समय था जब लोग हरिओम शरण और अनूप जलोटा के भजनों को सुनकर अपने दिन की शुरुआत करते थे, समाचार में सुनाई पडता था कि सचिन तेंदुलकर क्रीज पर जाने से पहले हरिओम शरण की भजन सुनते थे जिससे उनकी एकाग्रता बनी रहे। लेकिन नई पीढी बदलते परिवेश में इस परंपरा से दूर सी होती जा रही थी। इसी को ध्‍यान में रखते हुए इस कांसेप्‍ट के जरिए लोगों को उनके जडों से जोडना इसका मकसद है जिससे सर्वधर्म समभाव स्‍थापित किया जा सके।
भजन सिंगर अनूप जलोटा, लोकगायक मालिनी अवस्‍थी और कथक डांसर बिरजू महराज इस शो को जज करेंगे। इसका प्रसारण आस्‍था चैनल पर 15 जुलाई से हर शुक्रवार और शनिवार को किया जाएगा। इस शो में बॉलीवुड गायक एश्‍वर्य निगम, टीवी कलाकार रिचा सोनी तथा कथक डांसर आरूषि निशंक भी दिखाई देंगे। गौरतलब है कि देश के इस पहले भजन पर आधारित रियालिटी शो को सफल बनाने के लिए बॉलीवुड के जाने-माने म्‍युजिक डायरेक्‍टर और सिंगर अपना समर्थन देने जुटेंगे।

Saturday, April 30, 2016

सुंदर पिचाई पर कोई क्यों नहीं बनाता फिल्म...!!

तारकेश कुमार ओझा 


80 के दशक में एक फिल्म आई थी, नाम था लव - मैरिज। किशोर उम्र में देखी गई इस फिल्म के अत्यंत साधारण होेने के बावजूद इसका मेरे जीवन में विशेष महत्व था  इस फिल्म के एक सीन से मैं कई दिनों तक रोमांचित रहा था। क्योंकि फिल्म में चरित्र अभिनेता चंद्रशेखर दुबे एक सीन पर मेरे शहर खड़गपुर का नाम लेते हैं। पेसों की तंगी और परिजनों की डांट - फटकार की परवाह किए बगैर सिर्फ अपने शहर का नाम सुनने के लिए मैने यह फिल्म कई बार देखी थी। क्योंकि इससे मुझे बड़ा सुखद अहसास होता था। वैसे मैने सुन रखा था कि महान फिल्मकार स्व,सत्यजीत राय समेत कुछ बांग्ला फिल्मों में खड़गपुर के दृश्य फिल्माए जा चुके हैं। लेकिन तब मैने सोचा भी नहीं थी कि कालांतर में मेरे शहर को केंद्र कर कभी कोई फिल्म बनेगी और उसकी यहां शूटिंग भी कई दिनों तक चलेगी। भारतीय क्रिकेट टीम के सबसे सफल कप्तान माने जाने वाले महेन्द्र सिंह धौनी पर बन रही फिल्म की शूटिंग देख हजारों शहरवासियों के साथ मुझे भी  सुखद आश्चर्य हुआ। बेशक उस कालखंड का गवाह होने की वजह से मैं मानता हूं कि धौनी की फर्श से अर्श तक पहुंचने की कहानी बिल्कुल किसी परीकथा की तरह है। कहां लेबर टाउन कहा जाने वाला खड़गपुर जैसा छोटा सा कस्बा और कहां क्रिकेट की जगमगाती दुनिया। एक नवोदित क्रिकेट खिलाड़ी के तौर पर उनके रेलवे की नौकरी के सिलसिले में शहर आने से लेकर कुछ साल के संघर्ष के बाद टीम में चयन और सफलता के शिखर तक पहुंचने का घटनाक्रम काफी हैरतअंगेज है। जिसकी वजह से धौनी व्यक्ति से ऊपर उठ कर एक परिघटना बन चुके हैं। उन पर बन रही फिल्म के बहाने जीवन में पहली बार किसी फिल्म की शूटिंग देख मेरे मन में दो सवाल उठे। पहला यही कि किसी फिल्म को बनाने में बेहिसाब धन खर्च होता है। जितने की कल्पना भी एक आम - आदमी नहीं कर सकता। दूसरा यह कि अपने देश में राजनीति , फिल्म और  क्रिकेट के सितारे ही रातों - रात प्रसिद्धि के शिखर पर पहुंच कर वह सब हासिल करने में सक्षम हैं, जिसकी दूसरे क्षेत्रों के संघर्षशील लोग कल्पना भी नहीं कर सकते। मेरे मन में अक्सर सवाल उठता है कि क्या वजह है कि मेरे शहर के वे खिलाड़ी हमेशा उपेक्षित ही रहे , जो अपने - अपने खेल के धौनी है। क्रिकेट की बदौलत जीवंत किवंदती बन गए धौनी के आश्चर्यजनक उड़ान पर हैरान होते हुए मैं अक्सर सोच में पड़ जाता हूं कि यदि बात सफलता की ही है तो उन सुंदर पिचाई पर कोई फिल्म क्यों  नहीं बनाता जो इसी शहर के आइआइटी से पढ़ कर आज इस मुकाम तक पहुंचे हैं। जबकि उनकी उपलब्धि का दायरा कहीं अधिक व्यापक है।   बेशक किसी की उपलब्धि को कम करके आंकना मेरा मकसद नहीं लेकिन यह सच है कि देश के लिए खेलने के बावजूद एक खिलाड़ी की उपलब्धियां काफी हद तक व्यक्तिगत ही होती है, जबकि इंटरनेट जैसे वरदान ने आज छोटे - बड़े और अमीर - गरीब को एक धरातल पर लाने का काम किया है। आइआइटी कैंपस जाने का अवसर मिलने पर मैं अक्सर ख्यालों में डूब जाता हूं कि इसी कैंपस में रहते हुए सुंदर पिचाई जैसे आइआइटीयंस ने पढ़ाई पूरी की होगी। जीवन के कई साल इसी शहर में उन्होंने गुजारे होंगे। कोई  नीरज उनकी सफलता को अनटोल्ड स्टोरी के तौर पर रुपहले पर्दे पर उतारने की क्यों नहीं सोचता।


लेखक पश्चिम बंगाल के खड़गपुर में रहते हैं और वरिष्ठ पत्रकार हैं।
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तारकेश कुमार ओझा, भगवानपुर, जनता विद्यालय के पास वार्ड नंबरः09 (नया) खड़गपुर ( प शिचम बंगाल) पिन ः721301
जिला प शिचम मेदिनीपुर 
संपर्कः 09434453934, 9635221463

Monday, April 25, 2016

जाइवी मोबाइल्स के नये प्रोडक्ट लांच


-प्रेमबाबू शर्मानई दिल्ली। जाइवी मोबाइल्स मैजिकाॅन इम्पेक्स प्रा. लि. के मोबाइल डिविजन ने भारत में फीचर फोन का नया प्रोडक्ट पोर्टफोलियो लांच किया है। इसमें शुरुआती कीमत 699रु. से लेकर 1199रु. के फोन हैं। शानदार स्टाइल के साथ आधुनिक तकनीक से निर्मित कम कीमत में बेहतरीन फोन है। 


नई रेंज़ की लांच पर जाइवी मोबाइल्स के सीईओ पंकज आनंद ने कहा, ‘‘हमारा प्रयास रहा है कि हम ग्राहकों को कम कीमत में अच्छा फोन दे और आने वाले सात नए फोन पेश करने की खुशी है। ये उनकी चाहत और जरूरत पूरा करेंगे जो बाजार में उपलब्ध महंगे फोन नहीं खरीद सकते। हमारे फोन 699रु., 799रु., 849रु., 949रु., 1099रु. और 1199रु. कीमत में उपलब्ध है। हमारे फोन और चार्जर भारतीय मानक ब्यूरो (आईएसआई) से मान्यता प्राप्त हैं। ये ‘मेक इन इंडिया’ प्रोडक्ट हैं जो दिल्ली में हाल में स्थापित हमारे संयंत्र में बनेंगे।’’

जाइवी के हर फीचर फोन के लिए ‘दोगुनी बचत दोगुना फायदा’ स्कीम के तहत 9 वाट का एलईडी बल्ब फ्री है। यह स्कीम भी नरेंद्र मोदी की स्कीम ‘प्रकाश पथ’ - ‘उजाला की ओर’ के अनुुरूप है जिसका मकसद आम आदमी की बिजली और पैसे की बचत करना है।

स्कीम पर श्री पंकज आनंद, सीईओ, जाइवी मोबाइल्स ने कहा, ‘‘हमारी यह पहल भी देश में जन-जन को ऊर्जा सक्षमता का संदेश देने के सरकारी प्रयास के अनुरूप है। हम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस विचार से पूर्ण सहमत हैं कि बिजली संकट दूर करने का सस्ता उपाय बिजली बचाना है न कि बिजली पैदा करना। हमारी स्कीम जन-जन में बिजली बचत की चेतना लाएगी। हम भारत में फीचर फोन की पूरी रेंज़ पर एलईडी बल्ब फ्री देंगे।’’  



कम्पनी देश में फीचर फोन बाजार की असीम संभावना का लाभ लेना चाहती है। यह आने वाले समय में इसके सारे डिवाइस भारत मंे बनाएगी। जाइवी मोबाइल्स भारत में ही बैट्री, चार्जर और हैण्ड्सफ्री बनाएगी जिससे ड्यूटी की बचत होगी जो वर्तमान में 29.5 प्रतिशत की दर से लागू है। बचत का लाभ ग्राहकों को दिया जाएगा।’’   

इस अवसर पर सीईओ श्री पंकज आनंद के साथ श्री गुरदीप सिंह, निदेशक, श्री एन के मोंगा, निदेशक, सुश्री आंचल अरोड़ा - प्रोडक्ट मैनेजर और श्री हर्ष वर्धन- हेड मार्केटिंग भी मौजूद थे। 

‘सिया के राम’ में रामायण बिल्कुल अलग दृष्टिकोण से दिखाया गयाः मदिराक्षी

प्रेमबाबू शर्मा

छोटे परदे पर अब तक रामायण कई बार दिखाया जा चुका है। लेकिन स्टार प्लस पर प्रसारित होने वाले शो ष्ष्सिया के रामष्ष् में रामायण बिल्कुल अलग दृष्टिकोण से दिखाया जाएगा। इस बार माता सीता के नजरिये को उजागर किया जाएगा। ष्ष्सिया के रामष् में सीता की महत्वपूर्ण भूमिका में बिल्कुल नया चेहरा मदिराक्षी नजर आने वाली हैं। उन्होंने अब तक केवल एक दक्षिण की फिल्म की है। मदिराक्षी ने इस शो के बारे में प्रेमबाबू शर्मा से की बातचीत


‘सिया के राम’ टीवी पर आये रामायण के दूसरे संस्करणों से कितना अलग है?

सीता और राम की कहानी हमारी संस्कृति का अभिन्न हिस्सा रहे हैं। पूरी दुनिया की सभ्यताओं को इसने प्रभावित किया है। कर्त्तव्यए सम्मान और पारिवारिक जिम्मेदारियों का इस शो का संदेश आज के समय में भी उतना ही प्रासंगिक है। हालांकि इस कहानी के सारे संस्करण राम के नजरिये से हैं और राम सीता की इस कहानी में सीता के दृष्टिकोण को शायद ही कहीं जगह मिली हो। लेकिन पहली बार कहानी सीता के नजरिये से कही गयी है जो इसके पहले सुनी नहीं गयी। कहानी सीता को एक मजबूत और स्वतंत्र महिला के रूप में दिखायेगी। सीता समानता और शिक्षा में विास रखती है और उनका अपना विचार है। 

क्या शो का फोकस सिर्फ सीता के किरदार पर रहेगा?

सीता यहां राम की सच्ची अर्धागिनी और एक मजबूत इरादों व सोच वाली महिला के रूप में दिखायी देंगी। उनका किरदार आज की हर महिला के लिये प्रासंगिक होगा। यह शो सीता के दृष्टिकोण से कही जा रही एक आदर्श दम्पति सीता और राम के रिश्ते की कहानी है। कहानी जितनी राम की है उतनी ही सीता की भी है। सबसे जरूरी कि शो में ऐसे बहुत से उदाहरण आएंगे जो आज के समाज में भी प्रासंगिक हैं।

सीता की भूमिका के लिये तैयारी किस तरह की ?

हम रामोजी फिल्मसिटी हैदराबाद में शूटिंग कर रहे हैं जो लंबे समय से मेरा अपना शहर है। सीता की भूमिका निभाना आसान नहीं है।

टीवी पर लौटा धार्मिक सीरियलों का दौर

-प्रेमबाबू शर्मा

एक दौर जब टीवी पर सास भी कभी बहू थी,कहानी घर घर की, जैसे शो की लोकप्रियता के आगे कोई भी शो नही टिक पा रहा था,लेकिन बदलते समय के साथ टीवी ने भी करबट और अब एक बार फिर से धर्मिक सीरियलों का दौर रहा है। दूरदर्शन पर सबसे पहले रामायण, श्रीकृष्णा और फिर महाभारत ने रंग जमाया। साल 2011 में एकबार फिर रामायण का जबरदस्त दौर चला और इस बार चैबीस घंटे का माध्यम होने के कारण इसका प्रभाव दूरदर्शन के जमाने से भी ज्यादा मजबूत रहा। दरअसल धर्म के जरिए टीवी रह रहकर समाज में अपने ताकतवर होने का अहसास कराता रहा है। अब एक बार फिर से अचानक बहुत सारे धार्मिक सीरियल फिर से टीवी पर धूम मचाने आ गए हैं। वजह यही है कि इसकी जडंे सिनेमा के मुकाबले ज्यादा मजबूत 

‘‘सिया के राम’ सीरियल स्टार प्लस चैनल पर खूब देखा जा रहा है। इसमें सीता के जीवन की कहानी है। सोनी टीवी पर ‘‘संकट मोचन महाबली हनुमान‘‘ और ‘‘सूर्य पुत्र कर्ण‘‘ बैक टू बैक टेलीकास्ट होने का बावजूद दिन ब दिन अपनी दर्शक संख्या बढ़ा रहे हैं। एंड टीवी चैनल पर ‘‘जय संतोषी मां‘‘ की टीआरपी लगातार परवान चढ़ रही है। स्टार गोल्ड पर पुरानी वाली महाभारत की महिमा का देश के ग्रामीण इलाकों में अब भी कोई तोड़ नहीं है। एपिक चैनल पर रामायण ने एक खास दर्शक वर्ग बना लिया है।
  डिस्कवरी किड्स पर लिटिल कृष्णा का एनिमेशन अवतार बच्चों में जबरदस्त धूम मचा रहा है। इसी चैनल पर किसना भी बच्चों को आकर्षित कर रहा है। तो, कार्टुन नेटवर्क पर रिटर्न्स ऑफ हनुमान जब बच्चे देखते हैं, तो उठने का नाम ही नहीं लेते। बच्चों के एक और चैनल पोगो पर दिख रहे छोटा भीम ने तो घर-घर में जगह बना ली है।
माना जा सकता है कि परंपरा और संस्कृति की कहानियों को अगर ताजा अंदाज में कहा जाए, तो किसी भी काल में दर्शक वर्ग बन ही जाता है। बात सही भी है कि हमारी जो परंपरा हजारों साल से चली आ रही है, दर्शकों पर उसका असर तो होता ही है। हमारे टीवी के परदे पर यह उसी असर का परिदृश्य है, जिसमें सीता, राम, हनुमान, संतोषी मां, कर्ण, कृष्ण और भीम फिर से बहुत चाव के साथ देखे जा रहे हैं। 
यह हमारे टेलीविजन का नया चेहरा है। जो सास बहू और रिश्तों के रंग से आजाद होकर एक बार फिर से धर्म के रंग में रंगता दिख रहा है। टीवी के धर्म के रंग में रंगने का यह तीसरा दौर है। सबसे पहले कोई 25 साल पहले रामायण,श्रीकृष्णा ने धूम मचाई थी। उसके तत्काल बाद टीवी पर महाभारत आई। वह पहला दौर था। दूसरा दौर आया सन 2009 के आखिर में शनिदेव की माहिमा,फिर 2011 में जब लाइफ ओके चैनल पर भगवान शिव पर आधारित ‘‘देवों के देव..महादेव‘‘ की शुरुआत हुई। जबरदस्त टीआरपी मिलने से लाइफ ओके के हौसले बुलंद हुए, तो तत्काल बाद लाइफ ओके पर कथा महादेव पुत्र बाल गणोश की भी आ गई थी।अभी कुछ दिन पहले ही रतन राजपूत और ग्रेसी सिंह मुंबई के एक मंदिर में संतोषी माता की महाआरती करती दिखीं। दोनों वहां माता का आशीर्वाद लेने आई थीं। रतन ने कहा -‘‘मैं अपने हाल ही मैं प्रसारित हुए शो को लेकर कुछ नर्वस हूं। धर्म और भगवान में मेरा विास है। इसलिए उम्मीद है कि हमारा यह सीरियल अच्छा चलेगा।‘‘ सन् 2001 की सुपरहिट फिल्म ‘‘लगान‘‘ में गौरी के किरदार से अचानक बहुत विख्यात हुई और बाद में पंद्रह साल तक लुप्त हो गई। ग्रेसी सिंह भी ‘‘संतोषी मां‘‘ में नजर आ रही हैं। ग्रेसी इसमें संतोषी माता के किरदार में हैं। रतन राजपूत भी अहम रोल में हैं। 
स्टार प्लस पर प्रसारित होने वाले सीरियल ‘‘सिया के राम’ के सेट की खूब र्चचा है। रावण के साम्राज्य के बाहरी हिस्सों की शूटिंग के लिए जल्द ही इस प्रोडक्शन की टीम श्रीलंका जाएगी। ट्रैंगल प्रोडक्शन्स की तरफ से बताया गया कि सीरियल की शूटिंग फिलहाल भारत में की जा रही है। कुछ हिस्सों की शूटिंग भुज में की गई है और जल्द ही इस टीम के लोग भूटान जाएंगे। इस सीरियल में जब रावण का घर दिखाया जाएगा, तो उसे प्रामाणिक लुक देने के लिए एक टीम श्रीलंका में शूटिंग करेगी। इस कथा को पहली बार मिथिला कुमारी सीता के दृष्टिकोण से दिखाया जा रहा है। इसमें मदिराक्षी सीता की भूमिका में है। लाइफ ओके पर देवों के देव महादेव लगातार तीन साल तक अपना रंग जमाए रहा। उस दौरान महादेव का किरदार निभाने वाले कलाकार मोहित रैना के दर्शन करने लोग उनके घर के बाहर जमा होते थे वे जहां भी जाते, लोग उनके पांव छूने लग जाते थे।टीवी पर धर्म के इस तीसरे दौर के बारे में समाजशास्त्री डॉ. विजय शर्मा कहते हैं कि ‘‘बहुत सालों से लोग टीवी पर सास बहू के सीरियल देखकर ऊब गए थे। अब एक बार फिर से हमारी संस्कृति की पारंपरिक कथाएं नए स्वरूप में आ रही हैं, तो लोग तो देखेंगे ही। यही कारण है कि गीता, रामायण और महाभारत के किरदार अलग-अलग कहानियों के साथ फिर से पूरी धमक के साथ लौट आए हैं।‘‘ सफलता के सुर जब सिर चढ़कर बोलने लगते हैं, तो सुनने वाले भी मिल ही जाते हैं। यही कारण है कि सीता, राम, हनुमान, कर्ण और कृष्ण, सारे के सारे टीआरपी के मैदान में बाजी मारने को बेताब हैं। सही मायने में कहा जाए तो दुनिया में किसी भी देश के मुकाबले भारत में टीवी बहुत देर से आया है। हमारे देश में टीवी का वास्तविक विकास तो सिर्फ बीस-पच्चीस साल ही पुराना है। यह अभी-अभी जवान हुआ है। टेलीविजन के असली विकास की शुरुआत को अभी लगभग ढाई दशक का समय भी नहीं बीता लेकिन टीवी आज सबसे ज्यादा और गहरे असरकारक माध्यम के रूप में हमारे सामने है। आज किसी को भी अपनी बात कहनी हो, तो टीवी सबसे व्यापक, सबसे तेज और सबसे असरकारक माध्यम है। तब, जब हमारे देश में सिर्फ दूरदर्शन ही हुआ करता था, तब से ही रामायण और महाभारत के दौर में इसकी भनक मिल गई थी। इसी कारण धार्मिक सीरियल रह रहकर मजबूती के साथ सामने आते रहे हैं।पच्चीस साल पहले जब दूरदर्शन पर रामायण सीरियल आया था तो लोग उस समय टीवी के सामने दिया जलाकर, फूल चढ़ाने के साथ जूते-चप्पल उतारकर सीरियल देखते थे और सीरियल की समाप्ति पर आरती के बाद प्रसाद भी बांटा करते थे। बी.आर. चोपड़ा के महाभारत के कृष्ण नीतीश भारद्वाज को तो गांवों में लोग भगवान का अवतार ही मानते थे। टीवी धारावाहिक निर्माता धीरज कुमार की बात बिल्कुल सही लगती है कि ‘‘आज के पेरेंट्स चाहते हैं कि उनके बच्चे धार्मिक धारावाहिक देखें और उनसे संस्कार लेने के साथ अच्छी बातें भी सीखें। इसलिए धार्मिक धारावाहिक कुछ-कुछ अंतराल के बाद अलग-अलग रूप में अवतरित होते रहे हैं।‘‘ सोनी, कलर्स, जी, स्टार प्लस और ऐसे ही मुख्यधारा के चैनलों की तो छोड़िये, काटरून नेटवर्क, पोगो, सोनिक, डिज्नी, डिस्कवरी किड्स, जैसे चैनल भी इसी धारा में बह रहे हैं, क्योंकि बच्चों को तो संस्कार और परंपरा की सीख वहीं से मिलेगी। जहां तक आम दर्शक की बात है तो वह आधुनिकता की दौड़ में सहभागी होने के साथ-साथ अपनी जड़ों से जुड़े रहना ज्यादा पसंद करता है। यही देखकर टीवी के परदे का ताजा परिदृश्य देखें, तो सच्चाई यही है कि ज्यादातर चैनल धर्म के रंग की ऐसी कहानियां रच रहे हैं जिनसे समाज को प्रेरणा मिले और बच्चे, बड़े और बूढ़े हर किसी के जीवन में कुछ न कुछ बदलाव आए। टीवी धारावाहिकों की फैक्टरी के नाम से मशहूर एकता कपूर की इस बात में दम है कि व्यक्ति चाहे कितना भी आधुनिक क्यों न हो जाए, वह उस आधुनिकता को भी धर्म के अनुसार ही जीता है। क्योंकि संस्कार हमारे जीवन की जड़ें हैं और आपसी लड़ाई झगड़े हमारी दिनर्चया का हिस्सा। ये सारी चीजें साथ-साथ चलती हैं। यही वजह है कि टीवी के परदे पर अचानक बहुत रंग भर गई जिंदगी की कहानियों के बीच धर्म ने भी अपनी धमक फिर से बना ली है

‘चक्रवर्ती सम्राट अशोक’ में नए अशोक

-प्रेमबाबू शर्मा

कलर्स पर प्रसारित होने वाले धारावाहिक ‘चक्रवर्ती सम्राट अशोक’ अब कई सालों का लीप ले रहा है और खास बात यह है कि इसमें लोगों के चहीते अशोक यानी कि सिद्धार्थ निगम की जगह मोहित रैना दिखने वाले हैं।
पिछले कई दिनों से यह चर्चा चल रही थी कि सालों के लीप के बाद अशोक का किरदार कौन करेगा। अब खुद चैनल ने मोहित के नाम की आधिकारिक घोषणा कर दी है।

मोहित इससे पहले देवों के देव महादेव में काम कर चुके हैं और इसमें मोहित को काफी पसंद किया गया था। चक्रवर्ती सम्राट अशोक में बदलाव को लेकर कई दिनों से बातें हो रही हैं।

खुद चैनल की ओर से जारी किए गए एक टीजर में दिखाया जा चुका है कि अशोक अब बड़े हो चुके हैं। हालांकि उसमें बदले गए अशोक का चेहरा नहीं गुप्त रखा गया था।

24 शहरों में होगा "भजन रत्‍न’’ रिएलिटी शो का ऑडिशन

अनूप जलोटा, मालिनी अवस्‍थी और पंडित बिरजू महराज करेंगे इस शो को जज

-प्रेमबाबू शर्मा


नई दिल्‍ली। एक बार फिर देश में रिएलिटी शो की धूम मची है। डांस इंडिया डांस, यू थिंक यू कैन डांस, के बीच एक नये रिएलिटी शो का आगाज होने जा रहा हैा लेकिन यह रिएलिटी शो बिलकुल अनूठा है। जो भजन पर बेस्‍ड हैा अथ इंटरटेनमेंट के बैनर तले शुरू होने जा रहे इस रिएलिटी शो क नाम रखा गया है भजन रत्‍न । इस रिएलिटी शो के डायरेक्‍टर पंकज नारायण कहते हैं, ‘’ हम पूरे देश से भजन रत्‍न ढूंढ रहे हैं और यह अपनी तरह का पहला रीयालिटी शो है जिसमें नामी गिरामी बॉलीवुड हस्तियों का uuu yuuu समर्थन मिल रहा है। इस रिएलिटी शो का ऑडिशन 28 मई से शुरू होगा जो 9 जुलाई तक चलेगा। मुंबई, दिल्‍ली, चंडीगढ, देहरादून, गुडगांव, नोएडा, पटना, रांची, हैदराबाद आदि 24 शहरों में इसका ऑडिशन होगा। आस्‍था चैनल पर प्रसारित होने वाले भजन रत्‍न रिएलिटी शो को दर्शक 15 जुलाई से देख सकेंगे।

यह अपने आप में पहली तरह का अनूठा रियालिटी शो है जिसमें सभी धर्म के लोग गाएंगे जिसमें सूफी भी शामिल होगा। जो जीतेगा उसे ‘’भजन रत्‍न‘’ के सम्‍मान से नवाजा जाएगा। एक समय था जब लोग हरिओम शरण और अनूप जलोटा के भजनों को सुनकर अपने दिन की शुरुआत करते थे, समाचार में सुनाई पडता था कि सचिन तेंदुलकर क्रीज पर जाने से पहले हरिओम शरण की भजन सुनते थे जिससे उनकी एकाग्रता बनी रहे। लेकिन नई पीढी बदलते परिवेश में इस परंपरा से दूर सी होती जा रही थी। इसी को ध्‍यान में रखते हुए इस कांसेप्‍ट के जरिए लोगों को उनके जडों से जोडना इसका मकसद है जिससे सर्वधर्म समभाव स्‍थापित किया जा सके।
भजन सिंगर अनूप जलोटा, लोकगायक मालिनी अवस्‍थी और कथक डांसर बिरजू महराज इस शो को जज करेंगे। इसका प्रसारण आस्‍था चैनल पर 15 जुलाई से हर शुक्रवार और शनिवार को किया जाएगा। इस शो में बॉलीवुड गायक एश्‍वर्य निगम, टीवी कलाकार रिचा सोनी तथा कथक डांसर आरूषि निशंक भी दिखाई देंगे। गौरतलब है कि देश के इस पहले भजन पर आधारित रियालिटी शो को सफल बनाने के लिए बॉलीवुड के जाने-माने म्‍युजिक डायरेक्‍टर और सिंगर अपना समर्थन देने जुटेंगे।